ब्रिक्स देशों को आर्थिक सहयोग के साथ ही एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर देना चाहिए जोर: द. अफ्रीकी राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने रविवार को 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बताते हुए कहा कि यह मंच दुनिया की लगभग 50 प्रतिशत आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई भी देश दूसरे पर प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास नहीं करता, बल्कि सभी सदस्य मानवता के कल्याण, साझा विकास और सहयोग के उद्देश्य से साथ आते हैं।
रामाफोसा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करता है, क्योंकि यह मंच निवेश, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उसके राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स केवल आर्थिक सहयोग का संगठन नहीं, बल्कि विकास और साझेदारी का एक मजबूत वैश्विक मंच है।
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका एआई की संभावनाओं को लेकर आशावादी है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास दोनों को नई दिशा दे सकता है। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं और इसके विकास व उपयोग के दौरान आवश्यक नियंत्रण और जिम्मेदार ढांचे पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, एआई आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है, लेकिन इसके संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रामाफोसा ने कहा कि आज दुनिया भू-राजनीतिक तनावों और विभिन्न संघर्षों का सामना कर रही है। ऐसे समय में ब्रिक्स देशों द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था और बहुध्रुवीय विश्व के समर्थन की पुनर्पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों का साझा दृष्टिकोण यह है कि वैश्विक व्यवस्था में किसी एक देश या शक्ति का प्रभुत्व नहीं होना चाहिए। इसके बजाय सभी देशों की संप्रभुता, सम्मान और विकास को समान महत्व मिलना चाहिए।
रामाफोसा ने कहा, ब्रिक्स की खूबसूरती इसकी विविधता में है। इसमें विभिन्न महाद्वीपों, संस्कृतियों, भाषाओं और इतिहास वाले देश शामिल हैं, लेकिन यही विविधता इस समूह की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरती है।
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों की भागीदारी ने इसकी प्रासंगिकता और प्रभाव को और बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन से निकला घोषणा-पत्र व्यापक विषयों को समाहित करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पहलू वैश्विक शासन व्यवस्था को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता रहा।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वैश्विक शांति, आर्थिक विकास और समृद्धि तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करें और सामूहिक विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें।
इस बीच, भारत-दक्षिण अफ्रीका बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामाफोसा ने भारतीय उद्योग जगत की क्षमताओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारी समुदाय ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और कई भारतीय कंपनियां आज अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत उपस्थिति रखती हैं।
रामाफोसा ने कहा कि भारतीय उद्यमियों से बातचीत के दौरान उन्होंने ऊर्जा संक्रमण, महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचा, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं देखी हैं।
उन्होंने दोनों देशों के उद्योग जगत से केवल चर्चाओं तक सीमित न रहने और व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस और क्रियान्वित किए जा सकने वाले कदम उठाने का आह्वान किया।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बांग्लादेश में खसरे का कहर, 1.89 लाख से अधिक मामले; 1,000 मौतें
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक का सामना कर रहा है। देश में खसरे के बड़े प्रकोप ने टीकाकरण और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
द डेली स्टार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 15 मार्च 2026 से अब तक 1.89 लाख से अधिक लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं, खसरे या खसरे जैसे लक्षणों से प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कम से कम 1.49 लाख मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी, जबकि पुष्ट और संदिग्ध मामलों को मिलाकर मौतों का आंकड़ा 1,012 तक पहुंच गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पुष्ट और संदिग्ध संक्रमण तथा मौतों के आंकड़ों में अंतर है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में बच्चों की ऐसी बीमारी से मौत हो रही है, जिसे टीकाकरण के जरिए काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस प्रकोप ने बांग्लादेश के टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कभी इस कार्यक्रम को विकासशील देशों के बीच बड़ी सफलता की कहानी माना जाता था।
रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार के नेतृत्व, गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के जरिए हासिल की गई उच्च टीकाकरण कवरेज ने पहले लाखों बच्चों को रोकी जा सकने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद की थी। हालांकि, मौजूदा संकट के पीछे कई कारण सामने आए हैं।
द डेली स्टार के मुताबिक, कोविड-19 महामारी ने नियमित टीकाकरण अभियान को प्रभावित किया और कई बच्चों को दोबारा टीकाकरण व्यवस्था से नहीं जोड़ा जा सका।
रिपोर्ट में कहा गया कि दुर्गम इलाकों में रहने वाली आबादी, शहरी झुग्गियों में रहने वाले लोग, प्रवासी और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदाय विशेष रूप से कमजोर बने रहे। नियमित फॉलो-अप और उन बच्चों की पहचान करने की प्रक्रिया भी पर्याप्त नहीं रही, जिन्हें कोई भी टीका नहीं मिला था। इन सभी कमजोरियों का असर धीरे-धीरे बढ़ता गया।
स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया और करीब 1.97 करोड़ बच्चों को टीका लगाए जाने की जानकारी दी। हालांकि, बाद में इसी आयु वर्ग के बच्चों के लिए चलाए गए विटामिन-ए अभियान में करीब 2.23 करोड़ बच्चों तक पहुंचने के बाद आबादी के अनुमान की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि खसरा टीकाकरण के लिए लक्षित बच्चों की मूल संख्या का अनुमान कम लगाया गया था।
जून और जुलाई में संक्रमण के मामलों में अस्थायी गिरावट देखने को मिली, लेकिन अगस्त में खसरे के मामलों में फिर तेजी आ गई।
रिपोर्ट ने मौजूदा स्थिति को ऐसी सार्वजनिक स्वास्थ्य विफलता बताया, जिसे काफी हद तक रोका जा सकता था और जिसे व्यापक तौर पर शासन व्यवस्था की विफलता के रूप में भी देखा जा सकता है। इसमें इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने और टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की जरूरत बताई गई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
--आईएएनएस
डीएससी
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