इंडोनेशिया : यात्री पोत पलटा, करीब 140 लोग लापता
इंडोनेशिया : यात्री पोत पलटा, करीब 140 लोग लापतामिजोरम: 50 किमी की रेल लाइन ने बदली तस्वीर, एक साल में 15 लाख यात्रियों ने किया सफर; पर्यटन और कारोबार को भी मिली रफ्तार
मिजोरम। करीब 50 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन ने महज एक साल में मिजोरम की यात्रा, पर्यटन और माल ढुलाई की तस्वीर बदल दी है। 13 सितंबर 2025 को शुरू हुई इस रेल लाइन ने पहाड़ी राज्य को देश के बड़े शहरों से सीधे जोड़ने के साथ 15 लाख से ज्यादा यात्रियों को रेल कनेक्टिविटी दी है। गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली तक सीधी ट्रेन सेवा के अलावा सीमेंट, अनाज, खाद, ऑटोमोबाइल और निर्माण सामग्री की रेल से आपूर्ति ने मिजोरम की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार दी है।
51.38 किमी की लाइन, 45 सुरंग और 153 पुलों का इंजीनियरिंग कमाल
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन की कुल लंबाई 51.38 किमी है। यह रेल कॉरिडोर मिजोरम की राजधानी आइजोल के करीब सैरांग तक पहुंचता है। पहाड़ियों, गहरी घाटियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बनी यह लाइन इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस रेल लाइन पर 153 पुल बनाए गए हैं, जिनमें 55 बड़े पुल, 88 छोटे पुल और 10 रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं। छह पुल 70 मीटर से ज्यादा ऊंचे हैं। इनमें सबसे ऊंचा पुल करीब 114 मीटर का है, जो दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचा है।
रेल लाइन करीब 16 किलोमीटर लंबी 45 सुरंगों से भी गुजरती है। इस कॉरिडोर पर होर्टोकी, कानपुई, मुआलखांग और सैरांग सहित चार नए स्टेशन बनाए गए हैं।
15 लाख से ज्यादा यात्रियों ने दिखाई रेल पर भरोसे की तस्वीर
रेल कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद मिजोरम से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए यात्री सेवाओं का विस्तार हुआ है। सैरांग को गुवाहाटी, कोलकाता और आनंद विहार से जोड़ने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन बन गई हैं।
इसके अलावा जनवरी 2026 में शुरू हुई सैरांग-सिलचर यात्री ट्रेन ने मिजोरम को असम की बराक घाटी से नियमित रेल सेवा के जरिए जोड़ दिया।
पिछले एक साल में इन ट्रेन सेवाओं ने 1,100 से ज्यादा ट्रिप पूरे किए हैं और इनमें 15 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया। कई ट्रेनों में मांग इतनी अधिक रही कि औसत ऑक्यूपेंसी 100 प्रतिशत से ऊपर रही।
सैरांग-कोलकाता साप्ताहिक ट्रेन की औसत ऑक्यूपेंसी 140 प्रतिशत से ज्यादा, सैरांग-गुवाहाटी सेवा की 110 प्रतिशत से ज्यादा और सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस की औसत ऑक्यूपेंसी 145 प्रतिशत से अधिक रही। इन सेवाओं से रेलवे को करीब 54 करोड़ रुपए की टिकट बिक्री भी हुई।
सैरांग स्टेशन पर रोज औसतन 3300 यात्रियों की आवाजाही
रेल कनेक्टिविटी का असर सैरांग स्टेशन पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले एक साल में स्टेशन से 5.54 लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। यहां रोजाना औसतन करीब 3,300 यात्री पहुंच रहे हैं।
यानी सैरांग स्टेशन अब केवल ट्रेन पकड़ने या उतरने की जगह नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्र के लिए एक नया मोबिलिटी हब बनता जा रहा है।
पहली मालगाड़ी में पहुंचा 26 हजार बैग सीमेंट
यात्री ट्रेनों के साथ माल ढुलाई में भी बैराबी-सैरांग रेल लाइन ने बड़ा बदलाव किया है। लाइन शुरू होने के अगले ही दिन 14 सितंबर 2025 को पहली मालगाड़ी सैरांग पहुंची। इसमें गुवाहाटी के पास टेटेलिया की स्टार सीमेंट साइडिंग से 26 हजार से ज्यादा सीमेंट बैग भेजे गए थे।
रेल के जरिए सीमेंट पहुंचने से मिजोरम में लॉजिस्टिक्स लागत और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। इसके बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिला।
दिसंबर 2025 में गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारों की पहली खेप रेल के जरिए सैरांग पहुंची। इससे मिजोरम में ऑटोमोबाइल की सप्लाई के लिए नया और अधिक क्षमता वाला विकल्प तैयार हुआ।
एक साल में 2500 से ज्यादा माल वैगन पहुंचे
पिछले एक साल में सैरांग में 2,500 से ज्यादा रेलवे माल वैगन डिलीवर किए गए। इनमें करीब 70 प्रतिशत माल सीमेंट, पत्थर और रेत जैसी निर्माण सामग्री का रहा।
इसके अलावा चावल, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की भी रेल से आपूर्ति हुई। इससे निर्माण कार्यों, खेती और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए जरूरी सामान को राज्य तक पहुंचाने में मदद मिली।
पर्यटन में 86% से ज्यादा की बढ़ोतरी
रेलवे कनेक्टिविटी का सीधा असर मिजोरम के पर्यटन पर भी पड़ा है। दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से ट्रेन कनेक्शन मिलने के बाद पर्यटकों के लिए राज्य तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान और किफायती हुआ है।
रेलवे शुरू होने के बाद मिजोरम में पर्यटन में 86 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज होने का दावा किया गया है। ज्यादा पर्यटकों की आवाजाही से होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, गाइड और स्थानीय बाजारों को भी फायदा मिल रहा है।
फूल और स्थानीय उत्पाद अब पहुंच रहे देश के बड़े बाजारों तक
रेलवे ने मिजोरम के स्थानीय कारोबार को भी नया प्लेटफॉर्म दिया है। 19 सितंबर 2025 को सैरांग से पहला पार्सल कंसाइनमेंट बुक हुआ था। इसमें एंथुरियम के फूलों को सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस की पार्सल वैन के जरिए दिल्ली भेजा गया।
हैंडलूम, बांस, बेंत और अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए भी रेलवे राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का नया रास्ता उपलब्ध करा रहा है।
छात्रों और कारोबारियों के लिए भी खुला नया रास्ता
रेल कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों और व्यापारियों तक सीमित नहीं है। मिजोरम के छात्रों के लिए दिल्ली, गुवाहाटी, कोलकाता और अन्य शहरों के विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक कार्यक्रमों तक पहुंच आसान हुई है।
व्यापारियों के लिए बड़े शहरों से माल मंगाने और स्थानीय उत्पाद बाहर भेजने का विकल्प बढ़ा है। इस तरह बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन ने मिजोरम को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ यात्रियों, कारोबार और पर्यटन के लिए नए अवसर भी खोले हैं।
एक साल में इस रेल लाइन ने यह साबित किया है कि पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार, पर्यटन और बाजार तक पहुंच का मजबूत माध्यम भी बन सकती है।
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