Dhurandhar Movie: 'ये कोई कहानी है?' 3000 करोड़ कमाने वाली 'धुरंधर' पर तिग्मांशु धूलिया ने उठाए सवाल
Tigmanshu Dhulia: रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके दूसरे भाग ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने दर्शकों के बीच खूब चर्चा बटोरी है। बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करने वाली इस फ्रेंचाइजी को लेकर अब फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया ने अपनी राय रखी है। उन्होंने फिल्म के पहले भाग के प्रेजेंटेशन और मनोरंजन की तारीफ की, लेकिन इसकी कहानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
तिग्मांशु को पसंद आई ‘धुरंधर’, पर कहानी पर दी राय
हाल ही में एक कार्यक्रम में तिग्मांशु धूलिया ने मौजूदा दौर की फिल्मों और उनके कंटेंट पर बात की। इसी दौरान उन्होंने ‘धुरंधर’ का भी जिक्र किया। धूलिया ने कहा कि अब कॉर्पोरेट कल्चर है और उसी तरह की फिल्में बन रही हैं। उन्होंने बताया कि सभी मेनस्ट्रीम कमर्शियल फिल्में काल्पनिक बायोपिक होती हैं और इसके लिए पुष्पा, केजीएफ और धुरंधर का उदाहरण दिया।
उन्होंने 'धुरंधर पार्ट 1' की तारीफ करते हुए इसे 'बहुत अच्छे से पेश की गई और बहुत दिलचस्प' फिल्म बताया। उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अगर आप किसी से 'धुरंधर' की कहानी बताने को कहें, तो कोई भी आपको कहानी नहीं बता पाएगा। एक आदमी, जो अंडरकवर है, पाकिस्तान जाता है और वहां तहलका मचा देता है। क्या यह भी कोई कहानी है?"
???? Tigmanshu Dhulia on Dhurandhar
— Tilu Badmosh 12 (@tilubadmosh12) September 8, 2026
Praises its presentation & music but questions its depth: “An undercover spy goes to Pakistan and causes havoc… is that really a story?” ????
He says corporate pressure is killing original storytelling. Do you agree? ????#TigmanshuDhulia pic.twitter.com/XsAFKrzHzs
तिग्मांशु धूलिया ने कहानी की कमी पर सवाल उठाए
नेशनल अवॉर्ड जीत चुके तिग्मांशु ने कहा कि आजकल की फिल्मों में कहानियां नहीं होतीं। उन्होंने आगे कहा, "अब ऐसे लोग नहीं रहे जो कहानियां सुना सकें, और जो लोग अपनी कहानियां सुनाना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं मिलता। लोगों को लगता है कि ऐसी फिल्में 'नहीं चलेंगी'।"
बॉक्स ऑफिस पर सफल रही ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी
आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी इस साल की चर्चित फिल्मों में रही है। पहला पार्ट दिसंबर में रिलीज हुआ था और दर्शकों के बीच इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद मार्च में ‘धुरंधर: द रिवेंज’ सिनेमाघरों में पहुंची और बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए।
फिल्म की सफलता के बीच तिग्मांशु धूलिया की यह टिप्पणी खास चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने फिल्म की प्रस्तुति को सराहा है, लेकिन कहानी के मूल ढांचे पर सवाल उठाया है।
तिग्मांशु धूलिया की ‘घमासान’ भी जल्द होगी रिलीज
तिग्मांशु धूलिया बतौर निर्देशक ‘हासिल’, ‘पान सिंह तोमर’ और ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। अब वह अपनी अगली फिल्म ‘घमासान’ की रिलीज को लेकर चर्चा में हैं।
Sonu Sood: सत्य निकेतन हादसे पर सोनू सूद बोले- छात्रों को PG के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं, सरकार उठाए कदम
Sonu Sood: दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना ने छात्रों की सुरक्षा और उनके रहने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद अभिनेता सोनू सूद ने सरकार से छात्रों के लिए सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल बनाने की अपील की है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई इस घटना में कई लोगों की जान गई। बिल्डिंग में पीजी चल रहा था और हादसे के समय वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सोनू सूद ने कहा कि दूसरे शहरों में पढ़ने जाने वाले छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह देना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
31 में से सिर्फ 1 छात्र को हॉस्टल
सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर दिल्ली में हॉस्टल की कमी का आंकड़ा बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 7 लाख छात्र पढ़ते हैं, जबकि हॉस्टल में सिर्फ 30 हजार सीटें उपलब्ध हैं। यानी करीब 31 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र को ही हॉस्टल मिल पाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी या किराए के कमरों में रहना पड़ता है।
खाली सरकारी जमीन पर बनें हॉस्टल
Every year, lakhs of students leave their homes to chase a dream in another city. But are we giving them a safe place to live?
— sonu sood (@SonuSood) September 8, 2026
In Delhi, around 7 lakh students are enrolled, while hostel capacity is barely 30,000 — just 1 in 31 gets a hostel.
Why not identify vacant government…
सोनू सूद ने सरकार को सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी के आसपास खाली पड़ी सरकारी जमीन की पहचान की जाए। इन जगहों पर छात्रों के लिए सुरक्षित और कम कीमत वाले हॉस्टल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी को कैंपस में अतिरिक्त हॉस्टल बनाने के लिए निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इससे छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह मिलेगी और उनके परिवारों की चिंता भी कम होगी।
छोटा बदलाव बचा सकता है जिंदगी
सोनू ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी राहत मिलेगी। वहीं, यूनिवर्सिटी और सरकार के लिए भी यह कमाई का जरिया बन सकता है। उन्होंने कहा कि नीति में किया गया छोटा सा बदलाव किसी छात्र की जिंदगी और उसके बड़े सपने को बचा सकता है।
पीजी में रहने को मजबूर छात्र
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों में हॉस्टल की सीमित सीटों के कारण बाहर से आने वाले छात्रों को निजी पीजी का सहारा लेना पड़ता है। मांग ज्यादा होने के कारण राजधानी में पीजी का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। सत्य निकेतन की घटना के बाद अब इन पीजी में सुरक्षा व्यवस्था और इमारतों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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