माकपा की समीक्षा बैठक से केरल में कम्युनिस्ट आंदोलन होगा मजबूत: EP Jayarajan
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता ई पी जयराजन ने सोमवार को कहा कि पार्टी की राज्य इकाई की विस्तारित समिति की बैठक हाल के विधानसभा चुनावों में मिली हार का कारण बनी कमियों को दूर करने और केरलम में कम्युनिस्ट आंदोलन को ‘‘मजबूती व नई ताकत’’ प्रदान करने में मदद करेगी। माकपा विधानसभा चुनावों में मिली हार के कारणों की समीक्षा के लिए समिति की तीन दिवसीय बैठक कर रही है, जो रविवार को शुरू हुई। जयराजन ने संवाददाताओं कहा कि बैठक में पार्टी के दस्तावेज और चर्चाएं ‘‘सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, विस्तारित समिति की यह बैठक केरलम में कम्युनिस्ट आंदोलन और माकपा को अधिक मजबूती एवं ताकत प्रदान करेगी।
यह बैठक पार्टी को और अधिक मजबूत बनाने में सक्षम होगी।’’ कन्नूर से बड़े सुधारों की उठ रही मांगों के बारे में पूछे जाने पर जयराजन ने कहा कि पार्टी की हार किसी एक विशेष जिले तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय हम यहां इस (विधानसभा) चुनाव के सही-गलत की समीक्षा करने के लिए नहीं हैं। केरलम में पार्टी को सभी जिलों में समस्याओं का सामना करना पड़ा।
यह सिर्फ कन्नूर नहीं है; हमें सभी जिलों में हार का सामना करना पड़ा। वह हार एक सामान्य परिणाम है।’’ उन्होंने कहा कि इस अप्रत्याशित चुनाव परिणाम के कारणों पर व्यापक चर्चा के तहत यह बैठक आयोजित की जा रही है। जयराजन ने कहा, ‘‘हम पूरी पार्टी में इस बात पर स्पष्टता हासिल करने के लिए चर्चा कर रहे हैं कि हार क्यों हुई और विचारों एवं चर्चा को बहुत ध्यान से समझ रहे हैं।
एक बार स्पष्टता हासिल हो जाने के बाद इस पर विचार-विमर्श व चर्चा कर रहे हैं कि कमियों व खामियों को कैसे सुधारा जाए।’’ उन्होंने कहा कि चर्चा और आलोचना कम्युनिस्ट आंदोलन का अभिन्न अंग हैं।
Ganesh Chaturthi Vrat Katha 2026: गणेश चतुर्थी पर जरूर पढ़ें बप्पा की ये पौराणिक कथाएं, जानें क्यों कहलाए प्रथम पूज्य
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ उनकी व्रत कथा पढ़ने और सुनने की परंपरा रही है। भगवान गणेश को हिंदू धर्म में विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में गणपति की आराधना को सुख, समृद्धि और सौभाग्य से जोड़ा गया है।
गणेश चतुर्थी की पूजा के दौरान गणपति मंत्रों के जाप के साथ उनकी पौराणिक कथाओं का श्रवण भी किया जाता है। भगवान गणेश के जन्म से लेकर उनके प्रथम पूज्य बनने तक की कई कथाएं धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में प्रचलित हैं। यहां जानिए दो प्रमुख कथाएं।
भगवान गणेश के जन्म की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती कैलाश पर्वत पर स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण डाल दिए। इसके बाद माता पार्वती ने उस बालक को द्वार पर पहरा देने का दायित्व सौंपा।
माता पार्वती ने बालक से कहा कि जब तक वह स्नान करके वापस नहीं आतीं, तब तक किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दिया जाए। बालक ने माता की आज्ञा का पालन करने का वचन दिया।
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और अंदर जाने लगे। बालक ने उन्हें भी माता पार्वती की आज्ञा का हवाला देते हुए रोक दिया। भगवान शिव ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने स्थान से नहीं हटा। इसके बाद दोनों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, क्रोधित भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को इसकी जानकारी मिली तो वह बेहद दुखी और क्रोधित हो गईं। उनके क्रोध से देवता भी चिंतित हो गए।
इसके बाद भगवान शिव ने अपने गणों को एक ऐसे बालक का सिर लाने के लिए भेजा जिसकी माता अपने बच्चे की ओर पीठ करके सोई हो। गणों को एक हाथी के बच्चे का मस्तक मिला। भगवान शिव ने हाथी का सिर बालक के धड़ पर स्थापित किया और उसे पुनर्जीवन प्रदान किया।
अपने पुत्र को दोबारा जीवित देखकर माता पार्वती प्रसन्न हुईं। इसके बाद देवताओं ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया। भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य और पूजा की शुरुआत सबसे पहले गणेश जी की पूजा से होगी। इसी वजह से उन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है।
कैसे बने गणेश जी प्रथम पूज्य?
गणेश जी के प्रथम पूज्य बनने से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी है। कथा के अनुसार, एक बार देवताओं के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि सबसे पहले किस देवता की पूजा की जानी चाहिए। इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के सामने एक प्रतियोगिता रखी।
भगवान शिव ने कहा कि जो सबसे पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही विजेता होगा और उसे प्रथम पूजा का अधिकार मिलेगा।
प्रतियोगिता शुरू होते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। दूसरी ओर गणेश जी का वाहन मूषक था। उन्होंने विचार किया कि मूषक की गति से पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करना आसान नहीं होगा।
इसके बाद गणेश जी ने एक उपाय निकाला। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को एक स्थान पर बैठाया और उनकी सात बार परिक्रमा की। फिर उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड और सभी लोकों का वास है। इसलिए उनके माता-पिता की परिक्रमा करना उनके लिए पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने के समान है।
गणेश जी की बुद्धि और भक्ति से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न हुए। भगवान शिव ने गणेश जी को प्रतियोगिता का विजेता घोषित किया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।
इसलिए शुभ कार्य से पहले होती है गणेश पूजा
धार्मिक परंपरा में इसी कथा को भगवान गणेश के प्रथम पूज्य बनने से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत गणपति पूजा से करने की परंपरा है।
गणेश चतुर्थी के दिन भक्त श्रद्धा के साथ गणपति की पूजा करते हैं और उनकी कथाओं का पाठ या श्रवण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे मन में भक्ति भाव बढ़ता है और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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