भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, अनाज-आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत: इंडस्ट्री डेटा
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने एथेनॉल सप्लाई ईयर (ईएसवाई) 2025-26 के तहत अगस्त 2026 के अंत तक 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की है, जिसमें अनाज-आधारित फीडस्टॉक का हिस्सा कुल आपूर्ति का लगभग 70 प्रतिशत है।
आंकड़ों के अनुसार, यह इस अवधि के लिए अनुबंधित 1,048 करोड़ लीटर मात्रा का लगभग 85 प्रतिशत है।
एआईडीए के अनुसार, देश की एथेनॉल आपूर्ति व्यवस्था में अब विविधता बढ़ रही है और उत्पादन किसी एक कच्चे माल पर निर्भर नहीं रह गया है। कुल आपूर्ति में अनाज-आधारित फीडस्टॉक का योगदान 624 करोड़ लीटर रहा, जबकि चीनी-आधारित स्रोतों से 271 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इस तरह कुल आपूर्ति में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी अनाज-आधारित स्रोतों की रही।
अनाज-आधारित कच्चे माल में मक्का (मकई) सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा। अगस्त के अंत तक मक्का से 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई। इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से प्राप्त अधिशेष चावल से 214 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ, जबकि क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया।
एआईडीए ने कहा कि मक्का और अधिशेष चावल के बढ़ते उपयोग से एथेनॉल उत्पादन क्षमता को स्थिरता मिल रही है और इससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
चीनी-आधारित स्रोतों में गन्ने के रस से सबसे अधिक 149 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसके अलावा, बी-हेवी शीरे से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरे से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया।
एआईडीए का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से आपूर्ति शृंखला अधिक लचीली बनी है और किसी एक फसल या कच्चे माल पर निर्भरता कम हुई है।
एआईडीए की उपमहानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज-आधारित स्रोतों से आया है, जिसमें मक्का और एफसीआई का अधिशेष चावल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, चीनी आधारित स्रोत भी अभी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न फीडस्टॉक का उपयोग भारत के एथेनॉल कार्यक्रम को अधिक मजबूत बनाता है, क्योंकि इससे देश की कृषि उपज का बेहतर उपयोग संभव होता है और उत्पादन जोखिम भी कम होता है।
हालांकि एआईडीए ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसके लिए स्थिर और अनुमानित मांग सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाएगा।
भारत केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी), कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) और अन्य औद्योगिक उपयोगों में भी एथेनॉल की खपत बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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1.10 लाख करोड़ का निवेश...दुबई के शेख ने खोला खजाना, PM मोदी और क्राउन प्रिंस की मेगा डील डन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, अहम खनिजों, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। PM मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-यूएई संबंधों में "बड़ा बदलाव आया है" और अब दोनों पक्ष "अपनी महत्वाकांक्षाओं को और ऊंचे स्तर पर ले जा रहे हैं। PM मोदी ने कहा महामहिम शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलकर खुशी हुई। रक्षा, AI, अंतरिक्ष, अहम खनिजों, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
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उन्होंने कहा निवेश के रिश्तों से लेकर रणनीतिक ऊर्जा बुनियादी ढांचे और IMEC कनेक्टिविटी में नई संभावनाओं तक, आगे बहुत बड़ी संभावनाएं हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के बीच, भारत-UAE के मजबूत संबंध क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा, "पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के समय में, भारत-UAE की मजबूत साझेदारी स्थिरता, समृद्धि और शांति का प्रतीक है।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दोहराया, जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों पर आधारित है। दोनों नेताओं ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा को भी याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) में UAE की "सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी" की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स में मिले सकारात्मक नतीजों का स्वागत किया और साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने तथा ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने के लिए इस समूह के माध्यम से मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
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बैठक के दौरान, नेताओं ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया। इसमें UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी का ओडिशा में एक इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट के विकास में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने का ऐलान भी शामिल है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस प्रोजेक्ट को भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम निवेश बताया है और उम्मीद है कि इससे ओडिशा एक ग्लोबल एल्युमीनियम मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा। दोनों नेताओं ने UAE के सबसे नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड, 'L’Imad' की भूमिका को भी माना, जो आपसी फायदे के लिए भारत-UAE साझेदारी को और मजबूत करने में मदद कर सकता है।
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