MP Transport Summit 2026: इंदौर में दिखी भविष्य के ट्रांसपोर्ट की झलक, EV बसों से लेकर नई तकनीक तक कंपनियों ने दिखाए इनोवेशन
मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को नए स्वरूप में लाने की तैयारी के बीच इंदौर में चल रहे ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ में भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की झलक देखने को मिली। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में लगाई गई प्रदर्शनी में EV बसों के साथ परिवहन, ऊर्जा, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई नए समाधान पेश किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सुगम और बेहतर लोक परिवहन केवल लोगों की आवाजाही को आसान नहीं बनाता, बल्कि बाजारों को आपस में जोड़ता है। उन्होंने कहा जब बाजार जुड़ेंगे तो नए अवसर पैदा होंगे और यही अवसर प्रदेश के नागरिकों को आगे बढ़ने का संकल्प और सामर्थ्य देंगे।
EV बसों से लेकर ड्राइविंग टेक्नोलॉजी तक
11 और 12 सितंबर को आयोजित समिट में अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां और संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनी का फोकस इस बात पर है कि तकनीक के जरिए प्रदेश में बस यात्रा को ज्यादा सुगम और सुरक्षित बनाने के साथ पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को कैसे आधुनिक किया जा सकता है।
प्रदर्शनी में ऐसी EV बसें भी रखी गई हैं, जिन्हें भविष्य की परिवहन व्यवस्था के अहम विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही कंपनियों ने अपने उत्पाद, सेवाएं और तकनीकी समाधान प्रदर्शित किए हैं। ऊर्जा और ईंधन से लेकर परिवहन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीक तक कई क्षेत्रों के इनोवेशन यहां देखने को मिल रहे हैं।
समिट में Think Gas, YASH Technologies, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), Indian Oil, LightMetrics, MPIDC, Cube Construction, Kalyani Powertrain Limited और Omnificent सहित कई कंपनियां और संस्थान शामिल हो रहे हैं।
नई बस व्यवस्था के साथ निवेश और रोजगार पर भी नजर
समिट का दायरा सिर्फ नई बसों और तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके जरिए परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं तलाशने पर भी फोकस है। कंपनियों के सामने मध्य प्रदेश में उपलब्ध अवसरों को रखा जा रहा है ताकि नई परिवहन व्यवस्था के साथ इससे जुड़े उद्योग और तकनीकी सेवाओं का नेटवर्क भी विकसित हो सके।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए प्रदेश में नई यात्री परिवहन व्यवस्था तैयार की जा रही है। ऐसे में EV, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों की भागीदारी को इसी बड़े बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ इसका असर निवेश, तकनीकी रोजगार और परिवहन से जुड़े नए कारोबार पर भी पड़ने की उम्मीद है।
आंगनबाड़ी भर्ती में गड़बड़ी का आरोप, दूसरे नंबर की अभ्यर्थी को दरकिनार कर पांचवें नंबर वाली को मिली नियुक्ति
नरसिंहपुर जिले की जनपद पंचायत चांवरपाठा के अंतर्गत ग्राम पंचायत कौड़िया में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भर्ती की जारी योग्यता सूची में दूसरे नंबर पर रहने वाली उम्मीदवार को छोड़कर पांचवें नंबर की उम्मीदवार को नियुक्ति दे दी गई।
मामला सामने आने के बाद पीड़ित आवेदिका ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराकर जांच और न्याय की मांग की है। वहीं, मामला कलेक्टर के संज्ञान में पहुंचने के बाद निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
कौड़िया में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर विवाद
ग्राम पंचायत कौड़िया में आंगनबाड़ी सहायिका के एक पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसमें गांव की पांच युवतियों ने आवेदन किया था। प्रक्रिया के बाद एक योग्यता या मेरिट सूची जारी की गई, जिसमें उम्मीदवारों के नाम उनकी पात्रता और प्राप्त अंकों के आधार पर क्रम में रखे गए थे। इसी सूची में खुशबू मेहरा का नाम दूसरे स्थान पर बताया गया है।
शिकायत के अनुसार, सूची में पहले स्थान पर रहने वाली उम्मीदवार का चयन हुआ था, लेकिन उन्होंने पद पर ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में दूसरे नंबर पर रहने वाली खुशबू मेहरा को नियुक्ति मिलने की उम्मीद थी। लेकिन आरोप है कि संबंधित प्रक्रिया में उन्हें नियुक्ति देने के बजाय सूची में पांचवें स्थान पर रहने वाली एक अन्य युवती को आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर नियुक्त कर दिया गया।
दूसरे नंबर की उम्मीदवार ने उठाए चयन प्रक्रिया पर सवाल
खुशबू मेहरा का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन किया और जारी सूची में दूसरा स्थान हासिल किया। उनके अनुसार, जब पहले स्थान वाली उम्मीदवार ने नौकरी ज्वाइन नहीं की, तब उनका दावा स्वाभाविक रूप से मजबूत हो गया था। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। इसी बात को लेकर उन्होंने प्रशासन से शिकायत की है।
आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में मेरिट सूची का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे उम्मीदवारों की प्राथमिकता तय होती है। यदि किसी कारण से चयनित उम्मीदवार पद स्वीकार नहीं करती है, तो अगली पात्र उम्मीदवार को मौका देने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, इस मामले में वास्तव में कौन सा नियम लागू होता है और नियुक्ति किस आधार पर की गई, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। फिलहाल शिकायतकर्ता ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर पहुंची शिकायत
नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ने के बाद खुशबू मेहरा ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने अपनी मेरिट स्थिति और पहले नंबर की उम्मीदवार के ज्वाइन नहीं करने का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों के अनुसार उन्हें पद पर नियुक्ति मिलनी चाहिए थी, तो उन्हें उनका अधिकार दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच की उम्मीद है। जांच के दौरान भर्ती से जुड़े दस्तावेज, जारी मेरिट सूची, पात्र उम्मीदवारों की जानकारी और नियुक्ति आदेश जैसे रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि पांचवें नंबर की उम्मीदवार को नियुक्ति देने का आधार क्या था और क्या इसके लिए कोई अलग नियम या प्रक्रिया अपनाई गई थी।
कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन
मामला जिले की कलेक्टर के संज्ञान में भी लाया गया है। कलेक्टर की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब प्रशासन की जांच इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसी से यह स्पष्ट होगा कि आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में नियमों का पालन हुआ या नहीं।
अगर जांच में यह सामने आता है कि मेरिट सूची के अनुसार दूसरे नंबर की उम्मीदवार को नियुक्ति मिलनी चाहिए थी और इसके बावजूद किसी अन्य उम्मीदवार को पद दिया गया, तो प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि पांचवें नंबर की उम्मीदवार की नियुक्ति के पीछे नियमों के अनुसार कोई वैध कारण सामने आता है, तो वह भी जांच के दौरान स्पष्ट होगा।
आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में पारदर्शिता क्यों जरूरी
आंगनबाड़ी सहायिका की भर्ती गांव और स्थानीय स्तर पर रोजगार से जुड़ी होती है। इसलिए उम्मीदवारों के लिए चयन प्रक्रिया का साफ और पारदर्शी होना बहुत जरूरी है। जब किसी भर्ती में मेरिट सूची जारी होती है, तो उम्मीदवारों को उम्मीद रहती है कि चयन उसी क्रम और नियमों के अनुसार होगा। अगर किसी दूसरे उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलती दिखाई देती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
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