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नागालैंड: संदिग्ध जहरीली शराब पीने से तुएनसांग जिले में 9 लोगों की मौत, जांच में जुटी पुलिस

कोहिमा, 13 सितंबर (आईएएनएस)। नागालैंड के तुएनसांग जिले में जहरीली शराब पीने से पिछले तीन दिनों में नौ लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं।

घटना के बाद राज्य पुलिस ने रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अज्ञात या गैर-अधिकृत स्रोतों से खरीदी गई शराब का सेवन न करने की अपील की है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतकों ने कथित तौर पर संदिग्ध मिलावटी शराब पी थी, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और बाद में उनकी मौत हो गई।

हालांकि, मौतों के सटीक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नागालैंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रुपिन शर्मा ने कहा कि शुरुआती जानकारी के आधार पर आशंका है कि सभी लोगों की मौत जहरीली शराब के सेवन के कारण हुई है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 10 और 11 सितंबर को तुएनसांग टाउन और चेंदांग सैडल क्षेत्र में कुल नौ मौतें दर्ज की गईं।

बयान में कहा गया कि मौजूदा जानकारी के आधार पर सभी मौतों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शराब के सेवन से संबंध दिखाई देता है और इसी दिशा में जांच की जा रही है।

बयान के अनुसार, शराब बेचने वाले व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य की फांसी लगने से मौत हुई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है और इसे संभावित आत्महत्या का मामला माना जा रहा है।

तुएनसांग पुलिस को शनिवार को अस्पताल में भर्ती लोगों की मौतों के एक जैसे पैटर्न की जानकारी मिली। शुरुआती जांच में पता चला कि अधिकांश मृतकों ने लक्षण दिखाई देने से पहले शराब का सेवन किया था।

पुलिस के अनुसार, मृतकों में धुंधला दिखाई देना, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, मतली और उल्टी जैसे लक्षण पाए गए थे।

पुलिस ने कहा कि फिलहाल जहरीली या मिलावटी शराब को मौतों का संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक जांच पूरी होने से पहले इसकी अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।

मामले की जांच के तहत वैज्ञानिक और फोरेंसिक प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी।

बयान में यह भी कहा गया कि ज्यादातर मामलों में पोस्टमार्टम नहीं हो सका, क्योंकि पुलिस को मौतों के पैटर्न की जानकारी मिलने से पहले ही शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

इसलिए फिलहाल जांच उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, शुरुआती पूछताछ और एकत्रित अन्य सूचनाओं के आधार पर की जा रही है।

तुएनसांग पुलिस मौतों की परिस्थितियों की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से खरीदी गई थी, उसकी प्रकृति क्या थी, और इस घटना के लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

जानकारी के अनुसार, मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं, जिनके परिसर से कुछ मृतकों ने कथित तौर पर शराब खरीदी थी।

मौतों के वास्तविक कारण और शराब की प्रकृति का पता लगाने के लिए विभिन्न संबंधित विभागों के सहयोग से वैज्ञानिक और चिकित्सीय जांच जारी है।

पुलिस ने तुएनसांग टाउन और चेंदांग सैडल इलाके में व्यापक तलाशी और छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान संदिग्ध गैर-अधिकृत, नकली या मिलावटी शराब की तलाश की गई। अभियान में विभिन्न स्थानों से लगभग 470 बोतल भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) और बीयर के कैन जब्त किए गए।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों को अज्ञात, गैर-अधिकृत या संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त शराब के सेवन के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप बढ़ा, संक्रमितों की संख्या 5 हजार के पार

कोलकाता, 13 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या 5,000 का आंकड़ा पार कर गई है। रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 11 सितंबर तक राज्य में डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या 5,002 है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि अगस्त में इसी तारीख तक डेंगू से प्रभावित लोगों की कुल संख्या 2,500 से कम थी।

विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रभावित लोगों की अधिकतम संख्या मुर्शिदाबाद जिले से 1,072 है, इसके बाद कोलकाता में 500 और उत्तर 24 परगना में 450 हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन तीन जिलों में डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या सबसे अधिक रही है।

अधिकारी ने कहा कि 2 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग ने पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों की निगरानी और रोकथाम पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की, जहां मुख्य फोकस घर-घर जाकर निगरानी और डेंगू के लक्षणों वाले लोगों की तत्काल रक्त जांच पर था। नए प्रभावित लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि साबित करती है कि एसओपी दिशानिर्देशों का परिश्रमपूर्वक पालन किया गया है। आंकड़े यह भी साबित करते हैं कि इस साल कम से कम डेंगू को अज्ञात बीमारी के रूप में दिखाकर प्रभावित आंकड़ों को कम बताने की घटनाएं नहीं हुईं, जैसा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर हुआ था।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को डेंगू के लक्षण वाले लोगों की जांच कराने के लिए 15 अक्टूबर तक व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया है। जिला अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे विभाग को नियमित रूप से रिपोर्ट देते रहें कि प्रतिदिन कितने लोग बुखार से पीड़ित पाए गए हैं और कितने लोगों का डेंगू परीक्षण किया गया है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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