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Parenting Tips: बच्चा जब जिद करे तो तुरंत न डांटें, टैंट्रम के पीछे हो सकती हैं ये 5 वजहें

Parenting Tips: छोटे बच्चे हमेशा यह नहीं बता पाते कि उन्हें गुस्सा, दुख, डर या निराशा किस वजह से हो रही है। ऐसे में उनकी भावनाएं कई बार रोने, चिल्लाने, चीजें फेंकने या जिद करने के रूप में सामने आती हैं। ऐसे समय पर माता-पिता का शांत रहना और पहले बच्चे की बात समझने की कोशिश करना जरूरी है।

बच्चे को अपनी भावनाओं के लिए सही शब्द मिलते हैं, तो धीरे-धीरे वह अपनी बात व्यवहार के बजाय शब्दों में बताना सीख सकता है। जानें बच्चों के गुस्से और रोने को समझने के 5 आसान तरीके।

1. पहले समझें कि बच्चा परेशान क्यों है
बच्चे कई बार अपनी बात शब्दों में नहीं बता पाते और गुस्सा या रोने के जरिए अपनी परेशानी जाहिर करते हैं। ऐसे में डांटने के बजाय पूछें कि उसे किस बात से बुरा लगा।

2. भावनाओं का नाम बताएं
बच्चे को समझाएं कि वह गुस्सा, दुख, डर या निराशा में से क्या महसूस कर रहा है। इससे उसे अपनी भावनाओं को पहचानने और आगे चलकर शब्दों में बताने में मदद मिल सकती है।

3. गुस्से में लंबा लेक्चर न दें
जब बच्चा बहुत गुस्से में हो, तब उसे लंबी बातें समझाने के बजाय पहले शांत होने का समय दें। कम शब्दों में उसे भरोसा दिलाएं कि आप उसकी बात सुन रहे हैं।

पहले समझें कि बच्चा परेशान क्यों है

4. भावना गलत नहीं, गलत व्यवहार जरूर है
गुस्सा या दुख महसूस करना गलत नहीं है, लेकिन मारना, चीजें फेंकना या किसी को नुकसान पहुंचाना सही नहीं। बच्चे को प्यार से दोनों के बीच का फर्क समझाएं।

5. हर जिद पूरी न करें
बच्चे को शांत करने के लिए हर बार उसकी मांग मान लेना सही तरीका नहीं है। उसकी भावना को समझें, लेकिन जरूरत पड़ने पर प्यार से अपनी सीमा भी तय करें।

टैंट्रम के समय याद रखें ये बातें

  • पहले बच्चे को सुनें, फिर समझाएं।
  • खुद भी शांत रहने की कोशिश करें।
  • बच्चे की भावनाओं को नजरअंदाज न करें।
  • गलत व्यवहार पर साफ सीमा तय करें।
  • बच्चा शांत होने के बाद उससे बात करें।

बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने और सही तरीके से जाहिर करने का मौका देना उनकी भावनात्मक समझ विकसित करने में मदद कर सकता है। माता-पिता का व्यवहार भी इसमें अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि बच्चे अपने आसपास के बड़ों से भावनाओं को संभालने का तरीका सीखते हैं।

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India Women ने Bangladesh को रौंदा, Harmanpreet Kaur ने कहा, मैं टीम के प्रदर्शन से खुश हूँ

गुरुवार को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले सेमीफ़ाइनल में बांग्लादेश पर 40 रन से जीत के साथ महिला T20 एशिया कप के फ़ाइनल में जगह बनाने पर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपनी टीम के हरफनमौला प्रदर्शन की तारीफ की। भारत ने एक अच्छा स्कोर बनाया और फिर स्पिनर दीप्ति शर्मा की अगुवाई में गेंदबाजों ने बांग्लादेश को रोककर आसानी से जीत हासिल की। ​​हरमनप्रीत ने बल्ले और गेंद, दोनों से मिले योगदान के महत्व पर ज़ोर दिया, खासकर ऐसी मुश्किल पिच पर जहाँ स्पिनरों को मदद मिल रही थी।
 

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हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा कि चीज़ें जिस तरह से चल रही हैं, उससे मैं खुश हूँ। हमारी बैटिंग और बॉलिंग जिस तरह से हो रही है, उससे भी खुश हूँ। अच्छी गेंदों का महत्व था। अगर आप गेंद को स्पिन करा रहे थे, तो उसका फ़ायदा मिल रहा था। आज दोनों टीमों के स्पिनरों ने अच्छी बॉलिंग की; बल्लेबाजों के लिए मुश्किल थी, स्पिनरों ने पिच का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया। भारतीय कप्तान ने छोटी-छोटी साझेदारियों के असर की भी तारीफ़ की और पारी के दौरान ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा के योगदान का ज़िक्र किया।

उन्होंने आगे कहा कि छोटी साझेदारियाँ मायने रखती हैं, खासकर ऐसी पिच पर। ऋचा ने भी कुछ बहुत अच्छे शॉट खेले। दीप्ति ने गेंदबाज़ी में शानदार प्रदर्शन किया और हमें कुछ अहम विकेट दिलाए। अपनी आक्रामक पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' चुनी गईं शैफाली वर्मा ने माना कि उमस भरे मौसम में खेलना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने शांत रहकर और हालात के हिसाब से खेलने पर ध्यान दिया।
 

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शैफाली ने कहा कि वहाँ बहुत उमस थी। कभी-कभी तो साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था, लेकिन मुझे शांत रहना था। शुरुआत में मुझे वैसी गेंदें नहीं मिलीं, इसलिए मैंने ज़मीन के सहारे खेलने की कोशिश की और मुझे कुछ मौके भी मिले। ओपनर ने आगे कहा कि पावरप्ले में आक्रामक खेलना उनकी ज़िम्मेदारी है और उन्होंने टीम को मज़बूत शुरुआत दिलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि पावरप्ले में छक्के और चौके लगाना मेरा काम है - इसलिए मैं वही करने की कोशिश कर रही हूँ। वहीं, बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना ने माना कि पिछले मैचों में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनकी टीम इस मैच में अपनी योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर पाई।
 
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जब हार मानकर ड्रेसिंग रूम में सो गई भारतीय टीम, जागी तो कर दिया बड़ा उलटफेर, मैच जीता पर अवॉर्ड ले गया पाकिस्तानी कप्तान

india miracle win over pak: शारजाह में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा से सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का ज्वार रही है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक ऐसा मैच भी था जहां भारतीय टीम पूरी तरह घुटने टेक चुकी थी, खिलाड़ी रणनीति बनाने के बजाय ड्रेसिंग रूम में गहरी नींद सो रहे थे, और फिर अचानक जागकर उन्होंने इतिहास का सबसे अकल्पनीय चमत्कार कर दिया. यह कहानी है मार्च 1985 की, जब शारजाह के मैदान पर रॉथमैन कप फोर-नेशन टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में एक ऐसा उलटफेर हुआ जो आने वाले 40 सालों के लिए एक मिसाल बन गया. Fri, 11 Sep 2026 16:34:22 +0530

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