UP में 9.5 लाख युवाओं को मिली पारदर्शी सरकारी नौकरी: CM Yogi Adityanath
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई और कोई नहीं कह सकता कि नियुक्ति में कोई भेदभाव हुआ, किसी प्रकार का कोई लेन देन हुआ। आदित्यनाथ ने यहां 194 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के छठे स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।
यह एक बड़ी संख्या है और कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि उसकी नियुक्ति में कोई भेदभाव हुआ है या किसी प्रकार का कोई लेनदेन हुआ है।’’ आदित्यनाथ ने दावा किया कि राज्य में कुल 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें साढ़े नौ लाख उनके कार्यकाल में नियुक्त हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब नियुक्ति में पारदर्शिता है तो राज्य की प्रगति भी सही दिशा में आगे बढ़ेगी। हमने नौ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है।
राज्य में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है और अब उत्तर प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट नहीं है।’’ आदित्यनाथ ने कहा,‘‘नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी परिणाम उतना ही हमारे लिए फलदायी होगा। अगर हम अच्छे लोगों का चयन नहीं करेंगे, चयन की प्रक्रिया में विसंगतियां होंगी, भेदभाव होगा, पारदर्शिता-शुचिता का अभाव होगा तो जीवन भर उस पूरे संस्थान को कीमत चुकानी होगी।’’ उन्होंने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन उसकी कीमत पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। पहचान का संकट संस्थान से जुड़े हुए लोगों के सामने खड़ा होता है।
ठीक वैसे ही जैसे एक व्यक्ति और एक परिवार की (गलतियों की) कीमत उत्तर प्रदेश को चुकानी पड़ती थी।’’ आदित्यनाथ ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल और आयुर्विज्ञान संस्थान के एक होने और पूर्व में आने वाली शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से यहां की शिकायत कम आती हैं।’’ उन्होंने कहा,‘‘यहां के लिए पैसा देने में परेशानी नहीं होती थी, लेकिन हमें शिकायत सुनते सुनते परेशानी जरूर होती थी। उनसे मुक्ति मिली और यह मुक्ति तब मिलती है जब जनता में संतुष्टि होती है।’’ संस्थान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 20 बिस्तरों का एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकर रहने वाला अस्पताल आज उत्तर प्रदेश के एक बेहतरीन स्वास्थ्य एवं शिक्षा का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र समेत हर क्षेत्र में प्रगति हुई है।
आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से कहा कि वे बीमारियों के बदलते पैटर्न से दस कदम आगे रहें और अनुसंधान, इलाज एवं जांच की क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाते रहें। एक आधिकारिक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री योगी ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा ,‘‘ हमारे ही डेटा पर पश्चिमी देश शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं, जबकि हम अपने डाटा को संरक्षित नहीं कर पाते।
’’ उन्होंने कहा कि अपने मेडिकल डेटा को संरक्षित कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी होंगी। उन्होंने कहा कि आइआइटी कानपुर के साथ ‘मेडटेक सेंटर आफ एक्सीलेंस’, एसजीपीजीआइ में ‘सेंटर आफ एक्सीलेंस’, ‘मेडिकल डिवाइस पार्क’ और ‘फार्मा पार्क’ इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं। एआई भी चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि छह वर्षों में इस संस्थान के प्रति लोगों की धारणा बदली है। उन्होंने कहा कि संस्थान का नाम एक दिन पूरी दुनिया में होगा और दावा किया कि इसकी प्रगति देखकर लगता है कि एक दिन नोबेल पुरस्कार भी मिलेगा। पाठक ने कहा, ‘‘आज का युवा पूरी दुनिया को मुठ्ठी में देखना चाहता है और यहां के युवा एक नया रास्ता दिखाएंगे।
यह संस्थान छह सालों में बहुत आगे बढ़ा है और आने वाले छह सालों में और आगे जाएगा।’’ उन्होंने 2017 के पहले की पूर्ववर्ती सरकारों पर ठेका-पट्टा संस्कृति में लिप्त रहने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि भाजपा का कोई कार्यकर्ता ठेका-पट्टा में संलिप्त नजर नहीं आएगा।
Rajasthan Urban Local Body Election Results | अलवर में BJP को शुरुआती बढ़त, पाली और उदयपुर में कांग्रेस आगे, जानें निकाय चुनाव का पूरा गणित और वोटिंग आंकड़े
राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों के लिए वोटों की गिनती सोमवार (14 सितंबर) को शुरू हुई। राज्य भर के 309 शहरी निकायों के नतीजे आने की उम्मीद है। इन चुनावों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं, जिनमें कुल 10,245 पार्षद सीटें और लगभग 1.44 करोड़ योग्य मतदाता हैं। राजस्थान शहरी निकाय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा और कांग्रेस के बीच जोरदार मुकाबला देखा जा रहा है। अलवर में जहां भारतीय जनता पार्टी ने शुरुआती बढ़त बनाकर बढ़त हासिल की है, वहीं पाली और उदयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। 309 निकायों के 10,000 से अधिक वार्डों में वोटों की गिनती जारी है, और ये शुरुआती रुझान राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं के बदलते राजनीतिक रुझान का संकेत दे रहे हैं।
वोटिंग दो चरणों में हुई थी, पहला चरण 9 सितंबर को 162 शहरी निकायों में और दूसरा चरण 11 सितंबर को हुआ था। पहले चरण में 162 निकायों में वोटिंग प्रतिशत 76.41% और दूसरे चरण में 147 निकायों में 71.69% रहा। दोनों चरणों का कुल वोटिंग प्रतिशत 74.05% रहा।इसे भी पढ़ें: CJP Founder Abhijeet Dipke पर लगा 'लेटरहेड के दुरुपयोग' का आरोप, MP Government पर तंज के बाद FIR की मांग
309 शहरी निकायों और 10,167 वार्डों में हुए दो चरणों के चुनावों के नतीजे 38,889 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। चुनाव 16,465 मतदान केंद्रों पर कराए गए थे, जिनमें महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए सीटें आरक्षित थीं। मेयर और चेयरपर्सन के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी के जरिए तय किया गया था। पार्षद के नतीजे आने के बाद मेयर और चेयरपर्सन के लिए चुनाव प्रक्रिया होगी; इनके चुनाव 21 सितंबर को तय हैं, जबकि डिप्टी मेयर, डिप्टी चेयरपर्सन और वाइस-प्रेसिडेंट के चुनाव 22 सितंबर को होंगे।इसे भी पढ़ें: ब्रिक्स से जाते हुए UAE के Prince ने ड्राइवर के साथ क्या किया! एयरपोर्ट पर हुई चौंकाने वाली घटना
जिन 10 नगर निगमों के नतीजे घोषित किए जाएंगे, उनमें जयपुर (150 वार्ड), जोधपुर और कोटा (हर एक में 100 वार्ड), अजमेर, उदयपुर और बीकानेर (हर एक में 80 वार्ड), भीलवाड़ा (70 वार्ड) और अलवर, पाली और भरतपुर (हर एक में 65 वार्ड) शामिल हैं। 47 नगर परिषदों में चोमू, शाहपुरा, दौसा, सीकर, झुंझुनू, भिवाड़ी, कोटपूतली, ब्यावर, नागौर, टोंक, बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी शामिल हैं। इसके अलावा 253 नगर पालिकाओं में से 252 के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
राजस्थान निकाय चुनाव महत्वपूर्ण हैं क्योंकि परिणाम राज्य भर में शहरी स्थानीय निकायों की संरचना निर्धारित करेंगे और महापौरों, अध्यक्षों और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के बाद के चुनावों के लिए मंच तैयार करेंगे।
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