न रोजे रखते न ही नमाज पढ़ते, कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान पंचम, क्यों बंटोर रहे सुर्खियां?
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इन दिनों भारत दौरे पर हैं और उनकी मुलाकातें देश की राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है. इन बैठकों में स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे मुद्दों पर भारत और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (AKDN) के बीच सहयोग को लेकर चर्चा हुई.
प्रिंस रहीम का भारत दौरा केवल एक धार्मिक नेता की यात्रा नहीं है. वह दुनिया के एक बड़े विकास नेटवर्क का नेतृत्व भी करते हैं, जिसके भारत समेत कई देशों में सामाजिक विकास और विरासत संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम चलते हैं.
कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान पंचम?
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम का जन्म 12 अक्टूबर 1971 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुआ था. वह प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ के बेटे हैं. उनके पिता निज़ारी इस्माइली समुदाय के 49वें इमाम थे.
4 फरवरी 2025 को अपने पिता के निधन के बाद प्रिंस रहीम को इस्माइली समुदाय का 50वां इमाम घोषित किया गया. इस पद के साथ उन्हें समुदाय के आध्यात्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली. वह आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के अध्यक्ष भी हैं.
उनकी शुरुआती शिक्षा अमेरिका की फिलिप्स अकादमी एंडोवर में हुई. इसके बाद उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और स्पेन के IESE बिजनेस स्कूल से प्रबंधन और प्रशासन का अध्ययन किया.
करीब 1.5 करोड़ अनुयायियों के आध्यात्मिक नेता
प्रिंस रहीम निज़ारी इस्माइली मुसलमानों के आध्यात्मिक नेता हैं. इस समुदाय की मौजूदगी दुनिया के 25 से अधिक देशों में बताई जाती है. इसके अनुयायी दक्षिण और मध्य एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं.
इस्माइली समुदाय शिया इस्लाम की इस्माइलिया परंपरा से जुड़ा है. इसके अनुयायी इमामत की परंपरा को धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. निज़ारी इस्माइलियों के लिए वर्तमान इमाम आध्यात्मिक मार्गदर्शन का केंद्रीय स्रोत होते हैं.
यही वजह है कि आगा खान का पद केवल सामाजिक या संगठनात्मक नेतृत्व तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि उनके अनुयायियों के लिए इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी है.
इस्माइली मुसलमान कौन होते हैं?
इस्माइली शिया इस्लाम की एक शाखा है. इसके उदय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सातवीं शताब्दी में इमाम जाफर अल-सादिक के उत्तराधिकारी को लेकर हुए मतभेद से जुड़ी है.
इस्माइली परंपरा में उनके बेटे इस्माइल को उत्तराधिकारी माना गया और आगे चलकर इसी परंपरा से इस्माइलिया समुदाय विकसित हुआ. भारत में इस्माइली समुदाय की प्रमुख परंपराओं में निज़ारी इस्माइली और मुस्तली इस्माइली शामिल हैं. बोहरा समुदाय मुस्तली परंपरा से जुड़ा है, जबकि भारत में खोजा समुदाय का संबंध मुख्य रूप से निज़ारी इस्माइली परंपरा से रहा है.
क्या इस्माइली मुसलमान रोजा और नमाज नहीं पढ़ते?
प्रिंस रहीम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा चर्चा में रहता है कि इस्माइली मुसलमान न तो पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं और न ही रमजान में रोजा रखते हैं. लेकिन इसे इस तरह कहना सही नहीं होगा कि इस समुदाय में इस्लामी इबादत का कोई स्थान नहीं है.
निज़ारी इस्माइली परंपरा में धार्मिक प्रार्थना और आध्यात्मिक अनुशासन की अपनी विशिष्ट विधियां हैं. उनकी धार्मिक प्रथाएं दूसरे मुस्लिम समुदायों से अलग हो सकती हैं. इसलिए उनकी धार्मिक व्यवस्था को सुन्नी या दूसरे शिया समुदायों की प्रथाओं के बिल्कुल समान मानना उचित नहीं है.
यही विशिष्ट धार्मिक परंपरा अक्सर प्रिंस रहीम से जुड़े लेखों और सोशल मीडिया चर्चाओं में सुर्खियां बनती है.
आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क क्या करता है?
प्रिंस रहीम की पहचान का दूसरा बड़ा पहलू उनका विकास और परोपकार से जुड़ा काम है. आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक अवसर, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्रों में काम करता है.
भारत में भी AKDN से जुड़े संस्थानों की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं रही हैं. खास तौर पर ऐतिहासिक इमारतों और विरासत स्थलों के संरक्षण में इसका योगदान उल्लेखनीय रहा है.
हुमायूं के मकबरे का संरक्षण क्यों खास है?
दिल्ली का हुमायूं का मकबरा आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर की भारत में सबसे चर्चित विरासत परियोजनाओं में शामिल है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ मिलकर मकबरे और उसके आसपास के मुगल बागों के संरक्षण और पुनरुद्धार का काम किया गया.
इस परियोजना की खासियत केवल ऐतिहासिक इमारत का संरक्षण नहीं थी. इसके साथ आसपास के पर्यावरण, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय समुदायों से जुड़े विकास पर भी ध्यान दिया गया.
कुतुब शाही मकबरों के संरक्षण में भूमिका
हैदराबाद में कुतुब शाही मकबरों के संरक्षण और पुनरुद्धार की परियोजना भी आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर से जुड़ी महत्वपूर्ण पहलों में है. इन ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण भारत की मध्यकालीन वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है.
ऐसे प्रोजेक्ट्स में स्थानीय कारीगरों, राजमिस्त्रियों और पारंपरिक शिल्पकारों की भागीदारी भी कराई जाती है. इससे पुरानी निर्माण तकनीकों और हस्तकलाओं को जीवित रखने में मदद मिलती है.
आगा खान पैलेस का भी है ऐतिहासिक महत्व
पुणे स्थित आगा खान पैलेस का निर्माण 1892 में हुआ था. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस इमारत का विशेष स्थान है. महात्मा गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंग इस परिसर से जुड़े रहे हैं.
इस वजह से आगा खान परिवार और भारत की ऐतिहासिक विरासत के बीच संबंध केवल धार्मिक या सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं हैं.
भारत दौरे का क्या है महत्व?
प्रिंस रहीम का वर्तमान भारत दौरा कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है. एक तरफ वह इस्माइली समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख हैं, तो दूसरी ओर AKDN जैसे वैश्विक विकास नेटवर्क का नेतृत्व करते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत में स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. राष्ट्रपति, गृह मंत्री और विदेश मंत्री के साथ उनकी मुलाकातें भी भारत-आगा खान संस्थागत संबंधों के व्यापक दायरे को दिखाती हैं.
दिल्ली के बाद उनके अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद जाने का कार्यक्रम है. ये शहर भारत के सामाजिक, कारोबारी और सांस्कृतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.
धार्मिक नेतृत्व से आगे बड़ी है पहचान
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम की कहानी केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि वह किस धार्मिक परंपरा को मानते हैं या उनकी इबादत की शैली क्या है. वह एक ऐसे वैश्विक संस्थागत नेटवर्क के प्रमुख हैं, जिसकी गतिविधियां स्वास्थ्य और शिक्षा से लेकर ग्रामीण विकास और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण तक फैली हैं.
भारत में उनकी मौजूदा यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धार्मिक नेतृत्व, विकास सहयोग और सांस्कृतिक विरासत तीनों को एक साथ जोड़ती है. यही वजह है कि प्रिंस रहीम आगा खान पंचम का भारत दौरा राजनीतिक, कूटनीतिक और सामाजिक तीनों दृष्टियों से चर्चा में बना हुआ है.
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Lord's टेस्ट में हार के बाद टीम से बाहर हुए मोहम्मद रिज़वान और इमाम से NCCIA ने किए सवाल
क्रिकइन्फो के अनुसार, पाकिस्तान के नेशनल साइबर क्राइम्स इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने लाहौर में पाकिस्तान के क्रिकेटर मोहम्मद रिज़वान और इमाम-उल-हक से पूछताछ की। इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज़ के दौरान जिन सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर करके घर भेजा गया था, उनमें ये दोनों खिलाड़ी भी शामिल थे। उन्हें लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान की हार के बाद टीम से हटाया गया था।
उन्हें NCCIA के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था और वे गुरुवार को एजेंसी के ऑफिस पहुंचे। खबरों के मुताबिक, कम से कम एक खिलाड़ी ने वहां कई घंटे बिताए। यह अभी साफ नहीं है कि खिलाड़ियों से क्यों पूछताछ की गई या क्या यह पूछताछ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की उस जांच से जुड़ी है, जिसका ऐलान इस हफ्ते की शुरुआत में किया गया था। PCB ने कहा कि उसने "अनुशासन और व्यवहार से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के बाद एक आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू की है, जिसकी अभी आंतरिक रूप से समीक्षा की जा रही है," लेकिन उसने किसी खिलाड़ी का नाम नहीं बताया।
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क्रिकइन्फो के अनुसार, कम से कम एक खिलाड़ी को एक सवालनामा मिला है जिसे भरकर अगले हफ़्ते तक NCCIA को वापस भेजना है। इंग्लैंड दौरे पर मोहम्मद रिज़वान का टूर्नामेंट निराशाजनक रहा, जिसमें उन्होंने 12, 41, 7 और 1 रन बनाए। कैरिबियन में खेले गए पिछले दो टेस्ट मैचों में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। लॉर्ड्स में खेले गए मैच के पहले दिन के बाद इमाम-उल-हक की बाईं पिंडली (calf) में ग्रेड 1 का टियर (मांसपेशी फटना) पाया गया और वे पाकिस्तान की किसी भी पारी में नहीं खेल पाए। आखिरी दिन सुबह, उन्होंने मैच से पहले वार्म-अप के दौरान हल्की बैटिंग करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें शारीरिक रूप से परेशानी हो रही थी। PCB के मुख्य चयनकर्ता और हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद ने सार्वजनिक रूप से इमाम की चोट पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि इसकी जांच हो सकती है।
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रिज़वान और इमाम के अलावा, लॉर्ड्स में पाकिस्तान की 194 रनों से हार के बाद PCB ने सलमान आगा, अली उस्मान, आमिर जमाल, अवैस ज़फ़र और खुर्रम शहज़ाद को टीम से बाहर कर दिया। यह हार लीड्स में सीरीज़ के पहले मैच में एक पारी और 103 रनों से मिली हार के बाद हुई थी। टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फ़ज़ल के साथ-साथ पांच ऐसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया जिन्होंने अभी तक कोई इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है: अराफ़ात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बेग, मोहम्मद इमरान रंधावा और रज़उल्लाह। लॉर्ड्स में हार के बाद PCB ने हेड कोच सरफ़राज़ अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को भी घर वापस भेज दिया और पाकिस्तान के व्हाइट-बॉल कोचिंग स्टाफ़ के सदस्य माइक हेसन और एशले नोफ़के को क्रमशः हेड कोच और बॉलिंग कोच नियुक्त किया।
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