इन 4 भारतीय महिला खिलाड़ियों ने रचा इतिहास, विमेंस एशिया कप में बना डाले ये बड़े रिकॉर्ड, आप भी डालें नजर
Womens Asia Cup 2026: महिला एशिया कप 2026 का फाइनल जीतने के साथ ही टीम इंडिया ने 8वीं बार एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा किया है. भारत से जीत के लिए मिले 184 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 111 पर सिमट गई और भारत ने 72 रनों से जीत दर्ज कर खिताबी मुकाबला जीत लिया. इस जीत के साथ-साथ भारत के कई बड़े खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं.
इन खिलाड़ियों में शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, श्री चरणी और दीप्ति शर्मा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. इन खिलाड़ियों ने कई बड़े-बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं. तो आइए आज हम आपको इन सभी खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड्स के बारे में विस्तार से बताते हैं.
The skipper approves ????
— BCCI Women (@BCCIWomen) September 13, 2026
Drop your ???? if you enjoyed #TeamIndia's performance in the summit clash ????????
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शेफाली वर्मा ने बनाया सबसे बड़ा रिकॉर्ड
भारत के दाएं हाथ की स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा महिला एशिया कप में एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. शेफाली अब महिला एशिया कप में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गई हैं. भारत और श्रीलंका के बीच 13 सितंबर को खेले गए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में शेफाली ने श्रीलंका के खिलाफ 39 गेंदों पर 68 रन बनाए और सिर्फ 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया. उन्होंने स्मृति मंधाना का 2022 में बनाया 25 गेंद का रिकॉर्ड तोड़ा और महिला टी20 एशिया कप इतिहास में सबसे तेज 50 लगाने वाली बल्लेबाज बन गईं हैं.
6⃣8⃣ Runs
— BCCI Women (@BCCIWomen) September 13, 2026
3⃣9⃣ Deliveries
9⃣ fours & 2⃣ sixes
1⃣7⃣4⃣.3⃣6⃣ strike rate
Bigger the occasion, bigger the impact ft. Shafali Verma ????
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स्मृति मंधाना ने बनाए खास रिकॉर्ड
भारतीय टीम की बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान स्मृति मंधाना ने महिला एशिया कप में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया. महिला एशिया कप 2026 में हांगकांग के खिलाफ स्मृति ने 64 गेंदों पर 124 रन बनाए. ये महिला टी20 एशिया कप का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बन गया. इसी पारी के दौरान वो महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज भी बनीं और उनके अंतरराष्ट्रीय शतकों की संख्या 18 हो गई.
The star of the show ????⭐️
— BCCI Women (@BCCIWomen) September 3, 2026
Vice-captain @mandhana_smriti is adjudged the Player of the Match for her exhilarating performance as #TeamIndia are through to the semis of the #WomensAsiaCup #INDvHK pic.twitter.com/TQRaDiTM3R
श्री चरणी ने इतिहास रच बनाया बड़ा रिकॉर्ड
भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में श्री चरणी ने अपने 4 ओवर में 20 रन देकर 4 विकेट हासिल किए. इस मैच में एक विकेट लेने के साथ ही चरणी ने पूनम यादव का 8 साल पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त किया. श्री चरणी अब भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गई हैं. साल 2026 में चरणी अभी तक कुल 39 विकेट अपने नाम कर चुकी हैं. वहीं पूनम ने 2018 में कुल 35 विकेट चटकाए थे. इस लिस्ट में दीप्ति शर्मा 30 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर काबिज हैं.
Two excellent catches by Nandni Sharma and G. Kamalini ✌️
— BCCI Women (@BCCIWomen) September 13, 2026
Sree Charani with a superb over as #TeamIndia keep the scoreboard in check ✅
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इसके अलावा महिला एशिया कप 2026 में दीप्ति शर्मा भारत की दूसरी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रहीं. दीप्ति ने विमेंस एशिया कप 2026 में कुल 14 विकेट झटके. महिला एशिया कप में दीप्ति शर्मा ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया. दीप्ति वुमेन्स टी20I में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गई हैं. दीप्ति ने 2016 से अब तक 150 मैच खेले हैं, जिसकी 147 पारियों में 19.58 के औसत से 171 विकेट लिए हैं.
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कच्चा तेल 100 डॉलर पार तो भारत के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी? जानें अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 107-108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे फिलहाल व्यापक आर्थिक संकट नहीं कहा जा सकता. बाजार विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि भारत की स्थिति इस समय अपेक्षाकृत मजबूत है. देश में महंगाई नियंत्रित स्तर पर है, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का लगभग 0.8 प्रतिशत रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है.
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो बाहरी झटकों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है. हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं या पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन में गंभीर व्यवधान आता है, तो भारत के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना कठिन हो सकता है. भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88.6 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए ऊंची कीमतों का सीधा असर आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
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विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई के एक अध्ययन के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होने पर खुदरा महंगाई लगभग 49 आधार अंक तक बढ़ सकती है. दूसरी ओर यदि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क घटाती है या सब्सिडी बढ़ाती है, तो राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. तेल कीमतों में वृद्धि का प्रभाव परिवहन, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की लागत पर भी पड़ता है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से घरेलू उपभोग प्रभावित हो सकता है और परिवारों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ सकता है. वहीं यदि सरकार कीमतों का बोझ अपने ऊपर लेती है, तो सार्वजनिक वित्त और तेल विपणन कंपनियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है.
विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि यदि औसत क्रूड ऑयल मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.9 से 2.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान 0.7 से 0.8 प्रतिशत के बीच था. ऊंचे कच्चे तेल का असर विभिन्न उद्योगों पर भी अलग-अलग होगा. एयरलाइंस, पेंट, रसायन, लॉजिस्टिक्स, सीमेंट, उपभोक्ता सामान और तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ मिल सकता है. वहीं नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और घरेलू गैस आधारित क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है.
गौरतलब है कि सोमवार को ब्रेंट क्रूड नवंबर डिलीवरी के लिए 107.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता देखा गया. बाजार की नजर पश्चिम एशिया और लाल सागर के समुद्री मार्गों की स्थिति पर बनी हुई है, जहां बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
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