ब्रिक्स समिट के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान ने पीएम मोदी से मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से लेकर भारत ईरान के रिश्तों और आगे के सहयोग पर विस्तार से बातचीत हुई। इस मुलाकात के बीच पेशकियान ने भारत से ईरान का रुख भी साफ शब्दों में दुनिया के सामने रखा। दरअसल पीएम मोदी से मुलाकात के कुछ ही देर बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में पहुंचे और यहां उन्होंने ईरान के रुख को लेकर बड़ा बयान दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका के साथ टकराव के बीच प्रिजिशियान ने साफ कहा कि ईरान दबाव और धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। पेजिशियान ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरान पर दबाव बनाने और उसके खिलाफ कारवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर दबाव बनाया जाएगा तो वो उसका जवाब देने के लिए तैयार है।
एक तरफ मोदी से मुलाकात के बाद जब प्रदेशान ब्रिक्स के कारोबारी मंच पर पहुंची तो वहां से उन्होंने अपने देश की स्थिति को लेकर बेहद सख्त संदेश दे दिया।न का बयान सिर्फ युद्ध और तनाव तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा मुद्दा उठाया। ईरानी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की पैरवी की और कहा कि दुनिया इस वक्त एक जटिल दौर से गुजर रही है और किसी देश के आर्थिक दबाव का असर दूसरे देशों के वैध व्यापार पर नहीं पड़ना चाहिए। विदेशान ने ब्रिक्स से ऐसा माहौल बनाने की अपील की जहां कई देश अपने वित्तीय ताकत या वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल कर दूसरे देश के वैध कारोबार को रोक ना सके। उनका जोर ब्रिक्स देशों के बीच आपसी आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और कारोबार में डॉलर पर निर्भरता कम करने पर रहा। कुल मिलाकर कर ईरान की मंशा साफ है। व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहिए। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति और पीएम मोदी की मुलाकात को अगर देखा जाए तो यह मुलाकात भारत मंडपम में हुई।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात प्रमुख मुद्दे में रहे। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी ने साफ कहा कि स्थाई शांति का रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। पीएम मोदी ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने और व्यापार की आवाजाही को जारी रखने पर भी जोर दिया। खासतौर पर समुद्र में काम करने वाले लोगों यानी सीफेरस की सुरक्षा को भारत की प्राथमिकता बताया गया। वहीं पीएम मोदी से मुलाकात के बाद प्रदेश के ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों नेताओं के बीच अच्छी चर्चा हुई और इसमें व्यापार तकनीक और संस्कृति के क्षेत्र में भारत ईरान सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। यानी भारत ने एक और शांति और बातचीत के रास्ते पर जोर दिया। जबकि ईरान ने साफ कर दिया कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। एक तरह से ईरान ने भारत में बैठकर अमेरिका को सीधा संदेश दे दिया।
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