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टेस्ट क्रिकेट के नए 'कैचिंग किंग' बने जो रूट, स्टीव स्मिथ का ध्वस्त किया वर्ल्ड रिकॉर्ड, देखें टॉप-5 की लिस्ट

Joe Root: इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट जब भी मैदान पर उतरते हैं, तो कोई न कोई रिकॉर्ड अपने नाम कर लेते हैं. जो रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक बार फिर इतिहास रच दिया है. पाकिस्तान के खिलाफ बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में जो रूट ने एक बड़ा कीर्तिमान बनाते हुए ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज स्टीव स्मिथ का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया है. जो रूट अब टेस्ट क्रिकेट में (बतौर फील्डर) सबसे ज्यादा कैच लेने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. रूट के नाम अब 220 कैच हो गए हैं. चलिए जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में बतौर फील्डर सबसे ज्यादा कैच लेने वाले टॉप-5 खिलाड़ी कौन हैं. 

जो रूट ने स्टीव स्मिथ का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास

जो रूट अब बल्ले से रनों की बरसात करने और सचिन तेंदुलकर के महा-रिकॉर्ड्स की ओर बढ़ने के साथ-साथ, टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर अपनी जादुई फील्डिंग के दम पर भी दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ी बन गए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में 220वां कैच लेते ही जो रूट ने स्टीव स्मिथ को पीछे छोड़ दिया और टेस्ट क्रिकेट में (बतौर फील्डर) सबसे ज्यादा कैच लेने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. 

ओली रोबिंसन की गेंद और जो रूट का वो ऐतिहासिक 220वां कैच

जो रूट का यह ऐतिहासिक कीर्तिमान पाकिस्तान की दूसरी पारी के पहले ही ओवर में देखने को मिला. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ओली रोबिंसन ने पांचवें स्टंप की लाइन पर एक बेहतरीन गेंद डाली, जिस पर पाकिस्तानी सलामी बल्लेबाज अब्दुल्लाह शफीक पूरी तरह चकमा खा गए. गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर पहली स्लिप की तरफ काफी नीचे गई. वहां हमेशा की तरह मुस्तैद खड़े जो रूट ने कोई गलती नहीं की और चीते जैसी फुर्ती से नीचे झुकते हुए इस बेहद कठिन कैच को बड़ी ही आसानी से लपक लिया. 

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच लेने वाले खिलाड़ी बने जो रूट

इस 220वें कैच के साथ ही जो रूट ने ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ (219 कैच) को पीछे छोड़ दिया है. अब वे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में बतौर गैर-विकेटकीपर सबसे ज्यादा कैच लेने वाले दुनिया के नंबर-1 फील्डर बन गए हैं. ICC के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, टेस्ट फॉर्मेट में अब तक सिर्फ 5 खिलाड़ियों ने ही बतौर फील्डर 200 या उससे ज्यादा कैच लेने का अनोखा कारनामा किया है.

टेस्ट क्रिकेट में बतौर फील्डर सबसे ज्यादा कैच लेने वाले टॉप-5 खिलाड़ी

इस एलीट क्लब में इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट अब 220 कैचों के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड लिस्ट में पहले स्थान पर काबिज हो गए हैं. उनके ठीक पीछे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट स्टीव स्मिथ हैं, जो 219 कैच लपककर दूसरे पायदान पर मौजूद हैं. तीसरे स्थान पर भारत के 'द वॉल' कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ का नाम आता है, जिन्होंने अपने टेस्ट करियर में कुल 210 कैच पकड़े थे. वहीं, श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने 205 कैचों के साथ चौथे स्थान पर मौजूद हैं. इस ऐतिहासिक में पांचवे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के महानतम ऑलराउंडर जैक्स कैलिस हैं, जिन्होंने अपनी बेहतरीन फील्डिंग के दम पर ठीक 200 टेस्ट कैच पूरे किए थे.

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Uttarakhand Elections 2027: पिथौरागढ़ की सभी 4 विधानसभा सीटों का पूरा सियासी गणित

Uttarakhand Assembly Elections 2027: उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सभी राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं. ऐसे में हम आज देवभूमि उत्तराखंड के पूर्वी छोर पर भारत-चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा पिथौरागढ़ जिले की सभी चार विधानसभा सीटों के बारे में बताने जा रहे हैं. पितौरागढ़ सिर्फ 'छोटा कश्मीर' कहे जाने वाले शोभावान सोर घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य, आदिकैलास और ओम पर्वत की आध्यात्मिक ऊर्जा, और मिलम और नामिक ग्लेशियरों की साहसिक पगडंडियों तक सीमित नहीं है.

बल्कि यह जनपद कुमाऊं मंडल और पूरे राज्य की भू-सामरिक के साथ कूटनीतिक राजनीति का सबसे संवेदनशील और दुर्गम शक्ति केंद्र भी माना जाता है. जहां नैनीताल पर्यटन का चेहरा और अल्मोड़ा सांस्कृतिक मिजाज का प्रतीक है, तो वहीं पिथौरागढ़ सामरिक संवेदनशीलता, सीमावर्ती व्यापार के इतिहास के रूप में जाना जाता है. जिले की चारों विधानसभा सीट- पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट और गंगोलीहाट की चुनावी रणभूमि के रूप में प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं.

बता दें कि पिथौरागढ़ केवल सामरिक और प्राकृतिक सौंदर्य का गढ़ नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास, पलायन की मार झेलते पहाड़ के गांव और कस्तूरी मृग व जड़ी-बूटी आधारित आर्थिकी इसकी धुरी हैं. चंपावत और अल्मोड़ा से घिरे इस सीमांत जिले की सोर घाटी के शहरी विस्तार से लेकर धारचूला और व्यास घाटी के दूरस्थ जनजातीय गांवों (रंग समुदाय) तक, और बेड़ीनाग की चाय-बागान पट्टी से लेकर गंगोलीहाट के पाताल भुवनेश्वर व हाटकालिका धाम तक, पिथौरागढ़ का हर मतदाता और सीमावर्ती सामरिक समीकरण देहरादून और दिल्ली के गलियारों में गूंजता है.

भू-सामरिक और राजनीतिक ताना-बाना

पिथौरागढ़ उत्तराखंड का सीमांत और संवेदनशीलता जिला है. जो चीन (तिब्बत) और नेपाल से सटी सीमा के कारण सामरिक अवसंरचना- सड़कें, पुल, आईटीबीपी/सेना की चौकियां, यहां का मुख्य मुद्दा और राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र है. पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट और गंगोलीहाट चारों सीटों का अपना अलग भौगोलिक और जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण है. ये जिला सीमा व्यापार की संभावनाएं, होमस्टे व इको-टूरिज्म, आदि कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग का विकास और हॉर्टिकल्चर का केंद्र है.

चुनावी मिजाज की बात करें तो यहां के मतदाता राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती विकास, सड़क-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय नेतृत्व के बीच संतुलन बनाते हैं. सोर घाटी के खेतों से लेकर उच्च हिमालयी दर्रों तक, पिथौरागढ़ की राजनीतिक सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा के प्रहरी का जनादेश है, जो हर बार यह तय करता है कि पर्वत की यह चेतना किस करवट बैठती है.

कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात पिथौरागढ़ जिले की...

पिथौरागढ़ न केवल भारत-तिब्बत और नेपाल की सीमाओं से सटा सामरिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि धारचूला जैसी अंतरराष्ट्रीय सीमांत चौकियां और सोर घाटी का कृषि-शहरी विस्तार इसकी पहचान को मजबूती प्रदान करते हैं. कैलास-मानसरोवर व आदि कैलास मार्ग की आध्यात्मिक वादियों से लेकर व्यास व डारमा घाटी के दूरस्थ जनजातीय गांवों तक, और पिथौरागढ़ के मैदानी-पर्वतीय बाजारों से लेकर गंगोलीहाट व डीडीहाट के दुर्गम पहाड़ों तक, पिथौरागढ़ की जनता का हर राजनीतिक फैसला देहरादून की विधानसभा की राजनीति को गहराई से प्रभावित करता है.

ऐतिहासिक रूप से पिथौरागढ़ की राजनीति कुमाऊं मंडल और राज्य के बड़े राजनीतिक क्षत्रपों (जैसे प्रकाश पंत और कांग्रेस-भाजपा के स्थानीय चेहरे) की कर्मभूमि रही है. राज्य गठन के बाद से ही यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच सीधी और तीखी टक्कर देखने को मिली है. सीमावर्ती जनसांख्यिकी और पूर्व सैनिकों/सैन्य परिवारों के बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां स्थानीय अस्मिता, सीमा सुरक्षा व विकास, और दूरदराज के सीमांत गांवों का विकास हमेशा से चुनावी नतीजों की दिशा तय करता आया है.

यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन, जंगली जानवरों/भालू-बंदरों से खेती को नुकसान, स्वास्थ्य सुविधाओं व अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, स्थानीय स्तर पर रोजगार व होमस्टे-पर्यटन के अवसर, और सामरिक सड़कों के विस्तार के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के इर्द-गिर्द घूमते हैं.

 2011 की जनगणना के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी

कुल

पुरुष

महिला

जनसंख्या

483,439

239,306

244,133

साक्षरता दर

82.25%

92.75%

72.29%

यह आंकड़े 2011 की जनगणना के आधार पर हैं.

पिथौरागढ़ जिले की कुल धार्मिक आबादी

धर्म प्रतिशत जनसंख्या
हिन्दू 98.28% 4,75,105
मुस्लिम 1.24% 6,015
ईसाई 0.29% 1,401
सिख 0.05% 260
बौद्ध 0.04% 185
जैन 0.00% 13
अन्य धर्म 0.01% 30

2022 विधानसभा चुनाव में कैसा रहा पिथौरागढ़ की सभी सीटों का चुनाव परिणाम

 

विधानसभा सीट उम्मीदवार का नाम राजनीतिक पार्टी कुल प्राप्त वोट
धारचूला हरीश सिंह धामी INC 27,007
धन सिंह धामी BJP 25,889
नारायण राम AAP 711
डीडीहाट विशन सिंह चुफाल BJP 20,594
किशन भंडारी IND 17,368
प्रदीप सिंह पाल INC 10,695
पिथौरागढ़ मयूख महर INC 33,269
चन्द्रा पंत BJP 27,215
नितिन मारकाना IND 6,585
गंगोलीहाट SC फ़कीर राम BJP 32,296
खजान चंद्र INC 22,243
बबीता चंद्र AAP 1,023

अब जानते हैं सभी सीटों के बारे में विस्तार से...

  1. धारचूला (सीट संख्या 42): भारत-नेपाल और तिब्बत सीमा से सटा यह उत्तराखंड का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. 2022 के चुनाव में कांग्रेस के हरीश सिंह धामी ने कड़े मुकाबले में बीजेपी प्रत्याशी को 1,118 वोटों से हराकर लगातार अपनी जीत बरकरार रखी.

2. डीडीहाट (सीट संख्या 43): यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता विशन सिंह चुफाल का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहाँ से वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. 2022 के चुनाव में यहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी किशन भंडारी के बीच रहा, जिसमें विशन सिंह चुफाल विजयी रहे.

3. पिथौरागढ़ (सीट संख्या 44): यह जिले का मुख्यालय और राजनीतिक रूप से सबसे प्रमुख सामान्य विधानसभा क्षेत्र है. 2022 में कांग्रेस प्रत्याशी मयूख महर ने भाजपा की तत्कालीन विधायक चन्द्रा पंत को 6,054 मतों के अंतर से हराकर इस सीट पर वापसी की. 

4. गंगोलीहाट (सीट संख्या 45 - SC): यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है, जो प्रसिद्ध महाकाली मंदिर और पाताल भुवनेश्वर गुफा के लिए भी जानी जाती है. 2022 के चुनाव में भाजपा के फ़कीर राम ताम्टा ने कांग्रेस के खजान चंद्र को 10,053 वोटों के बड़े अंतर से मात दी.

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