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लाल किला ब्लास्ट से पहले अरावली में की थी IED टेस्टिंग, NIA चार्जशीट में बड़ा खुलास

Delhi Red Fort Blast Update: NIA द्वारा दाखिल किए गए चौंकाने वाले आरोपपत्र से यह बात सामने आई है कि फरीदाबाद के सुनसान खेत और प्राचीन अरावली के जंगल किसी समय एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल की टेस्टिंग के मुख्य ठिकाने हुआ करते थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों पर आत्मघाती हमले की खतरनाक साजिश रचने के दौरान इन्हीं जंगलों और खेतों में अत्याधुनिक आईईडी और हथियारों का गुप्त परीक्षण करने का गंभीर आरोप है. यह पूरी तैयारी उस भयानक विस्फोट से ठीक पहले चल रही थी, जिसने पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास लगभग 15 बेकसूर लोगों की जान ले ली थी.

खेतो से निकलकर अरावली की पहाड़ियों तक फैला था दायरा

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मॉड्यूल के मुख्य चेहरों में शामिल उमर उन नबी, मुजम्मिल शकील गनई और अदील अहमद राथर ने विभिन्न विस्फोटक मिश्रणों के साथ कई बार खतरनाक प्रयोग किए थे. शुरुआत में इस संदिग्ध समूह ने आम उर्वरक आधारित मिश्रणों का सहारा लिया था, लेकिन बाद में इसकी विनाशक क्षमता को परखने के बाद वे अधिक खतरनाक माने जाने वाले विस्फोटक टीएटीपी की ओर आगे बढ़ गए. आरोपपत्र के मुताबिक, विस्फोटकों की यह टेस्टिंग यूनिवर्सिटी के ठीक पास से ही शुरू की गई थी. सितंबर और अक्टूबर के महीनों के दौरान उमर, गनई और एक छात्र जिसका नाम जसिर बिलाल वानी है,  अल-फलाह परिसर के भीतर एक ट्यूबवेल के पास नाइट्रो-ग्लिसरीन का कथित परीक्षण किया था. एनआईए का यह भी दावा है कि इस खतरनाक सामग्री को आरोपी गनई के निजी फ्लैट के अंदर ही तैयार किया गया था. इसके बाद इन आरोपियों ने यूनिवर्सिटी के बाहरी हिस्से में स्थित एक खेत में छोटा टेस्ट ब्लास्ट किया और फिर धीरे-धीरे अपनी गतिविधियों को बढ़ाते हुए फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों में स्थित धौज के घने जंगलों तक पहुंच गए.

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धौज के जंगलों में टीएटीपी और हथियारों के खौफनाक परीक्षण

एनआईए के आरोपपत्र में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि धौज के वन क्षेत्रों में उमर और गनई ने टीएटीपी के कई अतिरिक्त परीक्षणों को अंजाम दिया था. इनमें से एक परीक्षण के दौरान इस्तेमाल किए गए पाइप जैसे संदिग्ध उपकरण के अवशेष भी बाद में जांच के दौरान बरामद किए जाने का दावा किया गया है. इसके अलावा, अक्टूबर और नवंबर 2024 के दौरान जब अदील अल-फलाह आया हुआ था, तब गनई, अदील और यूनिवर्सिटी के फार्माकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर शाहीन अहमद अंसारी ने धौज के ही एक अन्य जंगली इलाके में क्रिंकोव राइफल का कथित रूप से परीक्षण किया था.

लाखों रुपयों की फंडिंग और हथियारों की खरीद-फरोख्त

जांच एजेंसी ने एसोसिएट प्रोफेसर शाहीन अहमद अंसारी पर अंसार गजवत-उल-हिंद संगठन के सदस्यों को करीब 16 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि मुहैया कराने का भी गंभीर आरोप लगाया है. एनआईए के अनुसार, यह पैसा गनई के माध्यम से आगे पहुंचाया गया था जिसका मुख्य इस्तेमाल एक क्रिंकोव राइफल, एक एके-47 और दो पिस्तौल जैसे घातक हथियार खरीदने के लिए किया गया था. आरोपपत्र में इस बात का भी जिक्र है कि खोरी जमालपुर और धौज इलाकों में जो ठिकाने किराए पर लिए गए थे, उनका असल मकसद रसायनों, परीक्षण उपकरणों और इन खतरनाक विस्फोटकों को आम लोगों की नजरों से छिपाकर सुरक्षित रखना था.

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छात्र की तकनीकी मदद

इस पूरे आतंकी षड्यंत्र में काजीगुंड के रहने वाले छात्र जसिर बिलाल वानी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है जिस पर मॉड्यूल को तकनीकी और रसद संबंधी सहायता देने का आरोप है. एनआईए के मुताबिक, वह लगातार अल-फलाह आता-जाता रहता था, विस्फोटक बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से मदद करता था और कच्चे माल को सुरक्षित रूप से किराए के कमरों तक पहुंचाने का काम संभालता था. एजेंसी का यह भी आरोप है कि वानी ने उमर के कमरे में रहने के दौरान रॉकेट जैसे दिखने वाले आईईडी भी तैयार किए थे. इस तरह से इस पूरे समूह ने बेहद सुनियोजित तरीके से विस्फोटक तैयार करने, उनके सफल परीक्षण करने और साजो-सामान को अलग-अलग ठिकानों पर ठिकाने लगाने का ताना-बाना बुना था.

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देश में फरवरी से राजमार्गों पर शुरू हो जाएंगे बैरियर-फ्री टोल : नितिन गडकरी

मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा कि भारत में फरवरी से राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैंरियर-फ्री टोल शुरू हो जाएंगे। इससे वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अब फास्टैग को गाड़ी की नंबर-प्लेट पहचानने वाली तकनीक के साथ जोड़ने पर विचार कर रही है। वे टोल वसूलने के ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं जो ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा और जिससे टोल कलेक्शन में भी काफी बढ़ोतरी होगी।

गडकरी ने कहा, हम ऐसा टोल सिस्टम लागू करेंगे, जिनमें नंबर प्लेट और फास्टैग दोनों का इस्तेमाल होगा, उससे टोल आय में सालाना 10,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने कहा कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर इंतजार का समय, जो कभी 12 मिनट और कुछ मामलों में 30 मिनट तक होता था, अब 80-90 प्रतिशत तक कम हो गया है। सरकार अब बाकी बची देरी को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सिस्टम से फास्टैग डेटा और गाड़ियों की नंबर प्लेट, दोनों का इस्तेमाल करके टोल कलेक्शन को मजबूत करने की उम्मीद है, जिससे टोल वाले रास्तों पर गाड़ियों की पहचान और ट्रैकिंग बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि फास्टैग ने इंतजार का समय काफी कम करके और टोल प्लाजा पर कैश और छुट्टे पैसे की जरूरत को खत्म करके टोल कलेक्शन के तरीके को पहले ही बदल दिया है। अगला कदम यह पक्का करना है कि गाड़ियों को फीस देने के लिए टोल प्लाजा पर न रुकना पड़े।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टोल पेमेंट को आधुनिक बनाने और टोल प्लाजा पर अनुभव को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों के तहत 2016 में फास्टैग लॉन्च किया गया था। फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग की ओर भारत के कदम ने साफ नतीजे दिखाए हैं, जिससे टोल कलेक्शन ज्यादा आसान, कुशल और पारदर्शी हो गया है।

2021 में फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे नेशनल हाईवे नेटवर्क पर कैश-बेस्ड पेमेंट से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की ओर बदलाव में तेजी आई।

गडकरी ने बताया कि फास्टैग को अनिवार्य करने के फायदे पहले ही साफ तौर पर दिख रहे हैं, क्योंकि सरकार अब बैरियर-फ्री टोलिंग के अगले चरण की ओर बढ़ रही है।

फास्टैग रेडियो-फ्रैक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है ताकि जब गाड़ियां टोल प्लाजा से गुजरें, तो लिंक्ड अकाउंट से टोल चार्ज अपने-आप कट जाएं। इसे अपनाने से कैश पेमेंट पर निर्भरता कम हुई है और टोल कलेक्शन को सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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जब हार मानकर ड्रेसिंग रूम में सो गई भारतीय टीम, जागी तो कर दिया बड़ा उलटफेर, मैच जीता पर अवॉर्ड ले गया पाकिस्तानी कप्तान

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