रतलाम में अवैध शराब के खिलाफ एक्शन, 18 लीटर हाथ भट्टी शराब और 32 पाव देशी शराब पकड़ी
सागर में जहरीली शराब पीने से 30 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिख रही है। रतलाम में भी आबकारी विभाग की टीम शुक्रवार रात शहर की झुग्गी बस्तियों और आसपास के इलाकों में पहुंची। टीम ने कई जगहों पर तलाशी ली और हाथ भट्टी से बनी शराब के साथ देशी शराब भी बरामद की।
देर रात हुई इस कार्रवाई में कुल 18 लीटर हाथ भट्टी शराब और 32 पाव देशी शराब जब्त की गई। शराब मिलने के बाद आबकारी विभाग ने तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए हैं। विभाग का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ स्पेशल ड्राइव आगे भी जारी रहेगी।
रतलाम की 8 बस्तियों में अचानक पहुंची आबकारी टीम
आबकारी विभाग की टीम ने शुक्रवार रात शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ जांच शुरू की। टीम बंजली, बाजना बस स्टैंड, बड़बड़ झुग्गी बस्ती, ईश्वर नगर, मोतीनगर, नगरा, सुभाष नगर और प्रताप नगर की झुग्गी बस्तियों में पहुंची। अचानक टीम के पहुंचने से कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों से करीब 18 लीटर हाथ भट्टी शराब बरामद हुई। इसके अलावा 15 पाव देशी मसाला शराब और 17 पाव देशी प्लेन शराब भी मिली। यानी कार्रवाई में कुल 32 पाव देशी शराब जब्त की गई। विभाग ने शराब को जब्त कर संबंधित मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की।
तीन मामलों में दर्ज हुआ केस
अवैध शराब मिलने के बाद आबकारी विभाग ने तीन प्रकरण दर्ज किए हैं। ये मामले मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत बनाए गए हैं। विभाग की टीम ने केवल शराब की जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि उन जगहों की भी जांच की जहां शराब के अवैध उत्पादन या बिक्री की आशंका थी।
हाथ भट्टी शराब को लेकर विभाग की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी शराब स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने के कारण कई बार बिना किसी गुणवत्ता जांच के लोगों तक पहुंचती है। हालांकि, रतलाम में जब्त शराब जहरीली थी या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
आदिवासियों के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर किये सवाल
मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर निशाना साधा है , उन्होंने सरकार पर आदिवासियों की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के आरोप लगाये हैं, उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया X पर दो अलग अलग पोस्ट की मदद से सरकार पर हमला किया है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने सीधी जिले में सही समय पर इलाज नहीं मिलने से एक मासूम बैगा आदिवासी बच्चे की मौ तको लेकर सरकार से सवाल किये हैं वहीं इंदौर में आदिवासी छात्रावास के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं होने पर निशाना साधा है।
सिंघार ने स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा
सिंघार ने लिखा- बालाघाट और रीवा के बाद अब सीधी के चुरहट में 6 वर्षीय बैगा आदिवासी बच्चे की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण जान चली गई। न एंबुलेंस में ऑक्सीजन, न मास्क, एंबुलेंस और इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा मुख्यमंत्री जी उस माँ को जवाब कौन देगा, जिसकी कोख आपकी निष्क्रिय स्वास्थ्य मंत्री की वजह से सूनी हुई?
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा लेने की मांग की, कांग्रेस नेता ने कहा जब प्रदेश में मासूमों की जान बचाने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था ही दम तोड़ रही है, तो स्वास्थ्य मंत्री किस बात के मंत्री हैं? जनता की जान से खिलवाड़ बंद कीजिए। जिम्मेदारी तय कर अपने स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा लीजिए।
आदिवासियों को सुविधा देने में हो रही देरी पर सवाल
सिंघार ने इंदौर में आदिवासी छात्रावास के निर्माण में हो रही देरी पर भी सवाल उठाये हैं, उन्होंने एक अख़बार में छपी खबर को X पर पोस्ट करते हुए लिखा- आदिवासी हितों की बात करने वाली भाजपा सरकार में आदिवासी छात्रों के छात्रावास से लेकर स्कूलों की साइंस लैब तक के काम जमीन के विवाद में अटके पड़े हैं।
इंदौर संभाग में आदिवासी छात्रों के लिए छात्रावास और सरकारी स्कूलों में साइंस लैबबनाने के लिए ₹46.90 करोड़ की स्वीकृति की गई। लेकिन 10 काम शुरू तक नहीं हुए और कई जगहों पर जमीन, पुराने भवनों और पेड़ों की कटाई की अनुमति का इंतजार है।
19 सितंबर को इंदौर में “छात्रों की गूंज” के मंच से उठाएंगे आवाज
सिंघार ने कहा ये सिर्फ निर्माण कार्यों की देरी नहीं, आदिवासी बच्चों के भविष्य और उनके शिक्षा के अधिकार के साथ खिलवाड़ है। छात्रों की इन्हीं समस्याओं और उनके हक की आवाज़ उठाने के लिए 19 सितंबर को इंदौर में “छात्रों की गूंज” के मंच से इस लापरवाह सरकार से सवाल होगा कि आदिवासी छात्रों के हक का पैसा और जरूरी सुविधाएं आखिर कब मिलेंगी?
एक और मासूम की मौत… और भाजपा सरकार की संवेदनहीनता फिर से उजागर!
बालाघाट और रीवा के बाद अब सीधी के चुरहट में 6 वर्षीय बैगा आदिवासी बच्चे की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण जान चली गई।
न एंबुलेंस में ऑक्सीजन, न मास्क, एंबुलेंस और इलाज के लिए करना पड़ा घंटों इंतजार… मुख्यमंत्री…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 12, 2026
आदिवासी हितों की बात करने वाली भाजपा सरकार में आदिवासी छात्रों के छात्रावास से लेकर स्कूलों की साइंस लैब तक के काम जमीन के विवाद में अटके पड़े हैं।
इंदौर संभाग में आदिवासी छात्रों के लिए छात्रावास और सरकारी स्कूलों में साइंस लैबबनाने के लिए ₹46.90 करोड़ की स्वीकृति की गई। लेकिन… pic.twitter.com/yB0BcW7ZrQ
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 12, 2026
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