गलत चार्जिंग से घटती है Battery Health, इन 5 आसान तरीकों से आईफोन और एंड्रॉयड की बैटरी लाइफ लंबी चलेगी!
दैनिक जीवन में मोबाइल एक अहम हिस्सा बन चुका है। आजकल बिना फोन के एक पल भी नहीं कटा जा सकता है। गौरतलब है कि सुबह के उठने से लेकर रात के सोने तक फोन हमारे हाथ में ही रहता है। इसका इस्तेमाल लगातार करते रहते हैं। हालांकि, ऐसे में बैटरी खर्च होना एक स्वाभाविक सी बात है, लेकिन बैटरी यदि तेजी से डिस्चार्ज होने लग जाए, तो यह दिक्कत आम नहीं है।
इस समस्या से बचने लिए हर कोई यही चाहता है कि उनके फोन की बैटरी हेल्थ लंबे समय तक चले। आइए आपको बताते हैं 5 मॉर्डन चार्जिंग रूल्स के बारे में, जिन्हें हर स्मार्टफोन यूजर को फॉलो करना चाहिए।
फोन की बैटरी हेल्थ को खराब होने से बचाने के लिए क्या करें?
20-80 प्रतिशत वाला रूल करें फॉलो
अगर आप अपने फोन की बैटरी को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो लंबे समय तक 90% या उससे बनाए रखने के लिए बैटरी को कभी भी 0% तक पूरी तरह खत्म न होने दें। इसके साथ ही फोन को लंबे समय तक किसी भी 100% चार्ज न करें। जब आपके फोन की बैटरी 20% के आसपास पहुंच जाए, तो उस दौरान ही फोन को चार्जर पर लगाएं। जब बैटरी 80% या 85% हो जाए तो इसे अनप्लग कर दें।
चार्जिंग के दौरान फोन के इस्तेमाल से बचें
जब आपका फोन चार्जिंग में लगा हुआ है, तो इस पर गेम खेलना, वीडियो कॉलिंग करना या ऑनलाइन मूवी बिल्कुल न देखें। चार्जिंग के दौरान फोन प्रोसेर से पहले से ही गर्म हो रहा होता है, ऐसे में आप जब कोई भारी टास्क डालते हैं, तो फोन का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। इस समय निकलने वाली हीट बैटरी के लिए सेफ नहीं है।
हमेशा ओरिजिनल और सर्टिफाइड चार्जर का ही इस्तेमाल करें
कभी भी बाजार में मिलने वाले सस्ते या बिना किसी ब्रांड को लोकल चार्जर का इस्तेमाल करने बचें। ऐसे चार्जर फोन जल्दी चार्ज का दावा करते हैं, लेकिन वे वोल्टेज को सही कंट्रोल नहीं करते हैं। इसलिए हमेशा अपने आईफोन या एंड्रॉइड डिवास के साथ मिलने वाला ऑरिजिनल एडाप्टर और केबल का ही प्रयोग करें। यदि नया चार्जर खरीदें, तो हमेशा सर्टिफाइड या अच्छी ब्रांडेड एक्सेसरीज वाला ही चुनें। घटिया चार्जर से बैटरी की उम्र को भारी रुप से कम कर देता है।
ओवरनाइट चार्जिंग से दूर रहे
कुछ लोगों की आदत होती है कि रात के समय फोन चार्ज पर लगाकर सो जाते हैं। यदि आपकी भी यही आदत है, तो इसे आज ही छोड़ दें। रात को सोते समय फोन को चार्जिंग पर लगाकर सुबह तक छोड़ देना स्मार्टफोन की बैटरी की उम्र को तेजी से कम करता है। लेकिन आज के आधुनिक स्मार्टफोन्स में स्मार्ट चार्जिंग के फीचर आ गए हैं, जो कि रात में बैटरी को 80% पर रोक देते हैं। फिर लंबे समय तक हाई वोल्टेज से जुड़े रहना बैटरी के लिए सही नहीं है।
फोन पर भारी कवर लगाकर चार्ज करने से बचें
अक्सर देखा गया है कि फोन को सुरक्षित रखने के लिए लोग महंगे और मोटे बैक कवर या रफ-टफ केस का प्रयोग करते हैं। जब आप इस तरह के केस के साथ फोन को चार्जिंग करेंगे, तो चार्जिंग के दौरान पैदा होने वाली प्राकृतिक गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। फिर अंदर ही अंदर ट्रैप होकर फोन और बैटरी को अत्यधिक गर्म कर देती है। इसलिए चार्जिंग करते समय हमेशा फोन का बैक कवर निकाल देना चाहिए। जिससे आपके फोन की बैटरी ठंडी रहे।
'तलाक-ए-हसन' तलाक का वैध तरीका, देश में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं, गुवाहाटी उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने तलाक के पंजीकरण से जुड़ी एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ‘तलाक-ए-हसन’ मुस्लिम समुदाय में तलाक का एक वैध (Valid) जरिया है और मौजूदा समय में देश में इस प्रक्रिया पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह ऐतिहासिक आदेश न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल की गई रिट याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया।अदालत ने एक याचिकाकर्ता को अपने तलाक का पंजीकरण कराने के लिए असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 के तहत बारपेटा क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए दिए गए तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उसकी शादी 2016 में हुई थी। बाद में दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर 2018 में अपना ससुराल छोड़ दिया। दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हुईं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को तीन अलग-अलग तारीखों पर ‘तलाक-ए-हसन’ दिया और फिर कानून के तहत तलाक के पंजीकरण के लिए संबंधित प्राधिकारी से संपर्क किया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘तलाक-ए-हसन’ पर कोई प्रतिबंध नहीं है और उसने इसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया है। राज्य सरकार ने हालांकि अदालत से कहा कि 1935 के पुराने कानून को निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत नियुक्त प्राधिकारी का पद भी समाप्त कर दिया गया है इसलिए उस व्यवस्था के तहत अब तलाक का पंजीकरण नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया ‘तलाक-ए-हसन’, तलाक का वैध तरीका है और मौजूदा समय में देश में इस पर प्रतिबंध नहीं है। इसे भी पढ़ें: CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने स्वीकारी, Nippon Denro को मिली राहत
हालांकि, अदालत ने 1935 के कानून के तहत बारपेटा में नियुक्त प्राधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह कानून निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत सृजित पद भी समाप्त कर दिया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को 2024 के कानून के तहत संबंधित क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि पंजीयक को यह जांच करनी होगी कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में तलाक दिया है या नहीं और उसे उसकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद वह तय करेगा कि अधिनियम की धारा 12 के तहत तलाक का पंजीकरण किया जाना है या नहीं। अगर पंजीकरण से इनकार किया जाता है तो याचिकाकर्ता 2024 के अधिनियम की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है। इसे भी पढ़ें: Bengal CID ने जमीन घोटाले में Sumit Roy को Medinipur कोर्ट में पेश किया
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को उचित मंच पर ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने की स्वतंत्रता होगी। याचिकाकर्ता की पत्नी नोटिस दिए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुई। अदालत ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
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