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PM मोदी की सफल नीति…जो अरब में लड़ रहे जंग, वो BRICS में साझा कर रहे मंच, क्या खत्म होगा युद्ध?

दुनिया इस वक्त बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रही है. भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है. सप्लाई चेन बाधित है. आर्थिक प्रतिबंधों से राजनीतिक दबाव डालने की कोशिश से देशों के लिए हालात और खराब हो गए हैं.

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‘हनुमान अंश’ की शूटिंग के दौरान पहुंचा रहस्यमयी बंदर:मूर्ति स्थापना देखता रहा; भगवान दास बोले- लगा जैसे हनुमान जी खुद निगरानी कर रहे हों

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गोपाल का किरदार निभाकर अभिनेता भगवान दास पटेल इन दिनों दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर से मुंबई तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। थिएटर में छह साल बिताने के बाद उन्होंने टीवी और फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए। मुझसे फ्रेंडशिप करोगे, प्रेम रतन धन पायो, थार, रंगबाज और फोटोग्राफ जैसी फिल्मों और सीरीज का हिस्सा रहे भगवान दास ने दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म की शूटिंग के दिलचस्प किस्सों, करियर के संघर्ष और सफलता के बाद मिल रही लोगों की दुआओं पर बात की। सवाल: ‘हनुमान अंश’ में गोपाल का किरदार आपको कैसे मिला? जवाब: मुझे एक जानने वाले ने फिल्म के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि फिल्म नीम करौली बाबा पर बन रही है और गोपाल का किरदार है। पैसे ज्यादा नहीं थे, लेकिन किरदार अच्छा था। मैं निर्देशक विशाल सर से मिलने गया। वहां हनुमान जी की एक तस्वीर लगी थी, जिसमें नीम करौली बाबा ध्यान में बैठे थे। उस तस्वीर ने मेरा ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने कहानी सुनाई और मैंने एक-दो दिन बाद ऑडिशन दिया। मेरा एक ही ऑडिशन हुआ और मेरा चयन हो गया। सवाल: फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसा क्या हुआ, जिसे आप आज भी याद करते हैं? जवाब: शूटिंग के दौरान हम लोग हर दिन हनुमान चालीसा पढ़ते थे और गणेश जी की पूजा करते थे। कई मुश्किलें आती थीं, लेकिन किसी न किसी तरह सब ठीक हो जाता था। एक बार का किस्सा बहुत खास है। जब हम बजरंगबली की मूर्ति स्थापित करने वाला सीन शूट कर रहे थे, तभी एक काले मुंह वाला बंदर बरगद के पेड़ पर आकर बैठ गया। वह काफी देर तक देखता रहा कि मूर्ति कैसे स्थापित हो रही है। हमने उसे केले दिए, वह केले भी खाता रहा और शूटिंग भी देखता रहा। बाद में जब झोपड़ी बनाई जा रही थी, तब भी वह वहीं था। हमें लगा जैसे वह पूरी शूटिंग की निगरानी कर रहा हो। गांव वालों ने भी कहा कि उन्होंने करीब 13-14 साल बाद वहां ऐसा बंदर देखा है। सवाल: फिल्म में कौन-सा सीन आपको सबसे ज्यादा भावुक करता है? जवाब: ट्रेन वाला सीन मेरे दिल के बहुत करीब है। फिल्म में महाराज जी ट्रेन रोक देते हैं। अंग्रेज अधिकारी आते हैं और कहते हैं कि इनके पास टिकट नहीं है। फिर किसी तरह टिकट सामने आ जाती है। महाराज जी कहते हैं कि किसी साधु-संत को ट्रेन में बैठने से कभी मत रोको। इस पूरे सीन में गोपाल का महाराज जी के प्रति जुड़ाव बहुत गहरा है। उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वह भगवान का ही स्वरूप हैं। उस सीन को करते हुए मैं अंदर से बहुत भावुक हो गया था। सवाल: महाराज जी का किरदार निभाने वाले अभिनेता पहले से तय थे? जवाब : नहीं। पहले किसी दूसरे अभिनेता के साथ एक दिन शूट हो चुका था, लेकिन अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद नए अभिनेता की तलाश शुरू हुई। उसी दौरान शोभिनव, जो निर्देशन टीम में थे, उनके साथ मेरी रीडिंग हुई। मैंने उन्हें पहली बार ठीक से तब देखा। उनका चेहरा बाबा के किरदार के लिए बिल्कुल सही लगा। हमने कई सीन की रिहर्सल की और उन्होंने बहुत जल्दी किरदार पकड़ लिया। बाद में पता चला कि वह लखनऊ में थिएटर कर चुके हैं। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई भी की है। मुझे लगा कि शायद यह किरदार उन्हीं के लिए था। सवाल: शूटिंग के दौरान कभी लगा कि फिल्म पूरी नहीं हो पाएगी? जवाब: कई बार मुश्किलें आईं। कलाकारों के आने-जाने में दिक्कत हुई, जनरेटर और दूसरी व्यवस्थाओं की परेशानी हुई, बारिश की वजह से शूटिंग रुकी। करीब 24-25 दिन हम चित्रकूट में रहे। लेकिन विशाल सर (विशाल चतुर्वेदी-डायरेक्टर) बहुत स्पष्ट और आत्मविश्वासी थे। उन्हें पता था कि फिल्म पूरी करनी है। इसलिए किसी न किसी तरह शूट आगे बढ़ता रहा। सवाल: फिल्म की सफलता के बाद आपकी जिंदगी कितनी बदली है? जवाब: बहुत ज्यादा। ऐसा जीवन मैंने पहले कभी नहीं देखा था। पिछले कुछ दिनों से लगातार फोन और संदेश आ रहे हैं। लोग इतनी अच्छी दुआएं और शुभकामनाएं दे रहे हैं कि कई बार मैं भावुक हो जाता हूं। सबसे अच्छी बात यह है कि बहुत से लोग मुझे जानते तक नहीं, फिर भी मेरे लिए दुआ कर रहे हैं। मैं कोशिश करता हूं कि जितने लोगों को जवाब दे सकता हूं, उन्हें धन्यवाद दूं। सवाल: आपके करियर की शुरुआत कैसे हुई? जवाब: बचपन से ही अभिनय में रुचि थी। उस समय मोबाइल नहीं था, रेडियो सुनता था। कलाकारों के इंटरव्यू आते थे, मैं उनकी बातें डायरी में लिखता था। मुंबई के कई स्कूलों के पते भी जुटाता था और कलाकारों को चिट्ठियां लिखता था कि मुझे मौका दें। किसी का जवाब नहीं आया, लेकिन सपना बना रहा। 12वीं के बाद मैंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के बारे में पता किया। उसके लिए थिएटर के अनुभव की जरूरत थी। मेरे गुरु अरुण पांडे जी ने मुझे रंगमंडल से जोड़ा। इसके बाद करीब छह साल थिएटर किया। दो बार NSD की कोशिश की, लेकिन चयन नहीं हुआ। बाद में लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी में प्रवेश मिल गया। सवाल: मुंबई आने के बाद पहला काम कैसे मिला? जवाब: मुंबई आने के करीब डेढ़ महीने बाद मुझे टीवी सीरियल ‘देवी’ में बुंदेली भाषा के संवाद और बोली पर काम मिला। मेरे सीनियर राम मेहर झांगड़ा ने मुझे मिलवाया था। मैं कलाकारों को बुंदेली के शब्द और बोलने का तरीका बताता था। बाद में उसी सीरियल में छोटा-सा किरदार भी किया। सवाल: इसके बाद किन फिल्मों में काम किया? जवाब: मुझसे फ्रेंडशिप करोगे में ऑटो ड्राइवर का किरदार किया। फिर प्रेम रतन धन पायो में रामलीला के सीन में कैकेयी का किरदार निभाया। इसके बाद शादिस्तान और थार जैसी फिल्मों में काम किया। रंगबाज में गज्जू का किरदार किया। फोटोग्राफ में कुल्फी वाले का छोटा-सा किरदार था। उस किरदार की तैयारी के लिए मैं करीब 10-15 दिन जुहू में कुल्फी बेचने वालों के साथ घूमता था और देखता था कि वे किस तरह कुल्फी बेचते हैं। सवाल: कभी लगा कि अभिनय छोड़कर घर लौट जाना चाहिए? जवाब: हिम्मत कई बार टूटी, लेकिन कभी यह विचार नहीं आया कि अभिनय छोड़ दूं। मुझे इसके अलावा कुछ आता भी नहीं है। मैंने ड्रामा पढ़ाने की कोशिश की, दूसरे काम किए, नुक्कड़ नाटक भी किए, लेकिन अभिनय से जुड़ा रहा। मेरा मानना है कि इंसान को वही काम करना चाहिए, जिसमें उसे खुशी मिलती है। सफल हों या असफल, अपने मन का काम करने में एक अलग संतोष है। सवाल: ‘हनुमान अंश’ के बाद अब आगे क्या? जवाब: अभी कुछ प्रोजेक्ट्स पर बातचीत चल रही है। जबलपुर में शूट की गई एक फिल्म आने वाली है। एक शॉर्ट फिल्म है, जो फिल्म समारोहों में जा रही है। मेट्रो सिटी नाम का डॉक्यू-ड्रामा भी है। अभी मैं बस अच्छे काम का इंतजार कर रहा हूं। हनुमान अंश के बाद लोगों का प्यार मिला है, इसलिए उम्मीद है कि आगे भी अच्छा काम मिलेगा। _______________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. हनुमान अंश का कलेक्शन होगा 200 करोड़ पार:33वें दिन सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बनी, धुरंधर, 3 इडियट्स, पठान से आगे; जानिए रिकॉर्ड्स हनुमान अंश ने रिलीज के 33वें दिन मंगलवार को ₹11.00 करोड़ का कलेक्शन किया है। फिल्म की कमाई सोमवार के ₹10.00 करोड़ के मुकाबले 10% बढ़ी। इसके साथ महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश 33वें दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। इसने आमिर-शाहरुख की फिल्मों को भी पछाड़ दिया है।पूरी खबर पढ़ें..

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  Sports

न बाउचर न धोनी, गिलक्रिस्ट भी नहीं, टेस्ट में एक साल में सबसे ज्यादा शिकार करने वाला विकेटकीपर कौन? 2016 से कायम रिकॉर्ड

most dismissals in a single calendar year by wicket keeper: इंग्लैंड के जॉनी बेयरस्टो पिछले 10 साल से इस रिकॉर्ड पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं. उन्होंने 2016 में कुल 17 टेस्ट मैच में कुल 70 बल्लेबाजों को विकेट के पीछे से आउट किया. इनमें 66 कैच और 4 स्टंपिंग शामिल रहीं. बेयरस्टो ने मार्क बाउचर का रिकॉर्ड ध्वस्त करके नया कीर्तिमान बनाया. Sat, 12 Sep 2026 08:01:02 +0530

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