Khatron Ke Khiladi 15 से फिर बाहर हुए गौरव खन्ना, रोते हुए रोहित शेट्टी से कही ये बड़ी बात
Gaurav Khanna Quit Khatron ke Khiladi 15: इस समय सब जगह रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी 15 (Khatron Ke Khiladi 15) और बिग बॉस छाया हुआ है, रियलिटी शो को पसंद करने वाले सोशल मीडिया पर इन दो के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा कर रहे हैं. स्टंट बेस्ड इस शो की एक अलग ही फैन फॉलोइंग है. खतरों के खिलाड़ी 15 अपने फिलाने की ओर बढ़ रहा है. इसी बीच गौरव खन्ना के फैंस के लिए निराश करने वाली खबर आई है. जानकारी के मुताबिक गौरव ने शो को अलविदा कह दिया है, उन्होंने शो को उस वक्त छोड़ने का फैसला लिया जब वह स्टंट जीत गए थे. आइए जानते हैं कि उन्होंने ये फैसला क्यों लिया.
Khatron Ke Khiladi 15 से बाहर हुए गौरव खन्ना
रविवार के एपिसोड में देखा गया कि एक स्टंट के दौरान तीन खिलाड़ी ने हिस्सा लिया था. जिसमें रूहानिका धवन और रुबीना दिलैक और गौरव खन्ना शामिल थे. ये स्टंट एलिमिनेशन का था और गौरव ने इस राउंड को जीत लिया था. मगर उन्होंने बीच में ही शो छोड़ने का निर्णय कर लिया. उन्होंने रोहित से ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ से बाहर होने की इजाजत मांगी. यह सब सुनकर शो के होस्ट रोहित समेत सभी खिलाड़ी शॉक्ड हो गए. हालांकि, बाद में उनका सभी खिलाड़ियों ने हौंसला बढ़ाया और जिसके बाद उन्होंने स्टंट कंप्लीट किया.
स्टंट जीतने के बाद किया शो छोड़ने का फैसला
शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में इस स्टंट राउंड को जीतने के बाद गौरव ने कहा, ‘भले ही मैंने इसे जीत लिया है, फिर भी मैं शो से बाहर निकलना चाहता हूं क्योंकि मुझे पता है कि यह मेरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है. और मैं अब आपको इस तरह से निराश नहीं करना चाहता, क्योंकि मुझे पता है कि इस शो में स्टंट का स्तर बिल्कुल अलग है.
शो को छोड़ने को लेकर क्या बोले गौरव
उन्होंने ये भी कहा, ‘सबसे पहले, मुझे बहुत बुरा लग रहा है. मैंने जानबूझकर यह नहीं कहा कि मैं इस स्टंट को रद्द करना चाहता हूं. मुझे बाद में पता चला कि रूहानिका ने भी इसे रद्द करने की इच्छा जताई थी. और अगर मैं शारीरिक रूप से 100 प्रतिशत फिट नहीं हूं, तो मैं किसी ऐसे व्यक्ति की जगह नहीं लेना चाहता जो 100 प्रतिशत तैयार हो.’ गौरव की बात पर रोहित शेट्टी ने भी हामी भरी. उन्होंने कहा कि हम किसी की हेल्थ को मुश्किल में नहीं डाल सकते हैं. वहीं दूसरी ओर रुहानिका धवन ने गौरव के जाने से पहले उन्हें गले लगाया. एक्टर ने भी उन्हें शो जीतने की शुभकामनाएं दी.
I know winning is important but Gaurav couldn’t have ended his KKK15 journey on a better note— sacrificing his place for a pure soul like Ruhanika. ❤️
— Nush (@nushtweets_) September 13, 2026
This was hands down the most beautiful segment of the entire show. ????❤️#GauravKhanna#KKK15 pic.twitter.com/TtsCvJ0R78
पहली बार भी चोट की वजह से हुए बाहर
आपको बता दें कि खतरों के खिलाड़ी से गौरव पहली बार एलिमिनेशन स्टंट के दौरान बाहर हुए थे. एक वॉटर स्टंट के दौरान संतुलन बिगड़ने से वह पानी में गिर गए थे और सीढ़ी से ऊपर चढ़ते समय उनकी कोहनी में गंभीर चोट लग गई थी. इसके बाद दर्द बढ़ने की वजह से उन्हें टास्क अधूरा छोड़ना पड़ा और वे एलिमिनेट हो गए. हालांकि, वह चोट की वजह से वो स्टंट पूरा नहीं कर पाए थे. जिसके चलते मेकर्स ने उन्हें वाइल्ड कार्ड के तौर पर एंट्री देते हुए शो में आने का पहला मौका दिया था. वहीं, अब दोबारा उनकी हेल्थ खबरा हो गई है तो उन्होंने शो को छोड़ने का फैसला कर लिया है.
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भारत में सेमीकंडक्टर का जलवा, चिप कंपनियों में आया 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश
SEMICON India: भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. देश को चिप निर्माण और डिजाइन का ग्लोबल सेंटर बनाने की कोशिशें अब जमीन पर साफ दिखने लगी हैं. ट्रैक्सन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के सेमीकंडक्टर सेक्टर की 281 कंपनियों ने अब तक कुल मिलाकर 1.4 अरब डॉलर यानी करीब 13,377 करोड़ रुपये की इक्विटी फंडिंग हासिल कर ली है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी पूंजी का लगभग आधा हिस्सा साल 2025 के बाद से जुटाया गया है. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय कंपनियों में कितनी तेजी से बढ़ी है.
इस पूरे बदलाव के बीच एक बड़ा मौका सामने आ रहा है. देश की राजधानी नई दिल्ली के द्वारका में स्थित यशोभूमि में 17 से 19 सितंबर तक सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण का आयोजन होने जा रहा है. इस बड़े वैश्विक आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इस मंच पर दुनिया भर के बड़े उद्योगपति, नीति निर्माता, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ जुटेंगे, जिससे भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
हाल के समय में पूंजी जुटाने में भारी उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के बाद से ही इस सेक्टर ने 70.1 करोड़ डॉलर का निवेश हासिल किया है. इसमें साल 2026 में अब तक जुटाए गए 22.8 करोड़ डॉलर की रकम भी शामिल है. भारत में इस समय कुल 3,557 सेमीकंडक्टर कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें से 281 कंपनियों को किसी न किसी रूप में फंडिंग मिली है, जबकि 142 कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने शुद्ध रूप से इक्विटी फंडिंग हासिल की है.
अगर पिछले पांच सालों के सफर को देखें, तो यह तेजी हैरान करने वाली है. साल 2021 में पूरे सेक्टर को केवल 4.9 करोड़ डॉलर का निवेश मिला था, जो साल 2025 तक बढ़कर 47.3 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया. इस पांच साल के दौर में सेक्टर की फंडिंग 36 प्रतिशत से ज्यादा की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है. यह दिखाता है कि भारत अब केवल चिप का खरीदार नहीं, बल्कि उसे बनाने और विकसित करने का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
निवेश पाने में टेसोल्व रही सबसे आगे
फंडिंग हासिल करने वाली कंपनियों की बात करें तो टेसोल्व सेमीकंडक्टर इस दौड़ में सबसे आगे खड़ी नजर आती है. कंपनी ने अब तक 21.3 करोड़ डॉलर की कुल फंडिंग अपने नाम की है. इसके बाद इलजिन इलेक्ट्रॉनिक्स ने 19.8 करोड़ डॉलर और वीवीडीएन ने 12.9 करोड़ डॉलर का निवेश जुटाया है. यह आंकड़े बताते हैं कि स्थापित और मजबूत तकनीकी बुनियाद वाली कंपनियां बड़े निवेशकों को अपनी ओर खींचने में सफल रही हैं.
बिजनेस मॉडल के स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी ईएमएस मॉडल साल 2025 से सबसे ज्यादा पसंदीदा रहा है और इसने 31.3 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटाई है. इसके अलावा एम्बेडेड हार्डवेयर सेक्टर ने 5.19 करोड़ डॉलर का निवेश हासिल किया, जो पूरी तरह से पिछले बारह महीनों में आया है. साथ ही पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटेड सर्किट और फैबलेस कंपनियों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है.
बेंगलुरु बना चिप सेक्टर की पहली पसंद
देश के भीतर सेमीकंडक्टर गतिविधियों का सबसे बड़ा गढ़ बेंगलुरु बना हुआ है. भारत की 3,557 कंपनियों में से लगभग 18 प्रतिशत यानी 626 कंपनियां अकेले बेंगलुरु में स्थित हैं. इतना ही नहीं, देश में आई कुल इक्विटी फंडिंग का 40.1 प्रतिशत हिस्सा भी इसी शहर की झोली में गया है. इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश का नोएडा रहा, जिसने 16.4 प्रतिशत फंडिंग हासिल की. गुरुग्राम 10.7 प्रतिशत, कोच्चि 8.8 प्रतिशत और हैदराबाद 6.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इसके बाद रहे.
कंपनियों के लिए अधिग्रहण बना बाहर निकलने का रास्ता
भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार में निवेशकों और प्रमोटर्स के लिए अधिग्रहण सबसे लोकप्रिय रास्ता साबित हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, 42 आईपीओ की तुलना में 62 अधिग्रहण दर्ज किए गए हैं. कंपनियों को अपने पहले फंडिंग राउंड से अधिग्रहण तक पहुंचने में औसतन 11.8 साल का समय लगा, जबकि शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली कंपनियों को इस मुकाम तक पहुंचने में 16.5 साल लगे.
अब तक का सबसे बड़ा सौदा ईइन्फोचिप्स का रहा, जिसका 28.2 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण हुआ था. इसके बाद नारायण पावरटेक का सौदा 26.2 करोड़ डॉलर और स्मार्टप्ले टेक्नोलॉजीज का सौदा 18 करोड़ डॉलर में हुआ था. वहीं हाल के महीनों में शेयर बाजार में भी हलचल रही है. अगस्त 2026 में टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स 26.3 करोड़ डॉलर के मार्केट कैप के साथ लिस्ट हुई, जबकि मैरीट्रॉनिक्स ने जून 2026 में बाजार में अपनी शुरुआत की. यह सारे संकेत बताते हैं कि भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग अब मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है.
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