मंदिर में भगवान की मूर्ति की परिक्रमा क्यों की जाती है? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
Mandir Parikrama significance: हिंदू धर्म में मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने के बाद उनकी परिक्रमा करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु भगवान की प्रतिमा या मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
परिक्रमा का धार्मिक अर्थ क्या है?
‘परिक्रमा’ या ‘प्रदक्षिणा’ का भाव भगवान को अपने जीवन का केंद्र मानने से जोड़ा जाता है। भक्त भगवान के चारों ओर घूमते हुए यह भावना रखते हैं कि उनके जीवन में ईश्वर सर्वोच्च स्थान पर हैं।
इसी वजह से मंदिरों में परिक्रमा को पूजा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल किया गया है।
परिक्रमा किस दिशा में की जाती है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में सामान्य तौर पर दक्षिणावर्त परिक्रमा यानी भगवान को अपनी दाईं ओर रखते हुए परिक्रमा करने की परंपरा बताई जाती है। इसे प्रदक्षिणा भी कहा जाता है।
हालांकि, सभी देवी-देवताओं और सभी धार्मिक स्थलों के नियम एक जैसे नहीं होते। कुछ विशेष पूजा परंपराओं में अलग विधियां भी देखने को मिलती हैं।
कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए?
परिक्रमा की संख्या को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं। कई मंदिरों में श्रद्धालु एक, तीन, पांच या अधिक बार परिक्रमा करते हैं।
इसलिए परिक्रमा की कोई एक संख्या सभी मंदिरों पर लागू नहीं होती। जिस मंदिर में दर्शन के लिए जाएं, वहां की प्रचलित परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है।
परिक्रमा करते समय क्या भावना रखनी चाहिए?
धार्मिक दृष्टि से परिक्रमा केवल मंदिर के चारों ओर घूमना नहीं है। इसे भगवान के प्रति भक्ति, विनम्रता और समर्पण के भाव से जोड़ा जाता है।
श्रद्धालु परिक्रमा के दौरान भगवान का नाम लेते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की प्रार्थना करते हैं।
कुछ मंदिरों में पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती?
कुछ विशेष देवी-देवताओं की पूजा पद्धतियों में परिक्रमा के अलग नियम बताए जाते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ परंपराओं में शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जलधारी या अन्य विशेष स्थान को पार न करने की मान्यता मिलती है।
इसलिए किसी भी मंदिर में परिक्रमा करने से पहले वहां की स्थानीय धार्मिक परंपरा और नियमों को जानना बेहतर होता है।
परिक्रमा आज भी आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा
मंदिर में घंटी बजाने, भगवान के दर्शन और पूजा के बाद परिक्रमा करने की परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है। भक्त इसे भगवान के प्रति सम्मान और अपनी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम मानते हैं।
परिक्रमा का धार्मिक महत्व मुख्य रूप से आस्था और परंपराओं पर आधारित है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग मंदिरों, क्षेत्रों और संप्रदायों में परिक्रमा के नियम और विधि अलग हो सकती है। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता से भारत की खाड़ी देशों से साझेदारी तेल व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा तक पहुंची
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता ऐतिहासिक रूप से मजबूत तेल संबंधों को निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता तक फैली व्यापक साझेदारी में बदल रही है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।
गल्फ टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा संबंध अभी भी रिश्तों की नींव बने हुए हैं, लेकिन सहयोग नए रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी सहित क्षेत्रों में खाड़ी की पूंजी और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बाजार के आकार के साथ जोड़ा जा सकता है।”
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी पर सहयोग को गहरा किया और भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति जताई तथा रणनीतिक गैस भंडार की संभावनाओं पर चर्चा की।
सहयोग का एक अन्य क्षेत्र खाद्य सुरक्षा है, जो खाड़ी की मांग को भारत की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं से जोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि भंडारण, लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद सप्लाई चेन में निवेश की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
कार्यक्रम के समय को महत्वपूर्ण बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि क्षेत्रीय तनावों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित जहाजरानी पर फिर से ध्यान बढ़ाया है, जबकि खाड़ी देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता ला रहे हैं, उन्नत टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं और एशिया के साथ कारोबारी संबंध मजबूत कर रहे हैं।
विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई के जरिए खाड़ी का प्रतिनिधित्व है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय परिदृश्य में समूह का महत्व बढ़ता है। भारत के सभी छह जीसीसी देशों के साथ गहरे संबंध हैं और इसलिए वह खाड़ी और व्यापक ब्रिक्स समुदाय के बीच एक स्वाभाविक पुल की भूमिका निभाता है।
खाड़ी देश भारत की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कच्चा तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जबकि भारत खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, मशीनरी और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है। लाखों भारतीय खाड़ी में रहकर आजीविका कमाते हैं या कारोबार चलाते हैं, जो रिश्तों को एक मजबूत मानवीय आधार प्रदान करते हैं।
भारत-खाड़ी संबंध फरवरी 2026 में और मजबूत हुए, जब भारत ने जीसीसी के साथ संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए और एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू की, जिसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं।
— आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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