पश्चिमी देशों और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बीच रूस ने बर्फीले आर्कटिक के सीने को चीर कर एक ऐसा तेल का खजाना खोल दिया है जिसने दुनिया के ऊर्जा समीकरण को हिला कर रख दिया। राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन भारत हैं। लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने साइबेरिया के सबसे बड़े बोस्तोक ऑयल प्रोजेक्ट से कच्चे तेल की पहली खेप को हरी झंडी दिखा दी है। अब यह खबर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलने जा रहा है। जमीन के नीचे दबा 700 करोड़ टन तेल का महाभंडार और भारत के लिए स्टेट ऑफ हॉर्मोज के संकट से हमेशा के लिए आजादी का रास्ता। रूस के उत्तरी साइबेरिया स्थित तैमीर प्रायद्वीप में शुरू हुआ वोक ऑयल प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। अब इसका पहला पॉइंट है विशाल भंडार।
अनुमान के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 700 करोड़ टन कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। दूसरा पॉइंट है उत्पादन लक्ष्य। रूस का लक्ष्य साल 2027 की दूसरी छमाही तक इस प्रोजेक्ट से सालाना 3 करोड़ टन यानी कि 30 मिलियन टन कच्चा तेल निकालने का है। तीसरा पॉइंट है पैमाना। इसे समझने के लिए आंकड़ा देखिए। भारत ने पूरे वित्त वर्ष साल 2024-25 में कुल मिलाकर 2.87 करोड़ टन घरेलू तेल का उत्पादन किया था। यानी रूस के इस अकेले प्रोजेक्ट का शुरुआती लक्ष्य भारत के कुल सालाना घरेलू उत्पादन से भी ज्यादा है। अब -40 से 50° के तापमान में चल रहे इस मेगा प्रोजेक्ट में अब तक करीब 4.4 लाख करोड़ का भारी भरकम निवेश हो चुका है। यहां 500 से अधिक लोग काम कर रहे हैं और 16,000 से ज्यादा भारी मशीनें तैनात है। परिवहन के लिए 3500 मीटर लंबे रनवे वाला एक नया एयरपोर्ट भी तैयार किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट का भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व क्या है?
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल हॉर्मूज के संकरित समुद्री रास्ते से मंगाता है। जनवरी फरवरी 2026 के आंकड़े के मुताबिक इस रास्ते से भारत रोजाना करीब 26 लाख बैरल तेल आयात कर रहा था जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आता है। लेकिन यह रास्ता हमेशा से बारूद के ढेर पर रहता है। अमेरिका, ईरान का तनाव ही देख लीजिए। खाड़ी में सैन्य तनाव, प्रतिबंध और टैंकरों पर हमलों के खतरे लगातार बने रहे हैं। दूसरा पॉइंट है इसका सप्लाई चेन का चोक पॉइंट। अगर हरमूज में कोई भी रुकावट आती है तो भारत में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वह देखा भी हमने है। यहीं पर पुतिन का वो स्टोक प्रोजेक्ट भारत के लिए गेम चेंजर साबित हुआ।
वो स्टोक प्रोजेक्ट से निकलने वाला तेल 790 कि.मी. लंबी पाइपलाइन के जरिए कारा सागर के बुक सेवेवर टर्मिनल तक पहुंचेगा। वहां से बड़े ऑयल टैंकरों के जरिए इसे सीधे भारत और अन्य देशों में भेजा जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है। फायदा यह है रूस से आने वाले इन जहाजों और की संकरी खाड़ी से गुजरने की कोई जरूरत नहीं होगी। यह एक पूरी तरह स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री मार्ग है। जानकारों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरी क्षमता से शुरू होने के बाद भारत की हॉर्मू पर निर्भरता घटकर लगभग आधी रह सकती है। यह केवल खरीदार और विक्रेता का हिस्सा नहीं है। भारत इस प्रोजेक्ट में एक अहम साझेदार है। चलिए अब जान लेते हैं भारत की 49.9% हिस्सेदारी और आर्थिक फायदे।
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यमन में संघर्ष और तेज़ हो गया। सरकारी सेनाओं ने लाल सागर के पास ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों पर हमले किए, और हूथियों ने पड़ोसी देश सऊदी अरब पर हमले किए, जो यमन की सरकार का समर्थन करता है। यमनी सरकार ने कहा है कि पिछले हफ़्ते मोखा बंदरगाह शहर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (जो एक अहम शिपिंग रूट है) में एक द्वीप के हाथ से निकल जाने के बाद, वह लाल सागर के तट पर और सेना भेजेगी। संयुक्त राष्ट्र की माइग्रेशन एजेंसी के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से फिर से शुरू हुई लड़ाई की वजह से 82,000 से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
हालात बिगड़ने, खासकर सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर और रेड सी में शिपिंग पर हूथी हमलों की वजह से, दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। रेड सी के किनारे होदेइदा प्रांत के खोखा शहर से भागने वाली एक महिला ने बताया कि जब वह आधी रात को वहां से निकल रही थी, तो पास ही एक मोर्टार शेल गिरा; इसके कुछ ही देर बाद हूथी विद्रोहियों ने शहर पर कब्ज़ा कर लिया।
उसने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता के कारण नाम न बताने की शर्त पर कहा मैंने अपनी आँखों से कारों और बसों को जलते हुए देखा और सड़क पर बच्चों और महिलाओं की लाशें पड़ी थीं वह मंज़र बहुत भयानक था। सऊदी अधिकारियों ने रविवार दोपहर दक्षिणी शहर आभा और खमीस मुशैत प्रांत में सायरन बजाकर लोगों को संभावित हमले से बचने के लिए सुरक्षित जगह पर जाने की चेतावनी दी। हाल के हफ़्तों में हूथी विद्रोहियों ने इन दोनों इलाकों पर कई बार हमले किए हैं।
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