‘जाहिल और जमूरे हैं', स्वरा भास्कर के जौहर कमेंट पर भड़के कुमार विश्वास, बिना नाम लिए कही ये बात
Kumar Vishwas-Swara Bhaskar: बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर (Swara Bhaskar) ने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक इवेंट ये के दौरान 'जौहर' प्रथा को लेकर कथित तौर पर विवादित बयान दिया था. स्वरा से जब संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' के एक सीन को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने जौहर प्रथा की कथित तौर पर आलोचना की थी. उनका कहना था कि क्या आप हमारे जैसे समाज में यही बताना चाहते हैं, क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि आप जीने के लायक नहीं थीं? अगर आप सच में इज़्ज़तदार और बहादुर औरतें होतीं, तो आप खुदकुशी कर लेतीं? अब स्वरा के इस कथित विवादित कमेंट पर कुमार विश्वास भड़क गए हैं. उन्होंने स्वरा का नाम लिए बिना उन्हें 'जाहिल और जमूरा' कह दिया है.
‘जाहिल और जमूरे हैं'
कुमार विश्वास ने राजस्थान के इतिहास को दोहराते हुए बिना नाम लिए स्वरा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'अगर आप इन प्रसंगों को अपनी पीढ़ियों नहीं सुनाएंगे तो ये जमूरे और जाहिल हैं. जिन्होंने कुछ पढ़ा नहीं है कुछ जाना नहीं है मिट्टी से प्रेम नहीं किया है, मुंबई में 19वें माले पर बैठकर इस देश के इतिहास और संस्कृति के व्यख्या करते हैं. आप इनसे नाराज होंगे ही नहीं. इसलिए ज्यादा आवश्यक है कि इनके ऊपर ध्यान देने के बजाय आप अपने पीढ़ी को ये इतिहास और बलिदान सिखाएं. मैं खुद आपने परिवार को लेकर चार-पांच-पांच दिन हल्दीघाटी और वृंदावन जैसी सब जगहों पर लेकर जाता हूं. उन्हें इतिहास बताता हूं. कहां किसकी स्वतंत्रता हुई थी.'
इतिहास की कुर्बानियों और गौरव को मिटाया नहीं जा सकता
कुमार विश्वास ने साफ कहा कि किसी फिल्म, कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट से राजस्थान के इतिहास की कुर्बानियों और गौरव को मिटाया नहीं जा सकता. यह इतिहास केवल किताबी नहीं, बल्कि वहां की मिट्टी में रचा-बसा है, जिसे वह 'चंदन' की संज्ञा देते हैं उन्होंने लोगों से अपील की कि दूसरों पर नाराज होने से ज्यादा जरूरी है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास बताया जाए. उन्होंने महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के इतिहास का जिक्र करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि अगर किसी को विश्वभर में अपनी निजता और सम्मान की लड़ाई को समझना है तो उसे कुंभलगढ़ के उस छोटे से कक्ष में जाना चाहिए, जहां महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि उस दौर में युद्ध सिर्फ ये नहीं था कि एक महाराणा को आजाद कराना हो, युद्ध निजता और स्वाभिमान का था. हम किसी और के स्वाभिमान को चुनौती नहीं देते. हम तो मेहमाननवाजी करते हैं.
कई लोगों ने की स्वरा के बयान की अलोचना
स्वरा के जौहर वाले बयान को लेकर चारो-ओर आलोचना हो रही है. मीडिया यूजर्स से लेकर विभिन्न हिंदू संगठनों ने स्वरा भास्कर की तीखी आलोचना की. उनका कहना कि उनके इस बयान को रानी पद्मावती और उन राजपूत महिलाओं के ऐतिहासिक बलिदान अपमान है. जिन्होंने अपनी अस्मत और सम्मान की रक्षा के लिए आग में कूदकर अपनी जान दे दी थी. मुजफ्फरनगर और देश के अन्य हिस्सों में कुछ हिंदू संगठनों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पब्लिक माफी की मांग तक कर की है. वहीं जब ये मामला ज्यादा बढ़ा तो उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या ऐतिहासिक जौहर करने वाली महिलाओं को कभी कायर नहीं कहा, बल्कि उनका सवाल फिल्म के उस संदेश पर था जो महिलाओं के जीवित रहने के हक को कमतर दिखाता है.
जौहर प्रथा को लेकर क्या बोलीं थी स्वारा
स्वरा ने पद्मावत फिल्म के जौहर सीन का ज्रिक करते हुए कहा था, 'मैं यह सब देख रही थी, उन 800 औरतों को जौहर करते हुए, और मैंने सोचा, अगर मैं रेप सर्वाइवर होती, तो यह फ़िल्म मुझे क्या बता रही है? मुझे लगता कि मैं कायर हूं क्योंकि मैंने अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए खुदकुशी नहीं की. क्या आप हमारे जैसे समाज में यही बताना चाहते हैं, जहां मुझे लगता है कि रेप की महामारी फैली हुई है? क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि आप जीने के लायक नहीं थीं? कि अगर आप सच में इज़्ज़तदार और बहादुर औरतें होतीं, तो आप खुदकुशी कर लेतीं? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप का मतलब औरत की ज़िंदगी का अंत है? और फिर एक शॉट था जिसने मुझे बहुत गुस्सा दिलाया, मैंने ऑडियंस के बीच ज़ोर से कहा, 'छी!' उसमें एक प्रेग्नेंट औरत के पेट का क्लोज़ अप था. और मैं सोचने लगी, तो आप यह कह रहे हैं कि एक भ्रूण, जो शायद लड़की हो, वह पैदा होने के लायक नहीं है, क्योंकि हो सकता है कि किसी मुस्लिम शासक द्वारा उसका रेप हो जाए? और फिर मैं बाहर आई और मुझे लगा कि यह बहुत बुरा है. आम तौर पर लोग सोचते हैं कि मैं गुस्से में आकर ऐसी बातें करती हूं. लेकिन मैंने पांच दिन इंतज़ार किया.'
Swara Bhaskar speaks about her letter to filmmaker Sanjay Leela Bhansali on the scene of Jauhar in the movie Padmavat pic.twitter.com/6X4Z0SvFtC
— Yeshi Seli (@YeshiSeli) August 31, 2026
रूस के राष्ट्रपति पुतिन का हाई-टेक सुरक्षा कवच कैसे काम करता है, यूक्रेन युद्ध के बाद क्या-क्या बदला?
भारत इस समय BRICS सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है. दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर हैं और इस बड़े कूटनीतिक आयोजन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल होने वाले हैं. पुतिन के दौरे को लेकर तैयारियां केवल भारत में ही नहीं, बल्कि रूस की तरफ से भी काफी पहले शुरू हो जाती हैं. उनके पहुंचने से पहले रूसी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का भारत आना और एडवांस सिक्योरिटी टीम का दिल्ली पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना इसी सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है.
आखिर पुतिन की सुरक्षा इतनी व्यापक क्यों होती है? उनकी एडवांस टीम क्या करती है और राष्ट्रपति की सुरक्षा सिर्फ हथियारबंद बॉडीगार्ड तक सीमित क्यों नहीं रहती? आइए समझते हैं.
पुतिन की सुरक्षा एक नहीं, कई स्तरों में बंटी होती है
रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को केवल कुछ कमांडो, बख्तरबंद कार या सुरक्षा घेरे से समझना अधूरा होगा. इसके पीछे सुरक्षा अधिकारियों से लेकर मेडिकल टीम, परिवहन व्यवस्था और संचार तंत्र तक कई स्तर काम करते हैं.
राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सबसे अहम मकसद होता है संभावित जोखिमों को पहले ही पहचानना और उन्हें कम करना. इसी वजह से जिस देश में पुतिन जाने वाले होते हैं, वहां उनकी सुरक्षा से जुड़ी तैयारियां उनके पहुंचने से काफी पहले शुरू हो सकती हैं.
एडवांस सिक्योरिटी टीम सबसे पहले क्यों पहुंचती है?
किसी विदेशी दौरे से पहले रूस की सुरक्षा टीम संबंधित देश में पहुंचकर स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करती है. कार्यक्रम स्थल, ठहरने की व्यवस्था, आवागमन और अन्य लॉजिस्टिक पहलुओं को लेकर सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा की जाती है.
इसका एक बड़ा फायदा यह होता है कि राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही संभावित कमजोरियों को चिन्हित किया जा सके. किस स्थान पर कितनी सुरक्षा व्यवस्था चाहिए, स्थानीय प्रशासन के साथ किस तरह तालमेल रहेगा और आपात स्थिति में क्या व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी इन तमाम पहलुओं पर पहले से तैयारी की जाती है.
यानी पुतिन की सुरक्षा उनके विमान के लैंड करते ही शुरू नहीं होती. उसकी एक बड़ी तैयारी पहले ही पूरी की जा चुकी होती है.
होटल से लेकर कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा
विदेश यात्रा में राष्ट्रपति के ठहरने की जगह भी सुरक्षा योजना का अहम हिस्सा होती है. होटल या निर्धारित आवास में सुरक्षा टीम पहले पहुंचकर व्यवस्था का आकलन करती है.
कमरे तक पहुंच, होटल स्टाफ, आने-जाने वाले लोगों और आसपास के माहौल जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है. कार्यक्रम स्थल पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाता है.
इसका उद्देश्य किसी एक संभावित खतरे पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहना होता है.
खाने की सुरक्षा भी क्यों बनती है बड़ा मुद्दा?
पुतिन की सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं में भोजन की जांच का मुद्दा भी अक्सर सामने आता है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में उनके विदेशी दौरों के दौरान विशेष फूड-सिक्योरिटी व्यवस्था का उल्लेख किया गया है.
राष्ट्रपति को परोसे जाने वाले भोजन और पेय की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है. कुछ रिपोर्टों में विशेष शेफ और भोजन की जांच से जुड़े विशेषज्ञों की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया है.
ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि राष्ट्रपति के भोजन से जुड़ा कोई स्वास्थ्य या सुरक्षा जोखिम पैदा न हो.
जैविक सुरक्षा पर भी रहता है फोकस
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में केवल शारीरिक खतरे ही चिंता का विषय नहीं होते. पिछले वर्षों में उनकी सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों में जैविक सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता की चर्चा हुई है.
राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं और उनसे जुड़ी किसी भी सामग्री को लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद सख्त रखे जाने की खबरें सामने आती रही हैं. इसका उद्देश्य संवेदनशील जानकारी या जैविक सामग्री के अनधिकृत हाथों तक पहुंचने की संभावना को कम करना है.
यही वजह है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था उनके आसपास मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनकी यात्रा के दौरान इस्तेमाल होने वाली व्यवस्थाओं और वस्तुओं तक भी फैल जाती है.
पुतिन का काफिला भी होता है खास
राष्ट्रपति के दौरे में परिवहन व्यवस्था भी सुरक्षा का अहम हिस्सा होती है. उनके काफिले में विशेष सुरक्षा सुविधाओं से लैस वाहन इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आती रही है.
इन वाहनों का उद्देश्य राष्ट्रपति को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना होता है. काफिले की योजना भी सामान्य वीआईपी मूवमेंट से अलग स्तर की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है.
BRICS और G20 जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों के दौरान यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि राष्ट्रपति को कम समय में कई बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेना पड़ सकता है.
पुतिन के साथ आने वाले विमान भी चर्चा में रहते हैं
पुतिन की विदेश यात्राओं में रूसी विमानों की मौजूदगी अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है. राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़े विमानों में केवल यात्रा की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आवश्यक लॉजिस्टिक और मेडिकल सपोर्ट की व्यवस्था भी होने की रिपोर्टें सामने आई हैं.
मेडिकल सुविधा का उद्देश्य यह है कि किसी आपात स्थिति में राष्ट्रपति को तत्काल जरूरी सहायता उपलब्ध हो सके. इस तरह विदेशी दौरे के दौरान महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय सिस्टम पर पूरी तरह निर्भरता कम की जाती है.
2022 के बाद सुरक्षा और गोपनीय हुई
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की सुरक्षा और उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर गोपनीयता और बढ़ने की रिपोर्टें सामने आईं. उनकी विदेश यात्राओं की संख्या और कार्यक्रमों को लेकर भी काफी सावधानी बरती जाती है.
जिन स्थानों पर वह जाते हैं, वहां सुरक्षा घेरा मजबूत किया जाता है और उनके आसपास पहुंचने वाले लोगों की जांच की जाती है. बैठक स्थल, आवागमन और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर पहले से विस्तृत तैयारी की जाती है.
हालांकि पुतिन के कथित बॉडी डबल यानी हमशक्लों के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर दावे होते रहे हैं, लेकिन रूस ने ऐसे दावों को खारिज किया है. इसलिए इसे पुष्ट तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक चर्चाओं और दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
भारत दौरे में एडवांस टीम की भूमिका क्यों अहम?
BRICS जैसे बहुपक्षीय सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ नेता एक ही जगह मौजूद होते हैं. ऐसे में हर प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए मेजबान देश और संबंधित देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच करीबी तालमेल जरूरी होता है.
पुतिन की एडवांस टीम का भारत पहुंचना इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है. कार्यक्रम स्थल, ठहरने की व्यवस्था, परिवहन और स्थानीय सुरक्षा इंतजामों को लेकर पहले से समन्वय किया जाना किसी भी बड़े राजनयिक दौरे की सामान्य लेकिन बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है.
सुरक्षा का असली मतलब सिर्फ बंदूकधारी कमांडो नहीं
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर सबसे बड़ा सबक यह मिलता है कि आधुनिक वीआईपी सुरक्षा केवल हथियारबंद गार्डों का घेरा नहीं है. इसमें इंटेलिजेंस, एडवांस प्लानिंग, मेडिकल सपोर्ट, परिवहन, संचार, फूड सेफ्टी और स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे कई पहलू शामिल होते हैं.
राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही संभावित जोखिमों का आकलन करना और यात्रा के दौरान हर चरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखना इस तरह की सुरक्षा का मूल आधार है.
यही कारण है कि पुतिन के भारत आने की खबर के साथ ही उनके विमान और सुरक्षा टीम की गतिविधियां चर्चा में आ जाती हैं. उनके लिए सुरक्षा का मतलब सिर्फ राष्ट्रपति की रक्षा करना नहीं, बल्कि यात्रा के हर चरण को पहले से नियंत्रित और सुरक्षित बनाना है.
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