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खतरे में थलपति विजय की कुर्सी? इन दलों ने छोड़ दिया साथ
तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है. सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों CPI और CPI(M) ने आगामी विधानसभा उपचुनाव में TVK के साथ मैदान में उतरने के बजाय अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. दोनों दलों का यह कदम ऐसे समय आया है, जब विजय की सरकार के लिए उपचुनाव राजनीतिक रूप से काफी अहम माने जा रहे हैं.
हालांकि, इसे सीधे तौर पर विजय सरकार से समर्थन वापस लेने के तौर पर देखना सही नहीं होगा. वाम दलों ने सरकार के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही है. यानी विधानसभा के भीतर सहयोग और चुनावी मैदान में मुकाबला दोनों को अलग-अलग रखने की रणनीति अपनाई गई है.
उपचुनाव में अलग रास्ते पर CPI और CPI(M)
तमिलनाडु की मडुरंथकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं. इन दोनों सीटों पर CPI और CPI(M) ने TVK के साथ गठबंधन करने के बजाय अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों वाम दल एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगे.
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि TVK इन उपचुनावों को अपनी सरकार और संगठन की शुरुआती परीक्षा के तौर पर देख रही है. विजय के लिए यह सिर्फ दो विधानसभा सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि यह जांचने का मौका भी है कि विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी का जमीनी संगठन कितना मजबूत है.
सरकार को समर्थन, लेकिन चुनाव में दूरी
वाम दलों का रुख पहली नजर में विरोधाभासी लग सकता है. एक तरफ CPI और CPI(M) सरकार को समर्थन दे रहे हैं, दूसरी तरफ वे TVK के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.
दरअसल, दोनों चीजों को अलग राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है. वाम दल सरकार की स्थिरता के लिए सहयोग जारी रखते हुए अपनी चुनावी पहचान भी कायम रखना चाहते हैं. खासकर ऐसे राज्य में जहां गठबंधन की राजनीति लंबे समय से चुनावी समीकरणों का अहम हिस्सा रही है.
इसका मतलब यह नहीं है कि वाम दल अभी विजय सरकार गिराने की तैयारी कर रहे हैं. बल्कि वे यह संदेश दे रहे हैं कि सरकार के मुद्दों पर समर्थन अलग चीज है और चुनावी राजनीति अलग.
विजय के लिए क्यों अहम हैं ये उपचुनाव?
TVK ने 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की राजनीति को बड़ा झटका दिया था. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.
अब उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से यह पता चलेगा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मिला समर्थन कितना स्थायी है.
अगर TVK इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो विजय यह दावा कर सकते हैं कि उनकी पार्टी का जनाधार चुनाव के बाद भी मजबूत बना हुआ है. लेकिन अगर पार्टी को नुकसान होता है तो विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ शुरुआती असंतोष के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकता है.
TVK ने भी उतारे अपने उम्मीदवार
विजय की पार्टी ने मडुरंथकम और धारापुरम सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. मरगतम कुमारवेल और पी. सत्यबामा को TVK ने उम्मीदवार बनाया है. दोनों पहले AIADMK से विधायक रह चुकी हैं और बाद में इस्तीफा देकर TVK में शामिल हुईं.
इससे चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. विजय ने ऐसे नेताओं पर भरोसा किया है जिनका संबंधित क्षेत्रों में पहले से राजनीतिक संपर्क और चुनावी अनुभव है.
गठबंधन का नाम तय, लेकिन लेफ्ट की दूरी
इसी बीच TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन को आधिकारिक नाम भी मिल चुका है ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’. इस गठबंधन में TVK के साथ कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML जैसे दल शामिल हैं. लेकिन CPI और CPI(M) ने गठबंधन से दूरी बनाए रखी है.
इस घटनाक्रम से साफ है कि विजय की राजनीतिक छतरी के नीचे सभी सहयोगी दलों को एक साथ लाना अभी आसान नहीं है. कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय दल जहां TVK के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं वाम दल अपने स्वतंत्र राजनीतिक आधार को बनाए रखना चाहते हैं.
क्या विजय सरकार पर संकट है?
CPI और CPI(M) के अलग चुनाव लड़ने से फिलहाल विजय सरकार की कुर्सी पर सीधा संकट दिखाई नहीं देता. दोनों दलों ने सरकार को समर्थन जारी रखने की बात कही है. इसलिए इसे सरकार से समर्थन वापसी कहना गलत होगा. लेकिन राजनीतिक संदेश जरूर महत्वपूर्ण है.
विजय की सरकार अगर सहयोगी दलों को चुनावी स्तर पर एकजुट नहीं रख पाती है तो भविष्य में सीट बंटवारे और गठबंधन रणनीति को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. खासकर तब, जब DMK और AIADMK जैसी स्थापित पार्टियां अपने-अपने संगठन के साथ मैदान में मौजूद हैं.
असली परीक्षा संगठन की होगी
TVK के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब स्टार पावर को स्थायी राजनीतिक संगठन में बदलने की है. विजय की लोकप्रियता ने पार्टी को तेजी से विस्तार दिया, लेकिन उपचुनाव जैसे चुनावों में बूथ स्तर का नेटवर्क, स्थानीय उम्मीदवार और क्षेत्रीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
मडुरंथकम और धारापुरम में परिणाम TVK के लिए यही संकेत देंगे कि सत्ता में आने के बाद पार्टी का संगठन जमीन पर कितना मजबूत हुआ है.
लेफ्ट का फैसला किसके लिए फायदेमंद?
CPI और CPI(M) के अलग लड़ने से सीधे तौर पर फायदा किसे होगा, यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा. यदि वाम दल अपने पारंपरिक वोट को बचा लेते हैं, तो वे भविष्य की सीट-बंटवारे की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं.
दूसरी तरफ अगर वोटों का विभाजन होता है, तो मुकाबले में तीसरे दलों को इसका फायदा मिल सकता है. ऐसे में TVK, DMK और अन्य दलों के बीच मुकाबला और अधिक रोचक हो जाएगा.
तमिलनाडु की राजनीति में CPI और CPI(M) का उपचुनाव में TVK से अलग होना विजय सरकार के लिए तत्काल संकट नहीं, लेकिन गठबंधन राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत जरूर है.
वाम दल सरकार को समर्थन देते हुए अपनी स्वतंत्र चुनावी पहचान बनाए रखना चाहते हैं. वहीं विजय के सामने चुनौती है कि वह अपनी पार्टी को एक ऐसी मजबूत राजनीतिक मशीन में बदलें, जो सिर्फ लोकप्रियता के भरोसे नहीं बल्कि संगठन और गठबंधन के दम पर भी चुनाव जीत सके.
अब 6 अक्टूबर के उपचुनाव सिर्फ दो सीटों का मुकाबला नहीं रह गए हैं. ये विजय सरकार की राजनीतिक पकड़, TVK के संगठन और उसके सहयोगी दलों के साथ रिश्तों की पहली बड़ी परीक्षा बन गए हैं.
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