वित्त मंत्री सीतारमण ने रूसी उप-प्रधानमंत्री मंतुरोव से मुलाकात की, द्विपक्षीय निवेश संधि पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को रूसी उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय निवेश संधि (बीटीटी) को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की।
इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वित्तीय सर्विसेज में साझेदारी को मजबूत करना और आर्थिक साझेदारी को बढ़ाना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वित्त मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष बीटीटी पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। इस संधि का मकसद एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जिससे दोनों देशों के बीच निवेश का प्रवाह बढ़े और कुल मिलाकर आर्थिक सहयोग मजबूत हो।
मंत्रालय ने बताया कि यहां हुई एक बैठक में उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की समीक्षा की और अलग-अलग सेक्टर में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के मौकों पर भी बातचीत की। मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश अपने आर्थिक संबंधों को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की नई कोशिशें कर रहे हैं।
इस हफ्ते की शुरुआत में, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग के सामान, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और खाद्य उत्पादों को ऐसे अहम सेक्टर के तौर पर जिक्र किया था, जिनसे भारत-रूस व्यापार में बढ़ोतरी हो सकती है।
रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ भारत-रूस बिजनेस डायलॉग को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व ने 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर और दोनों तरफ के निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
अभी भारत और रूस के बीच लगभग 60 अरब डॉलर का आपसी व्यापार होता है, जिसका मतलब है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए अगले चार वर्षों में 40 अरब डॉलर का अतिरिक्त व्यापार करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए लगातार सालाना दोहरे अंकों में विकास और दोनों तरफ की सरकारों और व्यवसायों के समन्वित प्रयासों की जरूरत होगी। उन्होंने कई ऐसे बड़े मौकों का भी जिक्र किया जिनका अभी तक पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे उत्पाद जिनमें भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है, जैसे कि दवाएं और इंजीनियरिंग का सामान, वे रूस के प्रमुख आयात हैं, लेकिन रूसी बाजार में उनके निर्यात की पूरी क्षमता का अभी तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
--आईएएनएस
एबीएस
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ब्रिक्स भारत इनोवेट्स एक्सपो का दिल्ली में आगाज, 37 डीप-टेक स्टार्टअप्स का प्रदर्शन
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय ‘ब्रिक्स भारत इनोवेट्स (बीबीआई) एक्सपो’ की शुरुआत हुई। इस प्रदर्शनी में भारत की डीप-टेक नवाचार क्षमता और उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े स्टार्टअप्स का वैश्विक प्रदर्शन किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के समन्वय से इस एक्सपो का आयोजन किया है। इसका उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र से विकसित नवाचारों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराना और स्टार्टअप्स, उच्च शिक्षा संस्थानों, शोध प्रयोगशालाओं व रिसर्च पार्कों को दुनिया भर के उद्योग जगत, निवेशकों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारों और प्रवासी भारतीय नेटवर्क से जोड़ना है।
ब्रिक्स भारत इनोवेट्स एक्सपो 2026 इस वर्ष भारत की दूसरी बड़ी डीप-टेक प्रदर्शनी है। इससे पहले जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में पहली बार भारत इनोवेट्स का आयोजन किया गया था। उस कार्यक्रम में शामिल 120 स्टार्टअप्स में से चुनी गई 37 डीप-टेक स्टार्टअप्स इस बार ब्रिक्स मंच पर अपनी तकनीक और नवाचारों का प्रदर्शन कर रही हैं।
यह प्रदर्शनी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” के अनुरूप आयोजित की जा रही है।
बीबीआई एक्सपो का आयोजन शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के साथ किया गया है, जिससे भारतीय स्टार्टअप्स को ब्रिक्स देशों के सीईओ, निवेशकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ सीधे संवाद और नेटवर्किंग का अवसर मिलेगा। इसके माध्यम से बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) साझेदारी, प्रौद्योगिकी सहयोग, निवेश वार्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
यह एक्सपो भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत शिक्षा क्षेत्र की प्राथमिकताओं में शामिल “रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने” के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं के इस प्रदर्शनी का दौरा करने की संभावना है। इसके अलावा ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, निवेशक, उद्योगपति और कारोबारी नेता भी एक्सपो में शामिल होंगे।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मंच से भारतीय स्टार्टअप्स को ब्रिक्स देशों के निवेशकों और उद्योग जगत तक सीधी पहुंच, राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के स्तर पर दृश्यता, एफआईसीसीआई, सीआईआई और एसोचैम के सहयोग से बी2बी बैठकों और संरचित मैचमेकिंग, तथा वैश्विक स्तर पर ब्रांड और कूटनीतिक विश्वसनीयता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत शिक्षा मंत्रालय ने 5 अगस्त को ओडिशा के भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों की बैठक और 7 अगस्त को 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित की थी। शिक्षा मंत्रियों की बैठक में पांच प्राथमिक क्षेत्रों- प्रारंभिक बाल शिक्षा और आधारभूत साक्षरता, कौशल विकास एवं टीवीईटी, अनुसंधान-नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम, योग्यता की पारस्परिक मान्यता तथा शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण पर सहयोग संबंधी घोषणा-पत्र को अपनाया गया।
--आईएएनएस
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