दुनिया के बड़े नेताओं के स्वागत को तैयार दिल्ली, BRICS Summit में दिखेगा देसी रंग!
दिल्ली इस वीकेंड दुनिया के कई बड़े नेताओं की मेजबानी के लिए तैयार है। 18वें BRICS Summit को लेकर राजधानी में खास तैयारियां चल रही हैं और लग्जरी होटलों से लेकर भारत मंडपम तक हर जगह अलग ही हलचल देखने को मिल रही है। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए इस बार सिर्फ खास इंतजाम ही नहीं किए गए हैं, बल्कि भारत की संस्कृति और मेहमाननवाजी की झलक भी खास अंदाज में दिखाने की तैयारी है।
म्यांमार में बड़ा संकट: सुसाइड ड्रोन हमले के बाद मंडाले इंटरनेशनल एयरपोर्ट दो दिन के लिए बंद
म्यांमार का दूसरा सबसे व्यस्त मंडाले इंटरनेशनल एयरपोर्ट सुरक्षा कारणों और रखरखाव का हवाला देते हुए दो दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. एएफपी को सुरक्षा सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह महत्वपूर्ण फैसला एयरपोर्ट परिसर में हुए एक खतरनाक ड्रोन हमले के ठीक एक दिन बाद लिया गया है. सैन्य समर्थित सरकार ने इस हमले के पीछे लोकतंत्र समर्थक विद्रोहियों का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया है.
गुरुवार को हुआ था सुसाइड ड्रोन हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को छह सुसाइड ड्रोन ने सीधे तौर पर मंडाले एयरपोर्ट के क्षेत्र को अपना निशाना बनाया था.हालांकि सरकारी बयान में यह दावा किया गया था कि सुरक्षा बलों ने समय रहते एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से ड्रोन में मौजूद विस्फोटक सामग्रियों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे किसी भी तरह का बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. इस घटना के बाद कुछ घरेलू उड़ानों के संचालन में जरूर रुकावटें आईं और उनमें देरी दर्ज की गई.
रखरखाव के नाम पर दो दिन की बंदी
मीडिया से खुलकर बात करने के अधिकार के अभाव में नाम न छापने की शर्त पर सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि मंडाले एयरपोर्ट को रविवार तक के लिए पूरी तरह बंद रखा गया है. म्यांमार के एक अन्य एयरपोर्ट पर कार्यरत एक सुरक्षा अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इस बड़े एविएशन हब को केवल रखरखाव के बहाने से अस्थायी तौर पर बंद किया गया है. मध्य म्यांमार का यह एयरपोर्ट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है, हालांकि नागरिक हवाई सुरक्षा समूहों का यह भी कहना है कि इस फैसिलिटी का इस्तेमाल सैन्य जेट विमानों के रनवे के रूप में भी किया जाता है.
तख्तापलट के बाद से सुलग रहा है गृहयुद्ध
गौरतलब है कि साल 2021 में आंग सान सू की की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को अपदस्थ कर सेना द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद से पूरा म्यांमार भयानक गृहयुद्ध की चपेट में है. मौजूदा सैन्य सरकार ने इस हालिया ड्रोन हमले के लिए 'पीपल डिफेंस फोर्सेज' यानी पीडीएफ नामक लोकतंत्र समर्थक विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है. दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले पांच सालों से चल रहे इस खूनी संघर्ष में अब विद्रोही गुट और म्यांमार की सेना दोनों ही आक्रामक रूप से ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, सेना के पास रूसी और चीनी लड़ाकू विमानों की एडवांस ताकत मौजूद है, जो उसे युद्ध के मैदान में बढ़त दिलाती है. दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठन लगातार सेना पर हवाई हमलों के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, और कुछ स्वतंत्र मॉनिटर्स के अनुसार इस पूरे संघर्ष में अब तक एक लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
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