अबू सलेम को अभी नहीं मिलेगा खुला आसमान, सुप्रीम कोर्ट से समयपूर्व रिहाई याचिका खारिज
गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने गुरुवार को उसकी समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले को सही ठहराया जिसमें सलेम की याचिका को “समय से पहले” और “गलत आधार पर” दायर बताया गया था।
अबू सलेम ने दावा किया था कि पुर्तगाल से भारत लाए जाने के समय भारत सरकार ने दी गई आश्वासन के मुताबिक उसकी अधिकतम सजा 25 साल है। जेल में अच्छे आचरण के लिए मिली छूट और मुकदमे के दौरान बिताई अवधि जोड़ने पर वह यह अवधि मार्च 2025 तक पूरी कर चुका है इसलिए अब जेल में रखना गैरकानूनी हिरासत के बराबर है।
अबू सलेम की दलील और अदालत का जवाब
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने सलेम की तरफ से दलील दी कि नवंबर 2005 से अंडरट्रायल अवधि, सजा के बाद की अवधि और लगभग दो साल नौ महीने की छूट जोड़ने पर 25 साल पूरे हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट की गणना के अनुसार सजा अभी पूरी नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि 25 साल की अवधि एक निश्चित सजा है, जिसे साधारण जेल छूट से कम नहीं किया जा सकता। यह अवधि नवंबर 2005 से शुरू मानी जाएगी और नवंबर 2030 में पूरी होगी। अदालत ने कहा कि रिमिशन का लाभ सजा पूरी होने के करीब ही लागू हो सकता है, न कि पहले।
भारत ने पुर्तगाल सरकार को दिया था आश्वासन
अबू सलेम 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी और जेल की अवधि 25 साल से ज्यादा नहीं होगी। 1993 मुंबई बम धमाकों में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। मुंबई बम ब्लास्ट मामले के अलावा 2015 में व्यवसायी प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा मिली थी। दोनों उम्रकैद की सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया था
पहले भी रिहाई के लिए कर चुका है प्रयास
समयपूर्व रिहाई के लिए अबू सलेम की यह पहली कोशिश नहीं थी। दिसंबर 2024 में टाडा अदालत ने उसकी रिहाई की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद वह बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि अर्जित रिमिशन को 25 साल की सीमा में जोड़कर सजा को और कम नहीं किया जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उसकी तत्काल रिहाई का रास्ता बंद हो गया है।
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