'भारत के प्रति अत्यधिक झुकाव से बाहर निकलना होगा', हसीना के जाने के बाद ढाका का रुख सख्त, रिश्तों को 'रीसेट' करने की तैयारी
बांग्लादेश की अंतरिम/नई सरकार ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की बात कही है। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि वह आपसी हितों के आधार पर भारत के साथ नए द्विपक्षीय संबंध बनाना चाहता है। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच रहे संबंधों को 'असहज' और अत्यधिक एकतरफा झुकाव वाला करार दिया। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि ढाका अब भारत के साथ रिश्तों में अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहता है। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों की तुलना में सीधी द्विपक्षीय बातचीत पर जोर दिया।
विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को ये बातें कहीं। इससे दो दिन पहले बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था; इसके बजाय निमंत्रण 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन' (BIMSTEC) के अध्यक्ष को भेजा गया था।
नई दिल्ली में दो दिन तक चला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। भारत ने रहमान को BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, जबकि फरवरी में उन्हें एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा गया था।
'भारत के साथ रिश्ते नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं'
कबीर ने पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय रिश्तों को 'नए सिरे से शुरू' करना चाहता है और बहुपक्षीय मंचों के बजाय सीधी बातचीत के जरिए नए संबंधों की ओर बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा, "हम एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं, जो बहुपक्षीय मंच के बजाय द्विपक्षीय बातचीत के जरिए होना चाहिए।"
अगस्त 2024 में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद सत्ता से हटाए जाने पर शेख हसीना भारत भाग आई थीं और नई दिल्ली ने उन्हें शरण दी थी, जिसके बाद से भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आ गया है।इसे भी पढ़ें: ईरानी राष्ट्रपति ने हिंदू धर्मगुरु के पैर छुए? पाकिस्तानी जहर क्यों उगलने लगे
कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को भारत के प्रति 'अत्यधिक झुकाव' से आगे बढ़ने और नई दिल्ली के साथ रिश्तों में अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रिश्तों को अन्य देशों के साथ बांग्लादेश के व्यापक संबंधों के हिस्से के रूप में देखते हुए आपसी हितों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें भारत के प्रति अत्यधिक आकर्षण से बाहर निकलना होगा। भारत बस एक और देश है और बांग्लादेश उसके साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।"
एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, "भारत में नाश्ता, भारत में लंच, भारत में डिनर -- तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे?"
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री अमेरिका जाएँगी
कोबीर ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री रहमान 21 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगी, जहाँ वे UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र में शामिल होंगी और 26 सितंबर तक वहीं रहेंगी।इसे भी पढ़ें: ब्रिक्स से जाते हुए UAE के Prince ने ड्राइवर के साथ क्या किया! एयरपोर्ट पर हुई चौंकाने वाली घटना
जब उनसे UNGA के दौरान रहमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान ऐसी बैठकें अक्सर आखिरी समय में तय होती हैं। कोबीर ने कहा, "प्रधानमंत्री की यात्रा का मुख्य मकसद UN जनरल असेंबली को संबोधित करना है।" उन्होंने आगे कहा कि साइडलाइन बैठकों की जानकारी सही समय पर पता चल जाएगी।
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IAEA सम्मेलन में नहीं जा सकेंगे Iran के परमाणु प्रमुख Mohammad Eslami, यात्रा प्रतिबंध से छूट नामंजूर
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए जाने के कारण उनके वियना में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के सदस्य देशों की वार्षिक बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है और ऐसा कई वर्षों में पहली बार होगा। इस संबंधी घटनाक्रम से अवगत एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इस्लामी का अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सम्मेलन में शामिल नहीं होना ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तेजी से बिगड़ते संबंधों का एक और संकेत है।
जुलाई में नाजुक युद्धविराम समझौता टूटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर फिर से लड़ाई हो रही है। अधिकारी ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि ऑस्ट्रिया ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति से इस्लामी पर लगे यात्रा प्रतिबंध से छूट दिए जाने का अनुरोध किया था लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। वियना में संयुक्त राष्ट्र की मेजबानी करने वाला देश होने के नाते ऑस्ट्रिया यात्रा प्रतिबंधों से छूट का अनुरोध कर सकता है ताकि वे अधिकारी संयुक्त राष्ट्र में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा ले सकें जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इजराइल और अमेरिका द्वारा जून 2025 में 12 दिन के युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले किए जाने के बाद से तेहरान ने आईएईए के निरीक्षकों को हमलों से प्रभावित परमाणु स्थलों तक पहुंच की अनुमति नहीं दी है जबकि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत ईरान आईएईए के साथ कानूनी रूप से सहयोग करने के लिए बाध्य है। आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। इसे हथियार बनाने के स्तर की 90 प्रतिशत शुद्धता तक पहुंचाने के लिए केवल एक छोटी तकनीकी प्रक्रिया की जरूरत है।
ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने पिछले साल तथाकथित ‘स्नैपबैक’ व्यवस्था (प्रतिबंधों को स्वतः फिर से लागू करने की व्यवस्था) को सक्रिय किया था, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रतिबंध फिर से लागू हो गए। इन तीनों यूरोपीय देशों ने कहा था कि ईरान 2015 के उस परमाणु समझौते की शर्तों से जानबूझकर पीछे हट गया, जिसके तहत ये प्रतिबंध हटाए गए थे।
फिर से लागू किए गए इन संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों में यात्रा प्रतिबंध, पारंपरिक हथियारों पर रोक, बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने पर पाबंदियां, संपत्तियां जब्त करना और परमाणु संबंधी प्रौद्योगिकी के उत्पादन पर प्रतिबंध शामिल हैं। अधिकारी ने हालांकि कहा कि इस्लामी के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना नहीं है लेकिन ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने शनिवार को बताया कि इस्लामी आईएईए सम्मेलन में हिस्सा लेने और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के लिए तेहरान से वियना रवाना हो गए हैं। इस्लामी 2021 में ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन का प्रमुख नियुक्त होने के बाद से वियना में आईएईए महासम्मेलन में नियमित रूप से शामिल होते और उसे संबोधित करते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी वियना स्थित आईएईए मुख्यालय में सोमवार से शुक्रवार तक महासम्मेलन के लिए एकत्र होंगे। वे एजेंसी के बजट पर विचार कर उसे मंजूरी देंगे और पश्चिम एशिया में परमाणु सुरक्षा उपायों समेत अन्य नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
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