शराब की दुकान बंद करवाने प्रदर्शन पर उतरे ग्रामीण, पुलिस ने रोका तो किया चक्काजाम
शिवपुरी जिले के नावली गांव में कुछ ग्रामीण सरकारी शराब की दुकान बंद करने की मांग को लेकर प्रदर्शन पर उतर गए। जब ये ग्रामीण प्रदर्शन करने के लिए निकले तब पुलिस ने इन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस बात से नाराज ग्रामीणों ने रास्ते में चक्का जाम कर दिया।
जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों ने यह चक्का जाम खोड़ सिरसौद मार्ग पर किया। इस वजह से 1 घंटे तक वाहनों का आवागमन प्रभावित हुआ। पुलिस ने समझाइश देकर मौके से ग्रामीणों को हटाया। तब कहीं जाकर यातायात सुचारू रूप से शुरू हो सका।
शराब दुकान बंद करवाने के लिए प्रदर्शन
बता दें कि नावली गांव के महिला पुरुष गांव से आधा किलोमीटर दूर सिरसौद थाना क्षेत्र में मौजूद सरकारी शराब की दुकान को बंद कराना चाहते हैं। इसके लिए ये प्रदर्शन कर रहे थे। जैसे ही सूचना मिली और ग्रामीणों को नावली मोड़ पर ही रोक लिया। यह बात ग्रामीणों को पसंद नहीं आई और उन्होंने चक्का जाम कर दिया।
एक घंटे तक बंद रहा आवागमन
ग्रामीणों को जब प्रदर्शन करने से रोका गया, तो वह नाराज होकर सड़क पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। पुलिस में ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की लेकिन वह शराब की दुकान बंद करने की बात पर अड़े रहे। इसके बाद चौकी प्रभारी संजय लोधी ग्रामीणों के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि दुकान सरकारी है और नियमों के अनुसार उसका स्थान बदलना संभव नहीं है। इसके बाद ग्रामीण वापस अपने गांव लौट गए।
गणेश चतुर्थी पर धीरेंद्र शास्त्री की खास अपील, मिट्टी की मूर्ति और विसर्जन को लेकर कही ये बात
गणेश चतुर्थी के मौके पर देशभर में भगवान गणेश की प्रतिमा घरों और पंडालों में स्थापित की जा रही है। इसी बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से खास अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश के जरिए लोगों से इस बार घर में केवल मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा लाने और उसकी पूजा करने की बात कही है।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी अपील में मिट्टी की गणेश प्रतिमा को धार्मिक और पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें प्रकृति और हमारी जिम्मेदारी से भी जोड़ता है। ऐसे में प्रतिमा चुनते समय भी हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने की मिट्टी की गणेश प्रतिमा रखने की अपील
मिट्टी की गणेश प्रतिमा को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की अपील का एक बड़ा कारण पर्यावरण भी है। गणेश उत्सव के बाद बड़ी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों, तालाबों और दूसरे जलस्रोतों में किया जाता है। ऐसे में ऐसी प्रतिमा चुनना जरूरी है, जो विसर्जन के बाद आसानी से प्रकृति में मिल सके। मिट्टी से बनी प्रतिमा इस लिहाज से आसान विकल्प मानी जाती है।
घर में ही कर सकते हैं मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन
धीरेंद्र शास्त्री ने मिट्टी की प्रतिमा के विसर्जन को लेकर भी लोगों को एक आसान तरीका बताया। उन्होंने कहा कि पूजा पूरी होने के बाद मिट्टी की गणेश प्रतिमा को घर के गमले या बगीचे में भी विसर्जित किया जा सकता है। इससे लोगों को नदी या तालाब तक प्रतिमा ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
POP की गणेश प्रतिमाओं को लेकर जताई चिंता
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी POP से बनी गणेश प्रतिमाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि POP की मूर्तियां जलस्रोतों में विसर्जित होने के बाद लंबे समय तक पूरी तरह नष्ट नहीं होतीं। इसके कारण नदियों और तालाबों में प्रतिमाओं के अवशेष दिखाई देते हैं। उन्होंने इस स्थिति को दुखद बताया और कहा कि भगवान की टूटी हुई प्रतिमाओं को जलस्रोतों के किनारे पड़ा देखना श्रद्धालुओं के लिए भी पीड़ादायक होता है।
गणेश पूजा में मिट्टी की प्रतिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में मिट्टी से प्रतिमा बनाने और पूजा के बाद उसे प्रकृति में वापस मिलाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। गणेश पूजा में भी मिट्टी की प्रतिमा को लेकर यही भाव देखने को मिलता है। प्रतिमा बनती है, उसकी पूजा होती है और फिर विसर्जन के जरिए वह वापस मिट्टी और प्रकृति का हिस्सा बन जाती है।
धीरेंद्र शास्त्री ने मिट्टी की गणेश प्रतिमा को शुभ और फलदायी बताते हुए कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। मान्यता है कि सच्चे मन, श्रद्धा और नियम के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है। उन्होंने रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि की कामना के साथ गणेश भक्तों को पूजा करने का संदेश दिया।
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