यात्री परिवहन विजन समिट 2026: सीएम डॉ मोहन यादव ने किया शुभारंभ, 25 सितम्बर से प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की घोषणा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के अंतर्गत आयोजित ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने इस दो दिवसीय समिट के मंच से सिंगल क्लिक के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनोवेशन चैलेंज प्रतियोगिता की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना और युवाओं की प्रतिभा को नए अवसरों से जोड़ना है।
डॉ यादव ने इस अवसर पर ‘मध्यप्रदेश सुगम परिवहन सेवा’ के लोगो प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि के चेक प्रदान कर सम्मानित किया, उन्होंने यात्री मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर आधारित एग्जीबिशन का भी शुभारंभ कर अवलोकन किया साथ ही समिट की स्मारिका एवं यात्री परिवहन से संबंधित जानकारी पर आधारित बुकलेट का विमोचन किया।
25 सितम्बर से मध्य प्रदेश में शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा
डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके कार्यकाल की तारीफ करते हुए कहा कि आज उनके ही कारण भारत दुनिया में अपनी अलग पहचान बना पाया है उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने 2047 के विकसित भारत की कल्पना की है और उसमें मध्य प्रदेश भी उनका साथ दे रहा है धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है, अब ये सुगम परिवहन सेवा यात्रियों के दैनिक जीवन को भी सुगम बनाएगी मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 25 सितम्बर से हम प्रदेश में इसकी शुरुआत करने जा रहे हैं।
बेहतर परिवहन से बाजार का विस्तार और नए अवसरों का सृजन होगा
मध्यप्रदेश के विकास की बात करते हुए सीएम ने कहा इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है और दोनों शहर तेजी से विकास कर रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि परिवहन के बिना परिवर्तन संभव नहीं है। बेहतर परिवहन से बाजार का विस्तार और नए अवसरों का सृजन होगा, जिससे विकास और समृद्धि को गति मिलेगी। सीएम ने कहा यह हमारे लिए गौरव की बात है कि मध्यप्रदेश में निर्मित ईवी वाहन और इंजन आज देश ही नहीं, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहे हैं।
सीएम ने की पीएम मोदी की तारीफ
डॉ मोहन यादव ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में 74 हज़ार किलोमीटर के राजमार्ग सबसे तेज गति से बने हैं, तो वहीं सबसे तेज गति से दिल्ली – मुंबई कॉरिडोर विकसित हुआ है। देश के बीच में मध्यप्रदेश होने से कम समय में दिल्ली और मुंबई पहुँचा जा रहा है। लोक परिवहन की आवश्यकता समय के साथ सार्वजनिक सेवाओं की अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य में मौजूद 15 हज़ार से ज़्यादा बसें तथा 5 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क लोगों के सुगम परिवहन की दिशा में महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगा।
दावा- बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब हूती विद्रोही:दुनिया के अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ा; यमनी फोर्स पेरिम द्वीप छोड़कर भागी
यमन के हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब पर कब्जे के करीब पहुंच गए हैं। यह यह द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में स्थित है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि यमनी गवर्नमेंट फोर्स ने पेरिम द्वीप पर कंट्रोल छोड़ दिया है और वे पीछे हट गए हैं। पेरिम द्वीप पर कंट्रोल बाब अल-मंदेब पर पकड़ बनाने के लिए बेहद अहम है। इसके ठीक सामने धुबाब शहर है, जहां हूती लड़ाके भी दाखिल हो गए हैं। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां कब्जे के बाद आस-पास गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना आसान हो जाएगा। हूती विद्रोही 10 दिनों से यमन के लाल सागर तट पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वे मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं। अब वे शहर ताइज की ओर बढ़ रहे हैं। मोखा पर कब्जे से लाल सागर में बढ़ा खतरा हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर है। रॉयटर्स के मुताबिक, मोखा पर कब्जे के अभियान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हूतियों को सैन्य सलाह और मदद दी थी। हालांकि, ईरान सार्वजनिक तौर पर हूतियों को सैन्य निर्देश देने से इनकार करता है। बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच अहम समुद्री रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे ईंधन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। यह खतरा ऐसे समय बढ़ा है, जब ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से समुद्री यातायात प्रभावित है। अगर बाब अल-मंदेब में भी संकट बढ़ा, तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। ईरानी कमांडरों की मौजूदगी का दावा तेहरान की गतिविधियों से परिचित एक क्षेत्रीय राजनयिक के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर पहले ही यमन पहुंच चुके थे। उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के हमलों की निगरानी की और उनकी कमान संभाली। राजनयिक के मुताबिक, हमलों की रणनीति को लेकर कई हफ्तों तक चर्चा हुई थी। एक अन्य ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरान ने हूतियों समेत अपने सहयोगी समूहों के साथ कई बैठकें की थीं। हालांकि, उनके मुताबिक मोखा पर हमला करने का फैसला हूतियों ने खुद लिया था। यमन की सऊदी समर्थित सरकार से जुड़े पांच सैन्य अधिकारियों ने भी कहा कि लाल सागर के किनारे हूतियों के नए अभियान में ईरान ने उनकी मदद की थी। यमनी सैन्य सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए हूती लड़ाकों से मिली जानकारी और संचार इंटरसेप्ट के आधार पर दावा किया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के वरिष्ठ कमांडर अब्दोलरेजा शहलाई इस अभियान को दिशा दे रहे थे। ईरान ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, शहलाई कुद्स फोर्स में हैं और पहले भी यमन में रह चुके हैं। नाकेबंदी के बावजूद हथियार पहुंचाने का दावा ईरानी सूत्रों के मुताबिक, यमन में हूतियों के इलाकों पर हवाई और समुद्री नाकाबंदी के बावजूद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अभी भी हथियार और सैन्यकर्मी यमन के अंदर और बाहर पहुंचाने में सक्षम हैं। हालांकि, सूत्रों ने यह नहीं बताया कि ऐसा किस तरीके से किया जा रहा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के जानकार अहमद नागी के मुताबिक, लाल सागर के किनारे हूतियों का अभियान अचानक शुरू नहीं हुआ। इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। नागी के मुताबिक, हूतियों की सैन्य क्षमता बढ़ने की एक बड़ी वजह उन्हें मिले नए हथियार हैं। इनमें ईरान से मिले हथियारों के साथ-साथ अलग-अलग तस्करी नेटवर्क से हासिल किए गए हथियार भी शामिल हैं। उन्होंने मौजूदा अभियान में हूतियों के ड्रोन के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। सऊदी ने मोखा पर बड़ा हवाई हमला नहीं किया जब हूती मोखा की तरफ बढ़ने लगे, तो यमनी सरकार ने सऊदी अरब से ज्यादा हवाई मदद और दूसरी सैन्य सहायता मांगी थी। यमन के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, यमनी सरकार चाहती थी कि सऊदी अरब हूतियों के मुख्य इलाकों में उनके ठिकानों पर हवाई हमले करे। इनमें राजधानी सना और तेल डिपो जैसे रणनीतिक ठिकाने शामिल थे। हालांकि, सऊदी अरब ने मोखा के मोर्चे पर बड़ा हवाई अभियान नहीं चलाया। उसने यमन को हथियार, लॉजिस्टिक मदद और खुफिया जानकारी दी। सऊदी ने कुछ हवाई हमले जरूर किए, लेकिन उनका मुख्य फोकस उत्तरी मोर्चे के जौफ और मारिब प्रांतों पर रहा। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के साथ बड़ा सैन्य टकराव नहीं चाहता। उसे डर है कि इससे सऊदी क्षेत्र में हूतियों के ड्रोन हमले और बढ़ सकते हैं। ट्रम्प ने सऊदी की एयरस्ट्राइक की मांग ठुकराई हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को अमेरिकी मदद की उम्मीद थी। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से सीधे अमेरिकी हवाई हमले करने की अपील की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इनकार कर दिया। इसके बावजूद अमेरिका सऊदी की मदद कर रहा है। CNN के मुताबिक, 100 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सलाहकार सऊदी अरब में मौजूद हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इनकी संख्या करीब 200 बताई है। ये अमेरिकी सैन्यकर्मी सऊदी सेना को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सैनिक हूतियों के खिलाफ होने वाले हवाई हमलों में सीधे हिस्सा नहीं ले रहे हैं। फिलहाल अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। ऐसे में मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों को रोकने के लिए सऊदी अरब और यमन सरकार की अगली रणनीति अहम होगी।
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