पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में चार चरमपंथी मारे गए
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में चार चरमपंथी मारे गए70s की इस गजल को माना जाता है शापित! राइटर और गायक की हुई मौत, आज भी बड़े-बड़े सिंगर गाने से खाते हैं खौफ
Insha Ji Utho Ab Kooch Karo Cursed Ghazal: म्यूजिक एक ऐसी चीज है, जिसे सुनने और गाने से कई लोगों की रूह और दिलों-दिमाग को सुकून मिलता है. काफी लंबे समय से लोग म्यूजिक सुनते आ रहे हैं. वहीं, कई लोगों को गजलें सुनने और गाने का भी शौक होता है. बॉलीवुड में जगजीत सिंह और बेगम अख्तर की गायी गलजें सबसे ज्यादा गाई और सुनी जाती हैं. लेकिन पाकिस्तान की एक ऐसी गजल भी है, जिसे शापित माना जाता है. हम समझ सकते हैं कि आपको शायद इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा होगा, लेकिन यह बात काफी हद सही है क्योंकि जिस शख्स ने इस गजल को लिखा था, उन्होंने ही इसे शापित करार दिया था. 'इंशा जी उठो अब कूच करो' नाम की इस गजल के लिरिसिस्ट और गायक की अचानक मौत हो गई थी. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
70s की इस गजल को माना जाता है शापित!
'इंशा जी उठो अब कूच करो' गजल को 70 के दशक में पाकिस्तान के फेमस राइटर इब्न-ए-इंशा ने लिखा था. उन्हें शेर मोहम्मद खान के नाम से भी जाना जाता है. बताया जाता है कि इसे लिखने वाले से लेकर जो भी इससे जुड़ा उन सब की अचानक मौत हो गई. साल 1974 में पटियाला घराने के उस्ताद अमानत अली ने इसे पाकिस्तान टेलीविजन पर गाया था. उस दौरान जिसने भी उनकी आवाज में ये गजल सुनी वह उनका दीवाना हो गया. हालांकि, कुछ ही महीनों बाद महज 52 साल की कम उम्र में सिंगर का निधन हो गया.
शायर ने खुद कह दिया था गजल को मनहूस
इंशा जी उठो अब कूच करो को लिखने वाले कवि इब्ना इंशा चार साल बाद 1978 में कैंसर से ग्रस्त हो गए और लंदन के एक अस्पताल में उनका इलाज चला. अपने आखिरी लैटर में इंशा ने अमानत अली को याद करते हुए लिखा, ये मनहूस गजल कितनों की जान लेगी. अगले ही दिन उनका इंतकाल हो गया. हालांकि, ये मौत का सिलसिला यहीं पर खत्म नहीं हुआ. अमानत अली के बेटे असद अमानत अली ने भी एक बार इस गजल को कॉन्सर्ट में गया था. इसके कुछ ही महीनों बाद उनका भी निधन हो गया. कहा जाता है कि उनका निधन भी उस उम्र में ठीक वैसे ही हुआ, जैसे उनके पिता अमानत अली का हुआ था.
बड़े सिंगर आज भी गुनगुनाते से खाते खौफ
शफकत अली ने खुद एक इंटरव्यू में ये कहा था कि उनके बड़े भाई अमजद अली ने भी इंशा जी उठो अब कूच करो गजल गई थी और इसके प्रोड्यूसर भी अब इस दुनिया में नहीं रहे. आज के दौर में शफकत अली दुनियाभर में अपने परिवार की म्यूजिक लेगेसी को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन वह इस गजल को गाते नहीं है. बता दें कि हम यहां पर किए गए दावे की पुष्टि नहीं करते हैं. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि ये गजल शाबित है.
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