कौन हैं 'काई की' और क्यों हैं इतने ताकतवर? BRICS समिट में जिनपिंग के साथ पहुंचे ‘राइट हैंड मैन’
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच चुके हैं. 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में जिनपिंग के साथ चीन का 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है. इस प्रतिनिधिमंडल में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के अलावा एक ऐसा नाम भी शामिल है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं काई की (Cai Qi).
70 वर्षीय काई की चीन की सत्ता व्यवस्था में बेहद प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. वह चीन की सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में पांचवें स्थान पर हैं और शी जिनपिंग के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल माने जाते हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उन्हें अक्सर जिनपिंग का ‘राइट हैंड मैन’ या डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ कहा जाता है.
कौन हैं काई की?
काई की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPC के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा हैं. वह पार्टी की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं. यह चीन की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक संस्थाओं में से एक है, जहां देश की बड़ी नीतियों और महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों पर चर्चा होती है.
काई की कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटेरिएट के प्रथम सदस्य भी हैं. इसके अलावा वह CPC सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के निदेशक हैं. यह कार्यालय चीन की सत्ता व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
जनरल ऑफिस शीर्ष नेताओं के कार्यक्रम, जरूरी दस्तावेज, बैठकों के समन्वय और पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण संचार जैसे काम संभालता है. इसलिए इस पद पर बैठे व्यक्ति की शीर्ष नेतृत्व तक सीधी और लगातार पहुंच रहती है. यही काई की की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है.
क्यों कहा जाता है शी का ‘राइट हैंड मैन’?
काई की की ताकत केवल उनके आधिकारिक पद से नहीं आती. उनका शी जिनपिंग के साथ राजनीतिक संबंध करीब तीन दशक पुराना बताया जाता है.
जब शी जिनपिंग फुजियान में पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, उसी दौर में काई की उनके साथ काम करने लगे. दोनों का राजनीतिक संपर्क बाद में झेजियांग और अन्य महत्वपूर्ण चरणों में भी बना रहा.
समय के साथ शी जिनपिंग चीन की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे और काई की भी उनके बेहद भरोसेमंद सहयोगियों के रूप में आगे बढ़ते गए.
यही व्यक्तिगत राजनीतिक भरोसा और पार्टी के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर उनकी मौजूदगी काई की को असाधारण प्रभाव देती है.
डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ की भूमिका
रॉयटर्स सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में काई की को शी जिनपिंग का डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ बताया गया है. हालांकि चीन की राजनीतिक व्यवस्था में यह कोई आधिकारिक पदनाम नहीं है.
असल में उनकी भूमिका को समझने के लिए उनके पास मौजूद जिम्मेदारियों को देखना जरूरी है.
शी जिनपिंग के कार्यक्रमों, महत्वपूर्ण बैठकों, दस्तावेजों और पार्टी-स्तरीय समन्वय से जुड़े कामों में केंद्रीय जनरल ऑफिस की अहम भूमिका होती है. इस कारण काई की को शी के आसपास के सबसे महत्वपूर्ण अधिकारियों में माना जाता है.
वह जिनपिंग के साथ कई महत्वपूर्ण विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भी नजर आते रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि वह सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेता नहीं, बल्कि चीन के शीर्ष नेतृत्व के बेहद भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी भी हैं.
2026 में और बढ़ा काई की का कद
काई की का प्रभाव हाल के वर्षों में लगातार बढ़ा है. जून 2026 में उन्हें CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल और नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस की जिम्मेदारी भी दी गई.
यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी स्कूल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर और वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभाता है.
इस तरह काई की के पास पार्टी संगठन, शीर्ष नेतृत्व के प्रशासनिक समन्वय और राजनीतिक प्रशिक्षण—तीनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं.
हालांकि, उन्हें चीन का औपचारिक रूप से नंबर दो नेता कहना सही नहीं होगा. प्रोटोकॉल के लिहाज से यह स्थान प्रधानमंत्री ली च्यांग के पास है. काई की की वास्तविक शक्ति उनके पदों के साथ-साथ शी जिनपिंग के साथ उनकी निकटता से जुड़ी हुई है.
शी और काई की की कहानी कितनी पुरानी है?
दोनों नेताओं का राजनीतिक संपर्क 1990 के दशक से माना जाता है. 1996 में जब शी जिनपिंग फुजियान में पार्टी के डिप्टी सेक्रेटरी बने, तब काई की उनके साथ काम करने लगे थे.
इसके बाद काई की ने चीन में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वह बीजिंग के मेयर भी रहे और राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
2017 में बीजिंग में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान के दौरान भी उनका नाम चर्चा में आया. इस अभियान में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को शहर से बाहर किया गया था. इस कार्रवाई को लेकर चीन की सरकार की आलोचना भी हुई थी.
बाद में काई की का पार्टी में कद तेजी से बढ़ता गया. 2022 में वह CPC सेक्रेटेरिएट के फर्स्ट सेक्रेटरी बने और 2023 में केंद्रीय जनरल ऑफिस के निदेशक की जिम्मेदारी संभाली.
भारत दौरे में काई की क्यों महत्वपूर्ण हैं?
काई की का भारत आना ऐसे समय हो रहा है जब भारत-चीन संबंध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था.
सीमा विवाद का असर व्यापार, निवेश और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ा. हालांकि, हाल के समय में दोनों देश तनाव कम करने और संबंधों को सामान्य दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
ऐसे माहौल में शी जिनपिंग के साथ काई की का भारत आना महज प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होना नहीं माना जा रहा. वह चीन के शीर्ष नेतृत्व और जिनपिंग के करीबी रणनीतिक सर्कल का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए BRICS के दौरान होने वाली बातचीत में उनकी भूमिका पर भी नजर रहेगी.
मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर निगाहें
BRICS समिट भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व को सीधे बातचीत का अवसर देगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना को लेकर भी काफी रुचि है.
ऐसी बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
इसी संदर्भ में काई की की मौजूदगी खास है. वह चीन की सत्ता व्यवस्था के उस हिस्से से आते हैं, जहां राजनीतिक फैसलों का समन्वय और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है.
SCO में भी हो चुकी है मोदी से मुलाकात
काई की की भारत के लिए बिल्कुल नए चेहरे नहीं हैं. 31 अगस्त 2025 को तियानजिन में हुई SCO बैठक के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.
अब करीब एक साल बाद उनकी मौजूदगी भारत में हो रहे BRICS सम्मेलन में है. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वह चीन की प्रमुख बहुपक्षीय कूटनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं में हैं.
क्या काई की की मौजूदगी कोई बड़ा संदेश है?
भारत दौरे में काई की की मौजूदगी को सीधे किसी बड़े समझौते या नीति बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी. लेकिन इतना जरूर है कि चीन ने अपने राष्ट्रपति के साथ पार्टी और सत्ता तंत्र के बेहद प्रभावशाली नेता को भेजा है.
BRICS जैसे मंच पर जहां वैश्विक शासन, बहुपक्षीय व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, वहां काई की जैसे नेता की मौजूदगी बातचीत को राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है.
शी जिनपिंग चीन के सर्वोच्च नेता हैं, लेकिन काई की उन चुनिंदा लोगों में हैं जिनकी पहुंच उनके सबसे करीब मानी जाती है. इसलिए भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन में जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी सिर्फ एक प्रतिनिधिमंडल की औपचारिकता नहीं, बल्कि चीन की सत्ता संरचना को समझने के लिहाज से भी बेहद अहम है.
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Saudi Arabia shuts key oil pipeline after drone attack launched from Iraq | BBC News
Saudi Arabia has closed a critical oil pipeline after it was attacked by drones launched from Iraq, as conflict in the Middle East widens. Iraq said it had fired a military commander and launched an investigation after admitting the drone attack on its neighbour's East-West pipeline had originated in one of its provinces bordering Iran. The 1,200km (745 mile) pipeline has helped Saudi Arabia - the world's largest crude oil exporter - bypass the Strait of Hormuz. The incident comes amid a major advance by the Iranian-backed Houthi rebels in Yemen, putting more pressure on global oil shipping routes as the US-Iran war stretches into its seventh month. Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #BBCNews
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