CM Yogi Adityanath ने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत के दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बारिश से खराब सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करें और बरसात के बाद नवीनीकरण का कार्य कराएं। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी और ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने त्योहारों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का कार्य केवल खानापूर्ति न हो बल्कि आवगमन के लायक बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। बयान के मुताबिक बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढा मुक्त के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे। बयान के मुताबिक प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं।
इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली।
साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया। बयान के मुताबिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि गड्ढा मुक्ति अभियान में नौ विभागों के मार्ग शामिल हैं।
इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मांगों को गड्ढा मुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई। योगी ने कहा कि अधिक आवागमन वाली सड़कों पर प्राथमिकता से कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।
Gauhati High Court ने कहा: देश में Talaq-e-Hasan पर रोक नहीं, यह तलाक का वैध तरीका
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा है कि ‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का एक वैध तरीका है और देश में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने एक याचिकाकर्ता को अपने तलाक का पंजीकरण कराने के लिए असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 के तहत बारपेटा क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए दिए गए तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता के अनुसार, उसकी शादी 2016 में हुई थी। बाद में दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर 2018 में अपना ससुराल छोड़ दिया। दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हुईं।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को तीन अलग-अलग तारीखों पर ‘तलाक-ए-हसन’ दिया और फिर कानून के तहत तलाक के पंजीकरण के लिए संबंधित प्राधिकारी से संपर्क किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘तलाक-ए-हसन’ पर कोई प्रतिबंध नहीं है और उसने इसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया है। राज्य सरकार ने हालांकि अदालत से कहा कि 1935 के पुराने कानून को निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत नियुक्त प्राधिकारी का पद भी समाप्त कर दिया गया है इसलिए उस व्यवस्था के तहत अब तलाक का पंजीकरण नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया ‘तलाक-ए-हसन’, तलाक का वैध तरीका है और मौजूदा समय में देश में इस पर प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, अदालत ने 1935 के कानून के तहत बारपेटा में नियुक्त प्राधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह कानून निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत सृजित पद भी समाप्त कर दिया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को 2024 के कानून के तहत संबंधित क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि पंजीयक को यह जांच करनी होगी कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में तलाक दिया है या नहीं और उसे उसकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद वह तय करेगा कि अधिनियम की धारा 12 के तहत तलाक का पंजीकरण किया जाना है या नहीं। अगर पंजीकरण से इनकार किया जाता है तो याचिकाकर्ता 2024 के अधिनियम की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को उचित मंच पर ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने की स्वतंत्रता होगी। याचिकाकर्ता की पत्नी नोटिस दिए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुई। अदालत ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
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