India Joins Global 6G Alliance: ग्लोबल 6G पहल से जुड़ा भारत; अमेरिका समेत 25 देश मिलकर तय करेंगे अगली पीढ़ी की तकनीक की दिशा
भविष्य की वैश्विक दूरसंचार व्यवस्था को सुरक्षित, टिकाऊ और विश्वसनीय बनाने के लिए 25 देशों का एक शक्तिशाली गठबंधन सामने आया है। अमेरिका के नेतृत्व में शुरू हुई इस साझा पहल में भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के मानक तय करने वाला प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है।
भारत का सुरक्षित, खुले और किफायती नेटवर्क पर जोर
इस अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का मुख्य उद्देश्य 6G तकनीक के शोध, विकास और अंतरराष्ट्रीय मानकों का निर्माण करना है। गठबंधन में शामिल सभी देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि अगली पीढ़ी का 6G नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित, विश्वसनीय, पर्यावरण के अनुकूल और वैश्विक स्तर पर सुलभ होना चाहिए। इसमें ओपन-सॉस आर्किटेक्चर और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
भारत में 6G विजन और वैश्विक हिस्सेदारी
भारत ने पहले ही 'भारत 6G मिशन' का रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसके तहत देश में 2030 तक 6G सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। वैश्विक गठबंधन में शामिल होने से भारतीय वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और टेलीकॉम कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने, पेटेंट दर्ज कराने और दुनिया के शीर्ष देशों के साथ तकनीकी आदान-प्रदान करने का बड़ा अवसर मिलेगा।
अर्थव्यवस्था और तकनीकी संप्रभुता को मिलेगा बढ़ावा
6G तकनीक केवल मोबाइल इंटरनेट की गति बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ऑटोमेटेड व्हीकल्स और स्मार्ट सिटीज जैसे आधुनिक क्षेत्रों का मुख्य आधार बनेगी। इस गठबंधन के जरिए भारत अपनी तकनीकी संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को मजबूत करते हुए वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।
15 सितंबर से बंद हो सकता है दुकानदारों का UPI:RBI से री-केवाईसी की डेडलाइन बढ़ाने की मांग; 10 लाख छोटे कारोबारियों पर संकट
ऑनलाइन पेमेंट लेने में मदद करने वाली कंपनियों ने रिजर्व बैंक से दुकानदारों की री-केवाईसी के लिए तय 15 सितंबर की समयसीमा को आगे बढ़ाने की अपील की है। वजह यह है कि देश के लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का वेरिफिकेशन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अगर RBI ने री-केवाईसी की आखिरी तारीख नहीं बढ़ाई, तो लाखों दुकानदारों का ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम बंद हो सकता है। इससे जब आप दुकानों, ठेलों या ऑनलाइन कोई सामान खरीदेंगे, तो UPI या कार्ड से पैसे भेजने में दिक्कत आएगी और डिजिटल पेमेंट की सर्विस ठप हो सकती है। मामले के हर पहलू को 10 सवाल-जवाब में जानिए… सवाल 1: मामला क्या है और पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI से क्या मांग की है? जवाब: पेटीएम-फोनपे जैसी ऑनलाइन पेमेंट कंपनियों का कहना है कि देश भर में लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। 15 सितंबर तक की समयसीमा में काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, इसलिए इसे बढ़ा दिया जाए। सवाल 2. अगर डेडलाइन नहीं बढ़ती है, तो इसका क्या असर होगा? अगर RBI समय नहीं बढ़ाता है, तो दुकानों और ऑनलाइन खरीदारी के दौरान पेमेंट अटक सकती है। जिन दुकानदारों की री-केवाएसी 15 सितंबर तक पूरी नहीं हो पाएगी, उनके मर्चेंट अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जा सकते हैं। सवाल 3. कितने मर्चेंट्स पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है? जवाब: रिपोर्ट्स के मुताबिक, QR कोड का इस्तेमाल करने वाले लगभग 30% से 35% छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा लगभग 10 लाख छोटे ऑनलाइन बिजनेसेज का भी पेमेंट सिस्टम बंद हो सकता हैं। सवाल 4. ऑफलाइन मर्चेंट्स के वेरिफिकेशन में क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं? जवाब: पेटीएम-फोनपे जैसी कंपनियों के पास छोटे शहरों और गांवों में लाखों की संख्या में साउंड बॉक्स और QR स्टेंडी लगे हुए हैं। इनमें से कई छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता हैं, जिनके पास पूरे पक्के दस्तावेज नहीं हैं। सख्त नियमों और मौके पर जाकर जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) करने की शर्त के कारण इन तक पहुंचना और डॉक्युमेंट्स जुटाना काफी कठिन हो रहा है। सवाल 5. री-केवाईसी क्या है और यह क्यों जरूरी है? जवाब: KYC का मतलब है कि ग्राहक या दुकानदार की पहचान और पते की जांच करना। री-KYC का मतलब है उसी जांच को समय-समय पर दोबारा अपडेट करना। धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और काले धन के लेन-देन को रोकने के लिए सरकार दुकानदारों के कागजात फिर से चेक कराती है, ताकि पेमेंट सिस्टम सुरक्षित रहे। सवाल 6. यह बैकलॉग की स्थिति क्यों बनी, नियम कब लागू हुए थे? जवाब: RBI ने सितंबर 2025 में ही पेमेंट कंपनियों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी कर दी थीं। कंपनियों और दुकानदारों के पास 1 साल का समय था, लेकिन आखिरी समय तक काम टालने की आदत के कारण अचानक इतना बैकलॉग इकट्ठा हो गया। सवाल 7. कंपनियों को वेरिफिकेशन में कर्मचारियों की क्या समस्या आ रही है? जवाब: RBI के नियमानुसार, दुकान पर जाकर वेरिफिकेशन पेमेंट कंपनी का अपना पक्का कर्मचारी ही करेगा, इसे किसी बाहरी प्राइवेट एजेंसी से नहीं कराया जा सकता।कंपनियों ने नए कर्मचारी तो रखे हैं, लेकिन दुकानदारों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उनके स्टाफ की संख्या कम पड़ रही है। सवाल 8. क्या डेडलाइन तक पूरा काम खत्म होने की कोई संभावना है? जवाब: नहीं। ज्यादातर पेमेंट कंपनियों का मानना है कि वे 15 सितंबर की तारीख तक सिर्फ 80% प्रक्रिया ही पूरी कर पाएंगी। बाकी 20% दुकानदारों का काम पूरा करने के लिए उन्हें और समय की जरूरत होगी। सवाल 9. क्या इससे देश के कुल डिजिटल पेमेंट्स पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा? जवाब: भले ही प्रभावित होने वाले छोटे दुकानदारों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन कुल डिजिटल पेमेंट के लेनदेन में इनकी हिस्सेदारी काफी कम है। इसलिए देश के ओवरऑल पेमेंट सिस्टम पर बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा, हालांकि आम लोगों की दैनिक खरीदारी और छोटे कारोबारियों की बिक्री पर असर जरूर दिखेगा। सवाल 10. पेमेंट इंडस्ट्री को RBI से क्या उम्मीद है? जवाब: पेमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि RBI उन्हें थोड़ी राहत जरूर देगा। कंपनियों का कहना है कि RBI व्यावहारिक दिक्कतों को समझता है और उम्मीद है कि वह पेमेंट इकोसिस्टम में बिना किसी रुकावट के बदलाव के लिए समयसीमा बढ़ा देगा। जानें क्या है पेमेंट एग्रीगेटर और Re-KYC?
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