Responsive Scrollable Menu

बजट कटौती के बाद बंगाल सरकार का बड़ा एक्शन: बुनियादी ढांचे की कमी के चलते 252 मदरसों को तुरंत बंद करने का आदेश

बजट कटौती के बाद बंगाल सरकार का बड़ा एक्शन: बुनियादी ढांचे की कमी के चलते 252 मदरसों को तुरंत बंद करने का आदेश

Continue reading on the app

आखिर हिंदी क्यों नहीं बन पाई राष्ट्रभाषा? 14 सितंबर और 10 जनवरी के हिंदी दिवस में क्या है अंतर, जानें 10 रोचक तथ्य

Hindi Diwas: हर साल 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है. यह दिन हिंदी भाषा के महत्व, उसके इतिहास और देश में उसके योगदान को याद करने का मौका देता है. लेकिन हिंदी से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह है कि भारत की आजादी के करीब 80 साल बाद भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला है. संविधान में हिंदी को भारत की राजभाषा कहा गया है. वहीं अंग्रेजी को भी सरकारी कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा के तौर पर जगह मिली हुई है.

 14 सितंबर और 10 जनवरी के हिंदी दिवस में क्या है अंतर?

हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए भारत में साल में दो बार खास दिन मनाए जाते हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है. 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. इसका मकसद देश के सरकारी कामकाज और प्रशासन में हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.

वहीं, 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत पहले विश्व हिंदी सम्मेलन (1975, नागपुर) की याद में हुई. इसका उद्देश्य दुनिया भर में हिंदी का प्रचार-प्रसार करना और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. सरल शब्दों में कहें तो 14 सितंबर भारत के भीतर हिंदी को मजबूत करने का दिन है, जबकि 10 जनवरी दुनिया में हिंदी के विस्तार का प्रतीक है.

यह भी पढ़ें: World Hindi Day: 10 जनवरी को क्यों मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस, जानिए इसका इतिहास, उद्देश्य और महत्व

रोचक तथ्य, जो शायद ही आप जानते हों

1. 14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. इसी फैसले की याद में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. देश में पहली बार हिंदी दिवस 1953 में मनाया गया था.

2. हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा है

भारत के संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है. संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को संघ की राजभाषा माना गया है. अंग्रेजी का इस्तेमाल भी सरकारी कामकाज में जारी है.

3. आखिर हिंदी राष्ट्रभाषा क्यों नहीं बन पाई?

आजादी के बाद राष्ट्रभाषा को लेकर संविधान सभा में लंबी बहस हुई थी. हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के विचार का कई गैर-हिंदी भाषी राज्यों, खासकर दक्षिण भारत में विरोध हुआ. लोगों को डर था कि एक भाषा को प्राथमिकता देने से दूसरी भाषाओं के साथ भेदभाव हो सकता है. बाद में भाषा को लेकर विरोध और आंदोलनों के बीच देश ने किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार आगे नहीं बढ़ाया.

4. हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस अलग हैं

भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है, जबकि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग देशों में हिंदी के इस्तेमाल और प्रचार को बढ़ावा देना है. 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। भारत सरकार ने 2006 से 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाना शुरू किया.

5. दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल 

हिंदी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में से एक है. भारत के अलावा बड़ी संख्या में लोग इसे दूसरे देशों में भी बोलते और समझते हैं. विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के कारण हिंदी की पहुंच कई देशों तक बनी हुई है.

6. कई विदेशी शब्दकोशों में पहुंच चुके हैं हिंदी के शब्द

हिंदी के कई शब्द अब अंग्रेजी में भी इस्तेमाल किए जाते हैं. ‘जुगाड़’, ‘दादागिरी’, ‘बिंदास’, ‘चमचा’, ‘चटनी’ और ‘करी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भों में अंग्रेजी में भी देखने को मिलता है. इससे पता चलता है कि हिंदी का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है.

7. फिजी में हिंदी को मिली है आधिकारिक पहचान

दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित फिजी में हिंदी का एक अलग रूप बोला जाता है, जिसे फिजियन हिंदी या फिजी हिंदी कहा जाता है. वहां भारतीय मूल की बड़ी आबादी के बीच हिंदी का इस्तेमाल होता है.

8. हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं

भारत के अलावा मॉरीशस, नेपाल, फिजी, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, सूरीनाम, गुयाना और त्रिनिदाद-टोबैगो जैसे देशों में भी हिंदी बोली या समझी जाती है. कई विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई भी होती है.

9. हिंदी के साथ बढ़ रहा डिजिटल कंटेंट

आज हिंदी का इस्तेमाल सिर्फ अखबारों, किताबों और सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया, यूट्यूब, ओटीटी, डिजिटल न्यूज और ऑनलाइन शिक्षा में हिंदी कंटेंट की मांग लगातार बढ़ी है. इससे हिंदी के इस्तेमाल का दायरा भी तेजी से बदल रहा है.

10. पढ़ाई और शोध के लिए बना केंद्रीय हिंदी संस्थान

भारत सरकार ने हिंदी की पढ़ाई, प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए 1963 में केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की थी. इसका उद्देश्य हिंदी के अध्ययन और उसके विकास को बढ़ावा देना है.

यह भी पढ़ें: हिंदी दिवस : विदेशी राजनयिकों ने हिंदी की बढ़ती वैश्विक प्रमुखता और मान्यता पर जोर दिया

Continue reading on the app

  Sports

बौखलाए मोहसिन नकवी की आंखों में खटक रहे ये दो चेहरे, पाकिस्तान क्रिकेट में फिर मचेगा घमासान, रडार पर सेलेक्टर-मेंटर

pakistan cricket board: लगातार हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है. आकिब जावेद की वरिष्ठ चयनकर्ता पद से छुट्टी की चर्चा है, वहीं, एशियन गेम्स के बाद वहाब रियाज और महिला टीम के कोचिंग स्टाफ पर भी गाज गिर सकती है. Mon, 14 Sep 2026 22:31:50 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala: ट्रंप के एक बयान ने मचा दी हलचल, ब्रिटेन में बढ़ी सियासी हलचल! #ytshorts #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-14T17:10:16+00:00

UP News: CM योगी का SP पर बड़ा वार, '2017 से पहले खराब थे हालात' | BJP |Election |Vidhansabha Chunav #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-14T17:10:06+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers