'विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन, भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व', BRICS लीडर्स से बोले PM मोदी
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आज आखिरी दिन है. सम्मेलन के अंतिम दिन पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल की पहल की गई है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना की गई है.
वैश्विक लीडर्स को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज ये सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है. यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास रिजिलियंस (लचीलापन), इनोवेशन (नवाचार), कोओपरेशन (सहयोग), सस्टेनेबिलिटी, इन चार स्तंभों पर केंद्रित किए हैं. पीएम मोदी ने कहा, मुझे खुशी है कि आप सबके सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा विजिन को भी इन सहयोग में बदल सके.
पीएम मोदी ने कहा कि आज विश्व में तनावों की संख्या लगाता बढ़ रही है और सामान्य मानवीय के जीवन पर उसका बहुत ही नकारात्मक और व्यापक प्रभाव हो रहा है, महामारियां, क्लाइमेट डिजास्टर और सप्लाई चैन डिस्ट्रप्शन ने दिखाया है कि आज के इंटर कनेक्टर वर्ल्ड में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता. इसलिए हमले ब्रिक्स समूह में लचीलापन बढ़ाने पर विशेष बल दिया है. पीएम मोदी ने कहा कि चुनौती को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है. इसी सोच के साथ इन्फ्रेक्सियस डिसीज के प्रिवेंशन और रेस्पॉस के लिए ब्रिक्स इंटिग्रेटेड अरली वॉरनिंग पर सहमति बनी है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है. सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं. ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है. यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है और यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है.
असम : सीएम हिमंता ने एनएमसी की 13,186 नई एमबीबीएस सीटों को बताया क्षमता को बढ़ाने वाला कदम
गुवाहाटी, 13 सितंबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को देश भर में एमबीबीएस की 13,186 अतिरिक्त सीटों को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से मंजूरी मिलने की तारीफ की। उन्होंने इस विस्तार को भारत में मेडिकल शिक्षा और हेल्थकेयर क्षमता को बढ़ाने वाला एक अहम कदम बताया।
सीएम सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में इस डेवलपमेंट का स्वागत किया। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए मौके बढ़ाने और देश में ट्रेंड डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।
इस नए विस्तार के साथ, 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए भारत में एमबीबीएस की कुल सीटों की संख्या 1.4 लाख से ज़्यादा हो गई है।
एनएमसी के ताजा डेटा के अनुसार, नेशनल इंपॉर्टेंस वाले संस्थानों की सीटों को छोड़कर, 836 मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटों की कुल संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है।
यह बढ़ोतरी मेडिकल एजुकेशन की क्षमता में एक बड़ा विस्तार दिखाती है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट-यूजी) देने वाले छात्रों के बीच एमबीबीएस सीटों की मांग बहुत अधिक है।
केंद्र शासित प्रदेशों और कई राज्यों में अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी गई है। इनमें कर्नाटक, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं, जहां सीटों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।
असम और पूर्वोत्तर के लिए यह विस्तार और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र अपनी मेडिकल शिक्षा और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है। हाल के वर्षों में राज्य में मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है। सरकार का मकसद है कि लोगों को बेहतर स्पेशलाइज्ड हेल्थकेयर मिल सके और साथ ही क्षेत्र के छात्रों के लिए ज़्यादा मौके पैदा हों।
एमबीबीएस सीटों में राष्ट्रीय स्तर पर हुई इस बढ़ोतरी से योग्य मेडिकल प्रोफेशनल्स की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भारत का हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार बढ़ रहा है।
एनएमसी का यह नया फ़ैसला 2026-27 एकेडमिक ईयर के लिए हजारों एमबीबीएस सीटें जोड़ने के बाद आया है, जिससे देश की कुल मेडिकल एजुकेशन क्षमता एक नए स्तर पर पहुँच गई है।
हाल के सालों में केंद्र और एनएमसी ने मेडिकल एजुकेशन के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट सीटें बढ़ाने और नए मेडिकल कॉलेज खोलने पर ध्यान दिया है।
इस नए विस्तार से नीट यूजी के उम्मीदवारों को हजोरों अतिरिक्त मौके मिलने और भारत के मेडिकल एजुकेशन इकोसिस्टम के और मजबूत होने की उम्मीद है।
सीएम सरमा की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब असम हेल्थकेयर और मेडिकल एजुकेशन के विस्तार को अपने विकास एजेंडे का एक अहम हिस्सा बनाए हुए है।
--आईएएनएस
ओपी/पीएम
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