धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से अलग रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। यह सम्मेलन राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में 12 से 13 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। पीएम मोदी और पुतिन के बीच यह बैठक बहुत अहम थी, क्योंकि इससे नई दिल्ली और मॉस्को को अपने रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने का एक और मौका मिला। पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली के पालम एयर फ़ोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत का यह पुतिन का दूसरा दौरा था। प्रधानमंत्री मोदी आज बाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की बात करें तो, भारत ने इस साल के लिए "लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" को अपनी थीम के तौर पर चुना है। 12-13 सितंबर को होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्यों के बीच सहयोग को गहरा करने और समूह की व्यापक आर्थिक और विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रम्प प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है।
शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में पुतिन, पेज़ेशकियन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली और वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं।
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मिस्टर सिंह अमेरिका छोड़ दो नहीं तो अंजाम भुगतो। अमेरिका की यह धमकी क्या सिर्फ भारतीयों के लिए है? जिस अमेरिका को पीएम मोदी अपना दोस्त कहते हैं। क्या वो भारतीयों को निशाना बनाने में जुट गया है?
क्या ट्रंप सभी भारतीयों को अमेरिका से बाहर निकालने का प्लान बना रहे हैं? ट्रंप सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कारवाई करते हुए सीधे भारतीयों को निशाना बनाया। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यानी कि डीएचएस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में एक भारतीय मूल के व्यक्ति को दिखाया गया और उसे मिस्टर सिंह कहकर अमेरिका छोड़ने की चेतावनी दी गई। पोस्ट में लिखा था सेल्फ डिपोर्ट और फाइंड आउट यानी खुद अमेरिका छोड़ दो वरना अंजाम भुगतो। लेकिन विवाद सिर्फ इस लाइन को लेकर नहीं हुआ। पोस्ट में आगे लिखा गया गेट ऑफ आवर रोड्स यू डोंट नो हाउ टू ड्राइव मिस्टर सिंह। यानी कि मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हट जाओ। तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती। इसके बाद डीएचएस ने एक वीडियो भी पोस्ट किया।
भारतीय मूल के दंपती ने 2 करोड़ डॉलर दिए
भारतीय मूल के अनुराधा और विकास सिन्हा ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सस को 20 मिलियन डॉलर दान दिए है। उनके सम्मान में यूनिवर्सिटी नया 'अनुराधा एड विकास सिन्हा कॉलेज ऑफ आर्टिफिशल इंटेलिजेस एड अडवास्ड एनालिटिक्स' बनाएगी। दोनो भारत में सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। विकास ब्रॉडकॉम में वरिष्ठ अधिकारी है।
हिंदू अमेरिकन संगठन ने बताया नस्लवादी
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी एचएएफ ने डीएचएस पर आरोप लगाया कि सिंह सरनेम का इस्तेमाल करके भारतीयों और सिखों को निशा निशाना बनाया गया है। संगठन का कहना है कि सिख सिर्फ सिख ही नहीं लगाते सिंह बल्कि बड़ी संख्या में भारतीयों का सरनेम है यह और अमेरिका में सिख सरनेम वाले लोग अमेरिकी समाज का हिस्सा हैं। एचएफ ने इस पोस्ट को नस्ल भेदी और अमेरिका विरोधी बताया और कहा कि एक सरकारी एजेंसी की तरफ से इस तरह का पोस्ट किया जाना बहुत ही गंभीर मामला है। संगठन ने इसकी जांच की भी मांग की है। सिख कोलेशन ने भी इस पोस्ट की आलोचना की।
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