भोपाल में फर्जी महिला IAS का भंडाफोड़: नौकरी के नाम पर डेढ़ करोड़ की ठगी, ससुर की RTI से खुला राज!
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों पर सरकारी अफसर का रोब झाड़ने वाली तृप्ति सिंह का भंडाफोड़ हुआ है. जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े में एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. तृप्ति सिंह ने खुद को बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बताकर आधा दर्जन से ज्यादा बेरोजगार लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की है. इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह रही कि तृप्ति के फर्जी आईएएस होने का खुलासा किसी पुलिस या जांच एजेंसी के जरिए नहीं, बल्कि उसके खुद के ससुर द्वारा लगाई गई RTI (सूचना का अधिकार) से हुआ. तृप्ति के चयन और उसकी ट्रेनिंग को लेकर ससुर को गहरा शक हुआ था. ससुर ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA), मसूरी से जानकारी मांगी थी. मसूरी प्रशासनिक अकादमी ने जवाब देते हुए तृप्ति सिंह के चयन के सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके बाद उसके फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया. जांच में सामने आया है कि तृप्ति बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देती थी और खुद का प्रशासनिक अफसर का रोब दिखाकर लोगों से भारी रकम ऐंठती थी. उसने आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये ठग लिए, फिलहाल पुलिस इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं और पीड़ितों की जांच कर रही है.
हरिद्वार में आयुर्वेद और योग को मिलेगा नया मंच, ऋषिकुल के विकास से बढ़ेगा आध्यात्मिक पर्यटन
Ayurveda-Yoga: हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब भारतीय ज्ञान, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म से जुड़ा एक नया अनुभव देने की तैयारी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल के समग्र विकास के प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की है. मुख्यमंत्री ने ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं. योजना में आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और पारंपरिक स्थापत्य को भी विशेष जगह दी जाएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आयुष, योग और संस्कृत से भी जुड़ी है. इसलिए ऋषिकुल के विकास में राज्य की इस विशेष पहचान को प्रमुखता दी जानी चाहिए. यहां आयुर्वेद, योग, भारतीय दर्शन, वैदिक अध्ययन, ज्योतिष और वैदिक गणित जैसे विषयों पर उच्च स्तर की पढ़ाई और शोध की सुविधाएं विकसित करने की योजना है. इससे ऋषिकुल भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में सामने आ सकता है.
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आयुर्वेद और वेलनेस का भी बनेगा केंद्र
प्रस्तावित मास्टर प्लान में ऋषिकुल को सिर्फ शैक्षणिक और शोध संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है. यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा, योग, ध्यान और वेलनेस से जुड़ी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे हरिद्वार आने वाले लोगों को स्वास्थ्य और मानसिक शांति से जुड़ी गतिविधियों का लाभ मिल सकेगा.
आयुर्वेद और योग को मेडिकल टूरिज्म से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है. इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से आने वाले लोगों के लिए भी हरिद्वार एक महत्वपूर्ण वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो सकता है. ऋषिकुल में होने वाली शैक्षणिक और शोध गतिविधियों से आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
प्राचीन शैली में बनेगा आधुनिक परिसर
ऋषिकुल के विकास की खास बात यह होगी कि यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक भारतीय स्थापत्य की झलक भी दिखाई देगी. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि परिसर के भवनों और उनके बाहरी स्वरूप में प्राचीन स्थापत्य शैली की झलक हो, जबकि अंदर मिलने वाली सुविधाएं आधुनिक और बेहतर हों.
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसर का विकास इस तरह किया जाए कि यहां पहुंचने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म का अनुभव हो. यानी ऋषिकुल का नया स्वरूप आधुनिक सुविधाओं और प्राचीन भारतीय परंपरा के बीच संतुलन बनाने वाला होगा.
हरिद्वार की पहचान से जुड़ेगा ऋषिकुल
हरिद्वार का नाम मां गंगा, धार्मिक पर्यटन और अध्यात्म से जुड़ा है. देश और विदेश से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. ऐसे में ऋषिकुल के विकास की योजना को भी हरिद्वार की इसी पहचान से जोड़ने पर जोर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकुल आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म को जानने और समझने का अवसर मिलना चाहिए. इससे हरिद्वार में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान, योग और वेलनेस से जुड़े पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है.
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने परियोजना से जुड़े सभी कामों को तय समय के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए अलग-अलग चरण तय किए जाएंगे और काम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. परियोजना को करीब दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही मुख्यमंत्री ने काम की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं.
प्रस्तावित योजना में योग और ध्यान, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति और शोध को एक साथ विकसित करने की परिकल्पना की गई है. इस तरह ऋषिकुल आने वाले समय में शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य, योग और अध्यात्म से जुड़ी कई गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है.
इस पहल से न केवल ऋषिकुल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है, बल्कि हरिद्वार में आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को भी नई गति मिल सकती है. उत्तराखंड की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़कर ऋषिकुल को देश-दुनिया के लोगों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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