26 मई 2022 इंडियन एक्सप्रेस में तड़के सुबह 4:00 बजे एंड्र्यू एमसन की एक रिपोर्ट पब्लिश हुई। रिपोर्ट की हेडलाइन और इसकी कवर फोटो ऐसी जिसने सबका ध्यान खींचा। फोटोग्राफर अभिनव साह की इस तस्वीर के साथ जो रिपोर्ट थी उसकी हेडलाइन थी स्टेडियम इज एंप्टीड एथलीट्स टोल्ड टू लीव सो दैट आईएएस ऑफिसर कैन वॉक विद डॉग। रिपोर्ट के मुताबिक त्यागराज स्टेडियम में खिलाड़ी और कोच से शाम 7:00 बजे तक ट्रेनिंग खत्म करने को कहा जा रहा था। ताकि दिल्ली के तब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेवेन्यू वाले आईएएस संजीव खिरवार अपने कुत्ते को स्टेडियम में घुमा सकें। तस्वीर में संजीव खेरवार अपनी आईएएस पत्नी रिंकू डुग्गा और अपने कुत्ते के साथ स्टेडियम में टहलते हुए दिखाई दे रहे थे। उन दिनों रिंकू दिल्ली सरकार में सेक्रेटरी लैंड एंड बिल्डिंग थी। इस रिपोर्ट के आते ही विवाद खड़ा हुआ। राजनीतिक बयानबाजी भी हुई और मांग हुई। अफसर पर कारवाई की। रिपोर्ट पब्लिश होने के 18 घंटे के अंदर ही खबर आई कि स्टेडियम में कुत्ता टहलाने वाले अफसर को दिल्ली से लद्दाख भेज दिया गया और उनकी पत्नी जो खुद भी एक आईएएस अफसर हैं उन्हें अरुणाचल प्रदेश। हालांकि कुत्ता कहां भेजा गया? इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इस विवाद ने बड़े अफसरों के एडमिनिस्ट्रेटिव पावर के मिसयूज का मुद्दा उठाया था। हालांकि तबादला होने के बाद इस विवाद पर अल्पविराम भी लग गया था। लेकिन एक साल बाद ही खबर आई कि आईएस रिंकू के करियर रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट पर भेज दिया था। रिंकू दुग्गा ने इस फैसले को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल यानी कि सीएटी में चुनौती दी। 8 अगस्त 2025 को कैट ने उनका कंपलसरी रिटायरमेंट आर्डर रद्द कर दिया और उनकी बहाली का रास्ता साफ कर दिया। केंद्र सरकार इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची लेकिन 15 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कैट के फैसले को बरकरार रखा। यानी हाईकोर्ट के फैसले के बाद रिंकू दुग्गा की नौकरी में वापसी का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 7 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया और फिलहाल उनकी रीइस्टमेंट यानी कि बहाली पर रोक लगा दी। अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
2022 में त्यागराज स्टेडियम में हुआ क्या था?
26 मई को दिल्ली का त्यागराज स्टेडियम अचानक सुर्खियों में आ गया था। वजह थी आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार और उनकी पत्नी रिंकू दुगा और उनके कुत्ते को लेकर सामने आई तस्वीर। उस वक्त संजीव खिरवार दिल्ली सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेवेन्यू और रिंकू दुगा प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम थे। कुछ खिलाड़ियों और कोचों ने आरोप लगाया था कि वे रात करीब 8:00 बजे से 8:30 बजे तक स्टेडियम की फ्लड लाइट्स में प्रैक्टिस करते थे। लेकिन उन्हें शाम करीब 7:00 बजे ही स्टेडियम खाली करने के लिए कहा जाने लगा। फिर 26 मई 2022 को द इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर एक तस्वीर छपी। इसमें संजीव खिरवार और रिंकू दुग्गा अपने कुत्ते के साथ त्यागराज स्टेडियम के ट्रैक पर दिखाई दिए। इसके बाद आरोप लगा कि आईएएस अधिकारी के कुत्ते को घुमाने के लिए खिलाड़ियों को जल्दी प्रैक्टिस खत्म करनी पड़ती थी। हालांकि संजीव खिरवार ने इन आरोपों को खारिज किया इससे इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि वह कभी-कभी अपने पेट को स्टेडियम लेकर आते थे। लेकिन इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग प्रभावित नहीं होती थी। स्टेडियम प्रशासन ने भी कहा था कि खिलाड़ियों का निर्धारित जो ट्रेनिंग टाइम है मतलब कि जो तय ट्रेनिंग टाइम था शाम 7:00 बजे तक ही था। विवाद बढ़ा तो तत्कालीन दिल्ली सरकार ने सभी खेल सुविधाओं को रात 10:00 बजे तक खिलाड़ियों के लिए खुले रखने का निर्देश दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी से मामले पर रिपोर्ट मांगी। कुछ ही समय बाद संजीव खेरवार का ट्रांसफर लद्दाख और रिंकू दुगा का ट्रांसफर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया।
कंपलसरी रिटायरमेंट का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
7 अगस्त 2023 को रिंकू दुगा को कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया गया। रिंकू दुगा ने इसे कैट में चुनौती दी। 8 अगस्त 2025 को कैट ने सरकार का आदेश रद्द कर दिया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। 15 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने भी कैट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट की रीजनिंग भी काफी अहम थी। कोर्ट ने कहा कि रिव्यू कमेटी ने रिंकू दुग्गा के सर्विस रिकॉर्ड के कई अहम पहलुओं को ठीक से कंसीडर नहीं किया। उनके एपीएआर यानी कि एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट्स में एडवर्स रिमार्क नहीं था और कंपलसरी रिटायरमेंट से पहले के 5 सालों में उनकी ग्रेडिंग आउटस्टैंडिंग रही थी। कई डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटीज यानी कि डीपीसीएस ने भी उनकी इंटीग्रिटी को सर्टिफाइड माना था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपलसरी रिटायरमेंट का मकसद आमतौर पर ऐसे अधिकारियों को सर्विस से हटाना होता है जिन्हें सरकार आगे काम के लिए उपयोगी नहीं मानती। ऐसे अधिकारियों के लिए अक्सर डेड वुड शब्द इस्तेमाल किया जाता है। कोर्ट के मुताबिक रिंकू दुगा के मामले में रिव्यू कमेटी ने उनके रिकॉर्ड को बाकी अधिकारियों से अलग तरीके से स्क्रूटनाइज किया था। लेकिन इसका पर्याप्त कारण नहीं बताया गया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कंपलसरी रिटायरमेंट के फैसले को गलत माना और कैट के आदेश को बरकरार रखा।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
केंद्र सरकार यहीं नहीं रुकी। सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अब 7 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रिंकू दुगा की बहाली पर रोक लगा दी है। यानी अभी रिंकू दुगा की सरकारी सेवा में वापसी नहीं होगी। अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। अब सबकी नजर 13 अक्टूबर की सुनवाई पर है। उस दिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है उससे तय होगा कि रिंकू दुगा की सरकारी नौकरी में वापसी का रास्ता खुलता है या कंपलसरी रिटायरमेंट का फैसला बरकरार रहता है।
Continue reading on the app
तमिलनाडु के मंत्री आर. निर्मल कुमार ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख एम. के. स्टालिन को उनकी हिरासत के आधिकारिक आदेश की प्रति दिखाने की शनिवार को चुनौती दी और इस दावे पर सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री को आपातकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत जेल में रखा गया था। राज्य के ऊर्जा संसाधन एवं विधि मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को प्रताड़ना झेलने वाले नेता के रूप में पेश करने के द्रमुक के पुराने दावे को सही साबित करने वाला कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि द्रमुक अध्यक्ष को 1975-77 के आपातकाल के दौरान कड़े मीसा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
निर्मल कुमार ने 17 सितंबर को होने वाले श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों का निरीक्षण करने के बाद यहां संवाददाताओं से कहा कि मीसा के तहत हिरासत में लिए जाने के स्टालिन के दावे की पुष्टि करने वाले आधिकारिक आदेश की कोई प्रति मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हिरासत के आदेश की कोई प्रति नहीं है, मीसा के तहत कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।’’
उन्होंने विपक्षी द्रमुक पर स्टालिन को अपुष्ट ऐतिहासिक दावों के आधार पर राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार हुए नेता के रूप में पेश करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। कुमार ने कहा, ‘‘मूल सवाल यही है कि उन्हें मीसा के तहत हिरासत में लिया गया था या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी व्यक्ति को इस तरह के कानून के तहत गिरफ्तार किया जाता है तो उसकी हिरासत के औपचारिक आदेश की प्रति जरूर होती है।
क्या स्टालिन या द्रमुक के पास ऐसे किसी आदेश की प्रति है? ’’
मंत्री ने द्रमुक के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि करीब 40 साल से जारी इस विवाद को पार्टी जितनी बार उठाती है, उसे उतना ही नुकसान होता है। उन्होंने दावा किया कि उस समय स्टालिन को मीसा के बजाय संभवत: किसी अन्य कानूनी प्रावधान के तहत गिरफ्तार किया गया था।
निर्मल कुमार ने द्रमुक द्वारा सरकारिया आयोग से जुड़े पुराने दस्तावेजों या पार्टी के मुखपत्र ‘मुरासोली’ में प्रकाशित लेखों जैसे द्वितीयक दस्तावेजों पर भरोसा किए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि समाचार रिपोर्ट और गवाहों के बयान सरकारी हिरासत के आधिकारिक आदेश का विकल्प नहीं हो सकते। कुमार की ये टिप्पणियां तमिलनाडु विधानसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी तीखे टकराव के बीच आई हैं।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सरकारिया आयोग के दस्तावेजों का हवाला दिया था और मीसा के तहत गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए जबड़े से संबंधित एक इशारा किया था जिसके बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी हुई तथा अंततः द्रमुक विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया। स्टालिन ने हाल में एक वीडियो जारी कर जेल में रहने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए दावा किया था कि हिरासत के दौरान उन्हें बुरी तरह पीटा गया था और उनका जबड़ा टूट गया था।
निर्मल कुमार ने आगामी उपचुनावों का जिक्र करते हुए उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी द्रमुक और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने विशेष रूप से द्रमुक उम्मीदवार परंथमन की आलोचना करते हुए उन्हें ‘‘बाहरी व्यक्ति’’ बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पूर्व निर्वाचन क्षेत्र एग्मोर की सेवा नहीं की।
Continue reading on the app