प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन (2.0) 20 लाख घरों के माइलस्टोन के पहुंचने के करीब, शहरी गरीबों को हुआ फायदा
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) करीब 20 लाख घरों को मंजूरी देने के आंकड़े के करीब पहुंच गया है। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई।
अब तक करीब 18.77 लाख घरों को मंजूरी दी जा चुकी हैं और इससे शहरी गरीबों के लिए किफायती, सुरक्षित और पक्का घर सुनिश्चित हुआ है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ये मंजूरियां ‘सभी के लिए घर’ की दिशा में एक अहम कदम हैं, जिससे ज्यादा शहरी परिवार सुरक्षित घर के मालिक बनने और बेहतर भविष्य बनाने की ओर बढ़ सकेंगे।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत कुल 18.77 लाख घरों को मंजूरी दी है, जिससे इस योजना के कार्यान्वयन को और बढ़ावा मिला है और शहरी क्षेत्रों में सभी के लिए आवास की दिशा में प्रगति तेज हुई है।
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मंजूर किए गए 18.77 लाख घरों में से 17.19 लाख घर (92 प्रतिशत) महिलाओं को आवंटित किए गए हैं।
एमओएचयूए के शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि पीएमएवाई-यू 2.0 को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करने और उसकी निगरानी के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इस योजना का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सके।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी तरह की रुकावटों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बातचीत करके उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
पीएमएवाई-यू 2.0 का मकसद अपने अलग-अलग वर्टिकल के जरिए शहरी इलाकों में रहने वाले योग्य ईडब्ल्यूएस/एलआईजी और एमआईजी परिवारों को घर बनाने में मदद देना है।
सरकार के मुताबिक, इस स्कीम के तहत लाभार्थी अपना पक्का घर बना सकते हैं, स्कीम के तहत बने प्रोजेक्ट्स में घर खरीद सकते हैं, किफायती किराए के घर का लाभ उठा सकते हैं, या योग्य होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का फायदा ले सकते हैं। इस तरह, उन्हें उनकी जरूरतों, पात्रता और आर्थिक हालात के हिसाब से कई तरह के हाउसिंग विकल्प मिलते हैं।
पीएमएवाई-यू 2.0, पीएमएवाई-यू के तहत हुई लगातार प्रगति को आगे बढ़ाता है।
कुल मिलाकर, पीएमएवाई-यू और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 1.25 करोड़ से ज्यादा घरों को मंजूरी दी गई है और 1 करोड़ से ज्यादा घर बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
सबको साथ लेकर चलने और समाज के कमजोर वर्गों तक योजना का फायदा पहुंचाने के लिए, बुजुर्गों को 1.80 लाख घर आवंटित किए गए हैं।
एससी लाभार्थियों के लिए लगभग 3.25 लाख, एसटी लाभार्थियों के लिए 1.02 लाख और ओबीसी लाभार्थियों के लिए 8.22 लाख घरों को मंजूरी दी गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
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PA पर ED की कार्रवाई के अगले दिन हरीश रावत का इस्तीफा, भर्ती घोटाले पर दी सफाई
Harish Rawat: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी में अपने सभी पदों से इस्तीफा देकर राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है. उनका यह कदम उनके निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के ठीक अगले दिन सामने आया है. हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस निर्णय की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी व्यक्तिगत सहयोगी पर लगे आरोपों की वजह से कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और राजनीतिक संघर्ष पर कोई आंच आए या जनता के बीच सवाल उठें.
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा,… pic.twitter.com/Z6rZYcVev0
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) September 11, 2026
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निजी सहायक पर ED की कार्रवाई और बरामदगी के दावे
यह पूरा मामला वर्ष 2016 में आयोजित हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है. केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने देहरादून में कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की, जिसमें हरीश रावत के सहयोगी चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था. जांच एजेंसी के दावों के अनुसार, छापेमारी के दौरान जीना के ठिकाने से 32 लाख रुपये की अघोषित नकदी, लगभग 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी लग्जरी घड़ियां बरामद की गई हैं. इसके अलावा एजेंसी ने उनके और उनके परिजनों के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये की राशि को भी फ्रीज कर दिया है. उल्लेखनीय है कि चंदन सिंह जीना इससे पूर्व हरीश रावत के मुख्यमंत्री काल में उनके ओएसडी (OSD) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
आरोपों पर हरीश रावत ने दी प्रतिक्रिया
अपने सहयोगी पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया और जनता के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि समाचार माध्यमों में उनके सहयोगी के घर से नकदी और आभूषणों की बरामदगी के जो दावे किए जा रहे हैं, उनका वास्तविक सच तो निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही देश के सामने आ पाएगा. उन्होंने चंदन सिंह जीना को अपना पुराना और निष्ठावान सहयोगी बताते हुए कहा कि यद्यपि उन्हें भर्ती परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली के आरोपों पर कतई विश्वास नहीं है, लेकिन यदि जांच में कोई भी आरोप सही साबित होता है तो यह उनके लिए बेहद दुखद और शर्मिंदगी भरा विषय होगा.
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कार्यकाल की नियुक्तियों पर सफाई और जनता से माफी
राज्य में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए हरीश रावत ने बताया कि उस तीन वर्ष की अवधि में पारदर्शी तरीके से 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं. उन्होंने अत्यंत संवेदनशील रुख अपनाते हुए कहा कि यदि उस व्यापक प्रक्रिया में अनजाने में भी कोई चूक या प्रशासनिक गलती हुई है, तो वे इसके लिए उत्तराखंड की जनता से सहृदय माफी मांगते हैं. उत्तराखंड राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि अधिकारी का चयन उसके उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और योग्यता के आधार पर किया गया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह का संदर्भ भी शामिल था. उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य में कौन सा व्यक्ति क्या गलत कदम उठाएगा, इसका पूर्वानुमान लगाना किसी भी शासन व्यवस्था के लिए संभव नहीं होता.
2016 की भर्ती धांधली की जांच का दायरा
प्रवर्तन निदेशालय की यह पूरी कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में OMR शीट में की गई कथित हेरफेरी से जुड़ी है. ED की जांच में तत्कालीन आयोग के अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और OMR शीट स्कैनिंग का काम देखने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के संचालक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. आरोप है कि कुछ परीक्षार्थियों की OMR शीट लीक करके उनमें उत्तरों के फेरबदल किए गए थे और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में नकद लेन-देन हुआ था. एजेंसी ने चंदन सिंह जीना का मोबाइल फोन भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि वित्तीय लेनदेन के तारों को जोड़ा जा सके.
जांच एजेंसियों को खुली चुनौती और सजा का स्वीकार
अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में हरीश रावत ने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को सीधी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास भी राज्य की भर्तियों में उनके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप का कोई प्रमाण मौजूद है, तो वह उसे तुरंत CBI, ED या पुलिस को सौंपे. उन्होंने भावुक होते हुए दोहराया कि अगर जाने-अनजाने में उनसे कोई ऐसी भूल हुई है जिससे प्रदेश के युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ हो, तो वे हाथ जोड़कर क्षमाप्रार्थी हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के समक्ष उन पर कोई गलती सिद्ध होती है, तो वे उसका हर विधिक परिणाम और सजा भुगतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
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