न मूर्ति का बीमा, न भगवान का, फिर मुंबई के गणपति पंडाल का ये ₹703 करोड़ का इंश्योरेंस आखिर किसके लिए?
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भगवान को भोग लगाने के बाद ही भोजन क्यों करते हैं? जानें हिंदू धर्म में अन्न अर्पित करने की परंपरा
Bhagwan ko bhog lagane ka niyam: हिंदू धर्म में भोजन को केवल शरीर की जरूरत नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से प्राप्त अन्न माना जाता है। इसी भावना के चलते कई परिवारों में भोजन करने से पहले उसका एक हिस्सा भगवान को अर्पित करने की परंपरा है। इसे भोग लगाना कहा जाता है।
मान्यता है कि भोजन को पहले भगवान को समर्पित करने के बाद ग्रहण करने से व्यक्ति के मन में कृतज्ञता और श्रद्धा का भाव बना रहता है।
अन्न को भगवान का प्रसाद क्यों माना जाता है?
भारतीय धार्मिक परंपरा में अन्न को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। भोजन मनुष्य के जीवन और शरीर का आधार है, इसलिए इसे ईश्वर की देन मानकर उसका सम्मान करने की परंपरा रही है।
जब भोजन भगवान को अर्पित किया जाता है तो वही अन्न भक्त के लिए प्रसाद का रूप ले लेता है। इसे श्रद्धा के साथ ग्रहण किया जाता है।
भोग लगाने के पीछे क्या है धार्मिक भावना?
भगवान को भोग लगाने के पीछे मुख्य भावना समर्पण की मानी जाती है। व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि उसके पास जो अन्न है, वह केवल उसकी मेहनत का परिणाम नहीं बल्कि प्रकृति और ईश्वर की कृपा से भी प्राप्त हुआ है।
इसी वजह से भोजन से पहले ईश्वर को धन्यवाद देने की परंपरा कई हिंदू परिवारों में आज भी कायम है।
भगवान को किस तरह का भोग लगाया जाता है?
भोग में फल, मिठाई, दूध, पकवान या घर में बनाया गया सामान्य भोजन भी अर्पित किया जा सकता है। अलग-अलग देवी-देवताओं और धार्मिक परंपराओं में भोग की सामग्री अलग हो सकती है।
कई परिवारों में घर में बना पहला भोजन भगवान को अर्पित करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
क्या भोग लगाने के बाद ही भोजन करना जरूरी है?
यह मुख्य रूप से आस्था और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा विषय है। कुछ परिवार हर भोजन से पहले भगवान को भोग लगाते हैं, जबकि कुछ लोग विशेष पूजा या धार्मिक अवसरों पर ऐसा करते हैं।
इसलिए इसे सभी लोगों के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जा सकता।
भोग लगाने के बाद भोजन का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को अर्पित किए गए भोजन को प्रसाद मानकर ग्रहण करने से व्यक्ति के भीतर संतोष और कृतज्ञता का भाव आता है। भोजन करते समय ईश्वर का स्मरण करने की यह परंपरा मनुष्य को अन्न के महत्व का भी एहसास कराती है।
आज भी कई घरों में निभाई जाती है परंपरा
बदलती जीवनशैली के बावजूद आज भी अनेक परिवार भोजन से पहले भगवान को भोग लगाते हैं। कहीं इसके लिए अलग पूजा की जाती है, तो कहीं थाली का थोड़ा हिस्सा भगवान के सामने रखकर प्रार्थना की जाती है।
यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ अन्न के सम्मान और उसे साझा करने की भावना से भी जुड़ी हुई है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में भोग लगाने की विधि और मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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