India-Canada CEPA: व्यापार समझौते पर चौथे दौर की वार्ता शुरू, इसी साल पूरा करने का लक्ष्य
भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर सोमवार को यहां चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों पक्ष इस साल बातचीत पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पांच दिन चलने वाली (14-18 सितंबर) वार्ता में वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार, उत्पत्ति के नियम और तकनीकी व्यापार बाधाओं समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी।
अधिकारी ने बताया कि तीसरे दौर की वार्ता जुलाई में ओटावा में हुई थी। दोनों देशों के 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप ये वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8.22 प्रतिशत घटकर 7.95 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 8.66 अरब अमेरिकी डॉलर था।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कनाडा को निर्यात 4.67 अरब डॉलर और आयात 3.28 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024-25 में निर्यात 4.22 अरब डॉलर और आयात 4.44 अरब डॉलर था। भारत से कनाडा को होने वाले प्रमुख निर्यात में दवाएं, लोहा और इस्पात, समुद्री खाद्य, सूती परिधान, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन आदि शामिल हैं।
मुख्य आयात में दलहन, मोती और अर्ध-कीमती पत्थर, कोयला, उर्वरक, कागज और कच्चा पेट्रोलियम शामिल हैं। भारत के प्रमुख सेवा निर्यात क्षेत्रों में दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाएं तथा अन्य कारोबारी सेवाएं शामिल हैं। कनाडा में 4,25,000 से अधिक भारतीय विद्यार्थी और एक बड़ा भारतीय समुदाय निवास करता है।
Maruti Suzuki की Jimny, Fronx और e-Vitara का Japan को कुल Export 1 लाख यूनिट के पार
मारुति सुजुकी इंडिया की भारत में बनी पांच दरवाजे वाली जिम्नी, फ्रॉन्क्स और ई-विटारा का जापान को किया गया कुल निर्यात एक लाख इकाई के पार पहुंच गया है। मारुति सुजुकी इंडिया ने दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी और उन्नत वाहन बाजारों में से एक जापान को अगस्त 2024 में फ्रॉन्क्स का निर्यात शुरू किया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में पांच दरवाजे वाली जिम्नी का निर्यात शुरू किया गया। कंपनी का पहला बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) ई-विटारा सितंबर 2025 में इस निर्यात सूची में शामिल हुआ।
इससे सुजुकी के लिए भारत की वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भूमिका और मजबूत हुई है। पांच दरवाजे वाली जिम्नी और ई-विटारा का विनिर्माण विशेष रूप से भारत में किया जाता है। मोटर वाहन विनिर्माता कंपनी ने कहा कि भारत में बने वाहनों को मिल रही बढ़ती स्वीकार्यता के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में मात्रा के लिहाज से जापान मारुति सुजुकी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा। वहीं चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में भी जापान ने यह स्थान बरकरार रखा है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने कहा, ‘‘पांच दरवाजे वाली जिम्नी, फ्रॉन्क्स और ई-विटारा का जापान को एक लाख से अधिक निर्यात भारत की विनिर्माण उत्कृष्टता की मजबूत पुष्टि है। यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि जापान दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और उन्नत वाहन बाजारों में से एक है।’’
कंपनी ने कहा कि इन मॉडलों की सफलता से पिछले वित्त वर्ष में जापान में सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन को सबसे बड़ा वाहन आयातक बनने में भी मदद मिली। पिछले वित्त वर्ष में जापान में सुजुकी के कुल आयात में मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित वाहनों की हिस्सेदारी करीब 100 प्रतिशत रही। ताकेउची ने कहा, ‘‘यह निर्यात उपलब्धि भारत-जापान साझेदारी के उल्लेखनीय विकास का भी प्रतीक है। इस सफलता से जापान मारुति सुजुकी के निर्यात के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनने में मदद मिली है।
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