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England Tour पर विवादों के बीच Pak Batter's के बचाव में उतरे Coach Michael Smith

पाकिस्तान की टीम के लिए इंग्लैंड दौरा लगातार मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन बल्लेबाजी कोच माइकल स्मिथ का मानना है कि टीम के भीतर माहौल अभी भी अच्छा है। उन्होंने युवा बल्लेबाजों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में खुद को ढालने के लिए समय देना जरूरी है।

पाकिस्तान के लिए इंग्लैंड का दौरा भले ही लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा हो, लेकिन टीम के बल्लेबाजी कोच माइकल स्मिथ को युवा खिलाड़ियों की क्षमता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि टीम के भीतर माहौल अच्छा है और खिलाड़ियों को मुश्किल दौर से सीखने का मौका दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान की टीम इस श्रृंखला में अब तक पांच पारियों में एक बार भी 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी है।

बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेले जा रहे तीसरे और अंतिम टेस्ट में भी पाकिस्तान की स्थिति आसान नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इंग्लैंड की पहली पारी के विशाल स्कोर के जवाब में पाकिस्तान ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक दो विकेट पर 52 रन बनाए थे। उसे इंग्लैंड को दोबारा बल्लेबाजी के लिए बुलाने से पहले 268 रन और बनाने हैं। ऐसे में टीम के सामने पहली चुनौती अपनी पारी को लंबे समय तक संभालने की है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान का यह दौरा मैदान के बाहर भी विवादों से घिरा रहा है। लॉर्ड्स में हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सात खिलाड़ियों को वापस बुला लिया था। मुख्य कोच सरफराज अहमद को भी स्वदेश लौटने के लिए कहा गया। इसके अलावा कुछ खिलाड़ियों के आचरण को लेकर जांच शुरू किए जाने की बात सामने आई थी।

माइकल स्मिथ ने जांच से जुड़े सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि बल्लेबाजी को लेकर उन्होंने माना कि पाकिस्तान इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मौजूदा शीर्ष सात बल्लेबाजों में सिर्फ बाबर आजम और शान मसूद पहले इंग्लैंड का दौरा कर चुके हैं।

स्मिथ के मुताबिक पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने कई मौकों पर अच्छी शुरुआत की है, लेकिन वे उसे लंबी पारी में बदल नहीं पाए। उन्होंने सऊद शकील, अज़ान अवैस और शान मसूद का उदाहरण देते हुए कहा कि खिलाड़ियों को कुछ घंटों तक क्रीज पर टिककर अपनी योजना के मुताबिक बल्लेबाजी करना सीखना होगा। केवल आधे सत्र तक अच्छा खेलना पर्याप्त नहीं है।

युवा खिलाड़ियों के बचाव में स्मिथ ने कहा कि कुछ के लिए यह इंग्लैंड का पहला दौरा है और उनके पास टेस्ट क्रिकेट का अनुभव भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में सीखने का समय मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सही आकलन तब किया जाना चाहिए, जब वे भविष्य में दोबारा ब्रिटेन का दौरा करें और इन परिस्थितियों से परिचित हो चुके हों।

बता दें कि इंग्लैंड की तेज और अनुशासित गेंदबाजी इकाई ने इस श्रृंखला में पाकिस्तान के बल्लेबाजों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी की है। घरेलू परिस्थितियों में इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाया है। स्मिथ ने भी माना कि पाकिस्तान को एक मजबूत गेंदबाजी आक्रमण का सामना करना पड़ रहा है।

इसके बावजूद उनका कहना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी दौरे का आनंद ले रहे हैं और एक समूह के रूप में सकारात्मक बने हुए हैं। स्मिथ के अनुसार टीम में कई प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं और उनकी क्षमता काफी ऊंची है। बल्लेबाजी कोच के रूप में उन्हें इस टीम के साथ काम करने की बड़ी चुनौती दिखाई देती है, लेकिन वह इसे रोमांचक अवसर भी मानते हैं।

स्मिथ को इस श्रृंखला से ठीक पहले पाकिस्तान का बल्लेबाजी कोच बनाया गया था। उन्होंने कहा कि टीम में किसी बड़े ढांचागत बदलाव की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला करने के लिए उन्हें अभी और समय चाहिए। खासकर विदेशों में खेलने के दौरान बल्लेबाजों को किस तरह तैयार किया जाए, इस पर आगे काम करना होगा।

फिलहाल पाकिस्तान की सबसे बड़ी जरूरत एजबेस्टन टेस्ट में अपनी दूसरी पारी को मजबूत करना है। पांच पारियों में 200 रन तक नहीं पहुंच पाने के बाद बल्लेबाजों के सामने इस बार लंबी साझेदारियां बनाने और दबाव झेलने की बड़ी परीक्षा है। अगर पाकिस्तान चौथी पारी में इंग्लैंड को बल्लेबाजी के लिए मजबूर करना चाहता है, तो उसे पहले अपनी मौजूदा पारी को संभालते हुए बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा। ये युवा बल्लेबाजों के लिए खुद को साबित करने और टीम का भरोसा वापस हासिल करने का अहम मौका है।

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MS Dhoni Mentorship: झारखंड क्रिकेट का नया दौर, दलीप ट्रॉफी जीत से बढ़ी उम्मीदें

घरेलू क्रिकेट से काफी पहले दूरी बना चुके धोनी अब भी रांची में युवा खिलाड़ियों के बीच नजर आते हैं और अपने अनुभव से उन्हें खेल की बारीकियां समझाते हैं। पूर्वी क्षेत्र की दलीप ट्रॉफी जीत ने झारखंड के उभरते क्रिकेट ढांचे की ताकत को भी सामने ला दिया है।

झारखंड क्रिकेट के लिए पूर्वी क्षेत्र की दलीप ट्रॉफी जीत सिर्फ एक खिताब नहीं है, बल्कि राज्य से निकल रही नई क्रिकेट प्रतिभाओं की बढ़ती ताकत का संकेत भी है। पूर्वी क्षेत्र ने गुरुवार को 2012 के बाद पहली बार दलीप ट्रॉफी अपने नाम की। इस सफलता में झारखंड के कई युवा खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई और उनके प्रदर्शन के पीछे महेंद्र सिंह धोनी की सलाह और अनुभव भी चर्चा में आया है।

कप्तान ईशान किशन ने फाइनल में दोनों पारियों को मिलाकर 350 से ज्यादा रन बनाए और टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उनके अलावा शिखर मोहन, कुमार कुशाग्र, मोहम्मद क़ुनैन कुरैशी और अनुकूल रॉय ने भी अभियान के दौरान महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि यह पूरी तरह पूर्वी क्षेत्र की सामूहिक सफलता थी। बंगाल से मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन, सुदीप घरामी और शाहबाज अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने टीम को मजबूती दी। बिहार के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने भी सेमीफाइनल में टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक लगाकर सुर्खियां बटोरीं।

गौरतलब है कि झारखंड क्रिकेट से जुड़े लोगों के मुताबिक धोनी अब भी राज्य की क्रिकेट व्यवस्था पर करीबी नजर रखते हैं। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ के सचिव और पूर्व भारतीय खिलाड़ी सौरभ तिवारी ने बताया कि जब भी धोनी रांची में होते हैं और उनके पास समय होता है, वह खुद क्रिकेट मैदान पहुंचते हैं। ट्रेनिंग कैंप के दौरान वह युवा और अनुभवी खिलाड़ियों से बातचीत करते हैं और उन्हें अपनी बातें समझाते हैं।

सौरभ तिवारी के अनुसार, धोनी कई बार यह भी बताते हैं कि किन खिलाड़ियों पर नजर रखनी चाहिए। खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान वह सिर्फ तकनीक की बात नहीं करते, बल्कि उन्हें खेल को पढ़ने और परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेने की सलाह देते हैं। शीर्ष स्तर पर सफलता के लिए यह मानसिक समझ काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बता दें कि झारखंड के पूर्व खिलाड़ी ईशांक जग्गी, जो अब राज्य की 23 वर्ष से कम आयु की टीम के कोच हैं, भी धोनी के प्रभाव को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके मुताबिक धोनी झारखंड से भारतीय टीम तक पहुंचने वाले पहले बड़े खिलाड़ी थे, जिन्होंने राज्य के युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि छोटे क्रिकेट केंद्र से आने वाले खिलाड़ी भी देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच सकते हैं।

जग्गी ने कहा कि रांची में रहने के दौरान धोनी मैदान पहुंचते हैं और खिलाड़ी तथा प्रशिक्षक उनसे अलग-अलग परिस्थितियों पर सलाह लेते हैं। पुरुषों के साथ महिला टीम के खिलाड़ियों को भी उनके अनुभव का फायदा मिलता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, झारखंड की यह प्रगति सिर्फ दलीप ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। पिछले साल ईशान किशन की अगुवाई में टीम ने पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी भी जीती थी। राज्य के पूर्व खिलाड़ी अब प्रशिक्षण, चयन और प्रशासन से जुड़कर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

ऐसे में धोनी झारखंड क्रिकेट के लिए सिर्फ अतीत की बड़ी पहचान नहीं, बल्कि नई पीढ़ी और भारतीय क्रिकेट के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। ईशान किशन, कुमार कुशाग्र, शिखर मोहन, अनुकूल रॉय और मोहम्मद क़ुनैन कुरैशी जैसे खिलाड़ियों का उभरना बताता है कि झारखंड का अगला क्रिकेट अध्याय काफी मजबूत होने की उम्मीद हैं।
Fri, 11 Sep 2026 21:42:00 +0530

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