Ganesh Chaturthi 2026: गणेश जी को 21 मोदक क्यों चढ़ाएं जाते हैं? जानें इसकी पौराणिक मान्यता
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. दस दिन के इस महा-उत्सव में बप्पा की स्थापना घर, पंडालों और मंदिरों में की जाती है. गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश जी के जन्म का जश्न होता है. महाराष्ट्र में इस त्योहार को बडे़ ही धूमधाम से मनाया जाता है. हिंदू धर्म का यह एक महापर्व माना जाता है. भगवान गणेश इस दौरान बालक रूप में आते हैं, लोग उन्हें बच्चे की तरह रखते हैं. उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाया जाता है. उनका ख्याल रखा जाता है. भगवान गणेश का मुख्य प्रसाद मोदक है. मोदक उन्हें बेहद पसंद हैं. कहा जाता है कि गणेश चतुर्थी पर उन्हें 21 मोदकों का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. मगर क्यों? आइए जानते हैं इस पौराणिक कथा के बारे में.
भगवान गणेश को 21 मोदक क्यों चढ़ाते हैं?
लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश जी को 21 मोदक चढ़ाएं जाते हैं. कथा के मुताबिक, एक बार माता अनुसूया (ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया) ने भगवान शिव और उनके परिवार को भोजन पर आमंत्रित किया था. उन्होंने भगवान गणेश को लगातार भोजन परोसा मगर उनकी भूख शांत नहीं हो रही थी. अंत में जब पूरा भोजन खत्म हो गया तो उन्होंने उन्हें मोदक भेंट किए. भगवान गणेश ने मोदक खाते ही डकारे लेना शुरू कर दिया. कहा जाता है कि उस समय भगवान शिव ने भी 21 बार डकार ली थी.
बस तब ही से ये मान्यता है कि भगवान गणेश को 21 मोदक अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और सुख- समृद्धि एवं आशीर्वाद प्राप्त होता है.
क्षुधा तृप्ति के लिए परोसे गए थे 21 मोदक
गणेश जी का पेट भरने के लिए भोजन समाप्त होने के बाद उन्हें 21 मोदक चढ़ाएं जाते हैं. मोदक खाते ही गणेश जी संतुष्ट हो गए और उन्हें डकार आ गई. इसलिए, उनकी संतुष्टि और क्षुधा तृप्ति के लिए 21 मोदकों का भोग लगाया जाता है.
21 संख्या का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक परंपराओं में 21 संख्या को विशेष शुभ माना जाता है. गणेश जी की पूजा में उन्हें 21 दूर्वा, 21 लड्डू या मोदक चढ़ाने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है. मान्यता है कि 21 प्रकार के अर्पण से भगवान गणेश की पूजा पूर्ण होती है. 21 मोदक चढ़ाने का अर्थ होता है कि भक्त अपना पूरा अस्तित्व, मन और इंद्रियों को भी भगवान के चरणों में समर्पित कर रहा है. 21 की संख्या का हिंदू अनुष्ठानों में कई प्रकार से बताया गया है जैसे कि-
पांच इंद्रियां- ये उन तरीकों को दर्शाती हैं जिनसे हम दुनिया को समझते हैं.
पांच कर्म अंग- हमारे कार्यों और कर्मों का प्रतीक हैं.
पांच महत्वपूर्ण ऊर्जाएं- जीवन को बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं.
पांच तत्व- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश.
मन या आत्मा- हमारे विचारों, जागरूकता और आंतरिक अस्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है.
गणेश चतुर्थी पर कितने मोदक चढ़ाएं?
अगर आप गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना चाहते हैं तो 21 मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है. हालांकि, श्रद्धा में संख्या से ज्यादा महत्व भावना का माना जाता है. घर की परंपरा के अनुसार कम या अधिक मोदक भी चढ़ाए जा सकते हैं.
गणपति जी को क्यों पसंद है मोदक?
कहा जाता है कि माता अनुसूया ने ही उन्हें सबसे पहले मोदक भेंट की थी. जैसे ही वे एक के बाद एक व्यंजन को समाप्त कर रहे थे, तो सभी चिंतित होने लगे. नन्हें बाल गणेश भूखे ही रह गए थे. अंत मे माता अनुसूया ने मोदक को मिठाई के रूप में उन्हें दिया. गणेश जी ने पकौड़े और मोदक खाकर भोजन समाप्त किया. जब उन्होंने डकार ली तो शिव जी ने भी 21 बार डकार ली. जब पार्वती माता ने यह सब सुना, तो उन्हें पता चला कि गणेश जी को अर्पित की गई मिठाई मोदक थी. इसके बाद पार्वती माता भी उन्हें मोदक खिलाने लगी थी. गणेश चतुर्थी उत्सव की यह मिठाई सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. लोग इन्हें स्वयं घर पर बनाकर भी भोग लगाते हैं.
मोदक कई प्रकार के बनाए जाते हैं. महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के दौरान उकड़ीचे मोदक काफी लोकप्रिय होते हैं. इन्हें चावल के आटे से बनाया जाता है और इनके अंदर नारियल तथा गुड़ की भरावन होती है. इसके अलावा, फ्राई मोदक, सूजी के मोदक, बेसन के मोदक और ड्राई फ्रूट्स वाले मोदक भी बनाए जाते हैं. भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार, भगवान गणेश को किसी भी प्रकार के मोदक का भोग लगा सकते हैं. धार्मिक परंपरा में भोग की सामग्री से अधिक भक्त की श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है.
गणेश जी को मोदक चढ़ाने से क्या लाभ होगा?
भगवान गणेश जी को मोदज चढ़ाने से वे अतिप्रसन्न हो जाते हैं. भक्त को बुद्धि, बल, सुख-समृद्धि मिलने का आशीर्वाद मिलता है. ये भगवान गणेश की सबसे प्रिय मिठाई होती है. इसलिए, इसे चढ़ाने से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. एक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि उसने भगवान गणेश जी को पूरे 1 हजार मोदक का भोग लगाया था. इससे उन्हें मनचाहा फल प्राप्त हुआ था. मोदक का बाहरी आवरण और अंदर की मिठास ज्ञान और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक माना जाता है. विघ्नहर्ता गणेश को मोदक अर्पित करने से सभी प्रकारों के संकट दूर हो जाते हैं.
घर पर कैसे बनाएं मोदक?
घर पर उकड़ीचे मोदक बनाने के लिए आपको चावल का आटा, गुड़, नारियल का बुरादा, इलायची पाउडर और केसर चाहिए होगा. सबसे पहले आपको एक बर्तन में पानी गरम करना है और उसमे चावल का आटा मिलाना है. मिश्रण थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसे आटे की तरह गूंथ लें और ढक कर रख दें. अब भरावन बनाने के लिए एक कढ़ाही में देसी घी गर्म करें, इसके बाद गुड़ को पिघला लें और नारियल का बुरादा इसमें डालकर मिक्स करें. अब इस मिश्रण में इलायची पाउडर डालकर पकाएं. मिश्रण को ठंडा कर लें. अब मोदक बनाने के लिए मोदक का सांचा ले लें. आटे की लोइयां बनाकर उसे छोटा-छोटा बेल लें. इसमें नारियल की फिलिंग भरें और सांचे को बंद कर दें. ऐसे आपको मोदक तैयार हो जाएंगे. अब एक स्टीमर में पानी गर्म कर ले. स्टीमिंग प्लेट्स पर घी लगाएं और फिर उस पर मोदक रख दें. सभी मोदक के ऊपर 2-3 केसर की पत्तियां रखें. अब मोदक को 10 से 15 मिनट स्टीम दें. आपके मोदक बनकर तैया हो जाएंगे. इन्हें निकाल लें और पहले भगवान को भोग लगाएं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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