Delhi के प्रहलादपुर में पत्नी की हत्या के आरोप में पति और उसकी प्रेमिका गिरफ्तार
दिल्ली के प्रहलादपुर में पिछले महीने हुई एक महिला की हत्या के मामले में उसके 22 वर्षीय पति और कथित प्रेमिका को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि जांच के दौरान पता चला कि महिला की हत्या पति और प्रेमिका के बीच संबंधों के कारण की गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी मोहम्मद लाल बाबू उर्फ जाहिद अली और रुखसार खातून को दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, पटना, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और मुंबई में 300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल समेत व्यापक जांच के बाद गिरफ्तार किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, लाल बाबू ने कथित रूप से रुखसार के साथ मिलकर साजिश रची और प्रहलादपुर स्थित एक घर के बाथरूम में पत्नी सबीला खातून की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि हत्या के बाद 29 अगस्त को शाहबाद डेयरी थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसने कहा कि लाल बाबू और सबीला प्रहलादपुर में रह रहे थे।
आरोप है कि लाल बाबू का रुखसार के साथ संबंध था और वह उससे शादी करना चाहता था। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद लाल बाबू अपने नाबालिग बेटे के साथ दिल्ली से नोएडा की ओर भाग गया, जहां उसने अपने ममेरे भाई मोहम्मद ओसामा से संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि ओसामा ने कथित रूप से लाल बाबू के ठहरने की व्यवस्था की और अन्य मदद दी तथा गिरफ्तारी से बचने के लिए बिहार जाने में उसकी सहायता की।
जांच के दौरान उसे पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हत्या के बाद पुलिस ने कई जगहों पर तलाशी ली और आरोपियों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच तथा मौके पर जाकर सत्यापन किया। पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं ने अपराध के बाद लाल बाबू द्वारा कथित रूप से इस्तेमाल किए गए रास्तों और स्थानों का पता लगाया और आखिरकार उसे तथा रुखसार को खोज निकाला।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल, तकनीकी जानकारी और कई राज्यों में जुटाई गई स्थानीय सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने बताया कि बिहार के सीतामढ़ी का निवासी लाल बाबू मुख्य आरोपी है और वह मृतका का पति है। रुखसार को साजिश और अपराध में कथित भूमिका के चलते गिरफ्तार किया गया है।
BRICS समिट में दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से पास, भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक जीत
भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर, शनिवार को ब्रिक्स समिट में 'दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया गया। इसमें भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में 'ग्लोबल साउथ' की समान भागीदारी की मांग की गई। भारत मंडपम में समिट के दौरान यह घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक ढांचे को पुराने पड़ चुके संस्थानों के ज़रिए नहीं चलाया जाना चाहिए। उन्होंने नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार और ज़रूरी प्रतिनिधित्व की वकालत की।
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मोदी ने कहा कि हमारे विचारों की विविधता के साथ-साथ, ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से यह साफ़ हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के ज़रिए नहीं चलाया जा सकता; प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार ज़रूरी हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में 'ग्लोबल साउथ' की समान भागीदारी होनी चाहिए। फैसलों और उनके नतीजों के बीच के अंतर को साझेदारी और सामूहिक कार्रवाई के ज़रिए पाटा जाना चाहिए।
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घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने एकतरफ़ा टैरिफ़ और नॉन-टैरिफ़ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई, क्योंकि ये व्यापार को बिगाड़ते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के ख़िलाफ़ हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ एकतरफ़ा दबाव डालने वाले उपायों की भी निंदा की। घोषणापत्र में टकराव को रोकने के लिए ज़्यादा जुड़ाव की बात कही गई, जिसमें टकराव की मूल वजहों को दूर करने की कोशिशें भी शामिल हैं। समूह ने बातचीत, सलाह-मशविरे और कूटनीति के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के अपने संकल्प को भी दोहराया। ब्रिक्स देशों ने एक ऐसे बहुपक्षीय नज़रिए की वकालत की जो अहम वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों के नज़रिए को ध्यान में रखे, और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में बातचीत और सहयोग के महत्व पर ज़ोर दिया।
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