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UP Election 2027: उन्नाव की 6 सीटों पर BJP का किला रहेगा बरकरार?

UP Assembly Election 2027: लखनऊ और कानपुर के बीच बसा उन्नाव जिला बीते कुछ सालों में कई बड़ी वजहों से राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है. अब जैसे ही यूपी विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आ रहे हैं राजनीतिक हलकों में फिर इसकी चर्चा है. बता दें जिले में कभी बांगरमऊ के तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के दुष्कर्म मामले ने इसे चर्चा में ला दिया तो कभी यहां की सियासी उठापटक ने इसे केंद्र के नजरों में रखा. अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी छह सीटों का पूरा गणित.

83 प्रतिशत आबादी गांवों में और सिर्फ 17 प्रतिशत आबादी शहर में 

जनगणना 2011 के मुताबिक उन्नाव जिले की कुल आबादी करीब 31 लाख 10 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 16 लाख 36 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 14 लाख 74 हजार है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 901 महिलाएं हैं, जबकि साक्षरता दर करीब 68 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 75 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 57 प्रतिशत रही.धार्मिक आबादी के लिहाज से यह जिला पूरी तरह हिंदू बहुल है. यहां हिंदू आबादी करीब 88 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत है. जिले की करीब 83 प्रतिशत आबादी गांवों में और सिर्फ 17 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है.

Unnao में कुल 6 विधानसभा सीटें, जिसमें से ​सिर्फ 1 आरक्षित

उन्नाव जिले में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं, बांगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव (सदर), भगवंतनगर और पुरवा. इनमें से सफीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जबकि बाकी पांचों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्नाव जिले की सभी छह सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की जबकि विपक्ष का यहां खाता तक नहीं खुल सका था. आइए आपको इन पांचों विधानसभाओं के बारे में बताते हैं.

उन्नाव (सदर) विधानसभा सीट पर भाजपा के पंकज गुप्ता ने सपा के अभिनव कुमार को करीब 31 हजार वोटों से हराया था. बता दें इस सीट पर कांग्रेस ने उन्नाव की चर्चित दुष्कर्म पीड़िता की मां आशा सिंह को मैदान में उतारा था, मगर वे जीत हासिल नहीं कर सकीं थीं.

बांगरमऊ सीट पर भाजपा के श्रीकांत कटियार ने सपा के मुन्ना अल्वी को करीब 16 हजार वोटों से पराजित किया था. बता दें ये वही सीट है जहां से पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए गए और उनकी सदस्यता रद्द हुई थी. जिसके बाद हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने यह सीट अपने पास बरकरार रखी थी.

सफीपुर (सुरक्षित) सीट की बात करें तो यहां भाजपा के बंबा लाल दिवाकर ने सपा के सुधीर रावत को करीब 34 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था.

मोहान सीट पर भाजपा के ब्रजेश कुमार ने सपा की डॉ. अंचल वर्मा को भारी अंतर से हराया था. गौरतलब है कि आजादी के बाद से अब तक इस सीट पर सपा को कभी जीत नसीब नहीं हुई है.

भगवंतनगर सीट प भाजपा के आशुतोष शुक्ला ने सपा के अंकित परिहार को करीब 43 हजार वोटों के सबसे बड़े अंतर से हराया.

पुरवा सीट पर भाजपा के अनिल सिंह ने सपा के उदयराज को करीब 31 हजार वोटों से हराया. बता दें यहां अनिल सिंह ने 2017 में बसपा के टिकट पर यह सीट जीती थी. इसके बाद भाजपा में शामिल होकर 2022 में दोबारा जीत दर्ज की थी.

कभी था कांग्रेस-सपा का दबदबा, 2017 से बना भाजपा ने लहराया परचम 

उन्नाव की राजनीति का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. दरअसल, यहां पुरवा सीट पर तो शुरुआती कई दशक तो कांग्रेस का दबदबा रहा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहां रामधीन सिंह और गया सिंह जैसे नेता कई बार जीते थे. इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने यहां से कई बार अलग-अलग दलों के टिकट पर जीत दर्ज की. फिर 1993 से 2012 तक लगातार पांच बार सपा के उदयराज यादव यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. 2017 में बसपा के अनिल सिंह ने सपा का किला ढहाया और फिर बाद में वे खुद भाजपा में शामिल हो गए.

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं

मोहान सीट का इतिहास तो और भी चौंकाने वाला है. दरअसल, यहां आजादी के बाद से अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में सपा को यहां कभी जीत नहीं मिली है. बता दें यहां पूरे जिले में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं. जबकि सिर्फ बांगरमऊ सीट बसपा के कुलदीप सेंगर के खाते में गई थी. जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे. 

Unnao Election 2027 में क्या बन रहे ताजा समीकरण 

2027 के चुनाव से पहले जिले की सबसे ज्यादा चर्चा पुरवा सीट को लेकर हो रही है जहां मौजूदा भाजपा विधायक अनिल सिंह के सामने सपा के पुराने चेहरे उदयराज यादव की चुनौती एक बार फिर चर्चा में है. यहां लोनी नदी में प्रदूषण, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे हावी रह सकते हैं. इसके अलावा पूरे जिले में भाजपा फिलहाल मजबूत स्थिति में मानी जा रही है क्योंकि 2017 और 2022 दोनों चुनावों में पार्टी का दबदबा बरकरार रहा है. दूसरी ओर सपा जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने और पुराने मजबूत चेहरों को फिर से मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि वह अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सके.

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Unnao की किस सीट पर किस जाति का कितना असर? 

- उन्नाव (सदर) सीट पर सामान्य वर्ग और वैश्य समाज का प्रभाव अधिक दहै. इसके अलावा यहां दलित व पिछड़ा वर्ग भी अहम भूमिका में है.

- बांगरमऊ सीट पर पर ठाकुर और पिछड़ी जातियों का दबदबा है. यहां मुस्लिम मतदाता भी कुछ हद तक निर्णायक वोट बैंक रखते हैं.

- सफीपुर (सुरक्षित) पर तो दलित मतदाता सबसे बड़ा समूह है. दूसरे नंबर पर ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग भी यहां अपना प्रभाव रखते हैं.

- मोहान की बात करें तो यहां ठाकुर और ब्राह्मण मतदाताओं के वोट अधिक हैं. 

- भगवंतनगर सीट पर पिछड़ा वर्ग और सामान्य श्रेणी के मतदाताओं के बीच मुकाबला रहता है. 

- पुरवा सीट पर किसी एक जाति का स्पष्ट वर्चस्व नहीं है. यहां ब्राह्मण मतदाता करीब 50 हजार बताए जाते हैं. इसके अलावा ठाकुर, पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला समीकरण है.

FAQ

सवाल: उन्नाव जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
जवाब: उन्नाव जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं, बांगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव (सदर), भगवंतनगर और पुरवा.

सवाल: इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
जवाब: सफीपुर सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी पांचों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.

सवाल: 2022 चुनाव में उन्नाव जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
जवाब: भाजपा ने सभी छह सीटों पर जीत दर्ज की, विपक्ष का जिले में खाता तक नहीं खुल सका.

सवाल: उन्नाव जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
जवाब: जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 88 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत है.

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सवाल: जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
जवाब: शुरुआती दशकों में कांग्रेस और फिर सपा का प्रभाव कुछ सीटों पर रहा, मगर 2017 के बाद से पूरा जिला भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है.

सवाल: 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
जवाब: भाजपा जिले में मजबूत स्थिति में है, जबकि सपा जमीनी संगठन मजबूत कर वापसी की तैयारी में जुटी है.

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21 पासबुक, 8 ATM और 20 चेकबुक… इंदौर में साइबर ठगी के शातिर आरोपी का खुलासा

इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ललित उर्फ ऋषि सुतार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी देशभर में साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करता था।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 21 बैंक पासबुक, 8 एटीएम कार्ड, 20 चेकबुक, 7 क्यूआर कोड और एक लैपटॉप बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर धोखाधड़ी की रकम से जुड़े मामलों में हुआ है।

इंदौर में ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन

इंदौर क्राइम ब्रांच साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों और म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने ललित उर्फ ऋषि सुतार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर अपराधियों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करता था और इन खातों के जरिए ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था।

जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों से उनके बैंक अकाउंट कुछ प्रतिशत कमीशन के बदले लेता था। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिली रकम को ट्रांसफर और इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। ऐसे बैंक खाते म्यूल अकाउंट कहलाते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को छिपाने और आगे भेजने में किया जाता है।

50 से ज्यादा शिकायतों से जुड़े मिले बैंक खाते

क्राइम ब्रांच की जांच में आरोपी के कब्जे से मिले बैंक खातों का कनेक्शन देशभर की 50 से ज्यादा साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इन खातों के जरिए 3 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की रकम से जुड़े लेनदेन किए गए हैं।

आरोपी के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस अब हर खाते की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता कर रही है कि कौन सा बैंक खाता किस व्यक्ति के नाम पर है और उसमें साइबर ठगी की कितनी रकम आई और आगे कहां भेजी गई। इस जांच से साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

21 पासबुक, 8 एटीएम और 20 चेकबुक बरामद

पुलिस ने आरोपी के पास से 21 बैंक पासबुक, 8 एटीएम कार्ड और 20 चेकबुक बरामद की हैं। इसके अलावा 7 क्यूआर कोड और एक लैपटॉप भी जब्त किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिलने के बाद पुलिस इन सभी की जांच कर रही है।

लैपटॉप और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड से पुलिस को साइबर अपराधियों के साथ आरोपी के संपर्क और पैसों के लेनदेन से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है। बैंक खातों की जांच के जरिए यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन राज्यों और किन लोगों के खातों में भेजी गई।

कई राज्यों में फैला साइबर ठगी का नेटवर्क

पुलिस जांच में आरोपी के कनेक्शन महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, अंडमान-निकोबार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और बिहार समेत कई राज्यों से सामने आए हैं। इससे साफ है कि मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों तक जुड़े हुए हैं।

 

शकील अंसारी, इंदौर

 

 

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