Arthritis: जोड़ों के दर्द और अकड़न से हैं परेशान? राहत के लिए आजमाएं ये 5 आसान आयुर्वेदिक उपाय
Arthritis Ayurvedic Remedies: आर्थराइटिस की समस्या में सिर्फ दर्द कम करना ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाए रखना भी जरूरी होता है। नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, स्ट्रेचिंग और वजन को संतुलित रखना ऑस्टियोआर्थराइटिस में मददगार हो सकता है। दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ ये 5 आसान उपाय जोड़ों को आराम देने में मदद कर सकते हैं।
1. हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करें
जोड़ों में दर्द होने पर पूरी तरह से एक्टिविटी बंद कर देना हमेशा सही नहीं होता। अपनी क्षमता के अनुसार हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग, योग या दूसरी कम असर वाली एक्सरसाइज की जा सकती है।
हालांकि, दर्द बहुत ज्यादा हो या किसी खास मूवमेंट से परेशानी बढ़ती हो, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
2. हल्की गर्म सिकाई से मिल सकता है आराम
जोड़ों में अकड़न महसूस होने पर हल्की गर्म सिकाई कुछ लोगों को आराम दे सकती है। इसके लिए बहुत ज्यादा गर्म पानी या गर्म चीज का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
3. हल्दी को डाइट में शामिल करें
हल्दी का इस्तेमाल भारतीय खान-पान और आयुर्वेदिक परंपरा में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसके फायदे और सही मात्रा को लेकर अभी और मजबूत रिसर्च की जरूरत है। इसलिए हल्दी को सामान्य मात्रा में खाने का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे आर्थराइटिस की दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
4. अदरक का इस्तेमाल करें
अदरक भी पारंपरिक तौर पर दर्द और सूजन से जुड़ी परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे चाय, खाने या सामान्य घरेलू डाइट में शामिल किया जा सकता है। अगर आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो अदरक के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
5. रोज की दिनचर्या में एक्टिव रहें
जोड़ों को लगातार आराम देने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार रोजमर्रा की हल्की गतिविधियां जारी रखना उपयोगी हो सकता है। वॉकिंग, हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज, योग या ताई ची जैसी गतिविधियों से अकड़न और शारीरिक क्षमता में सुधार लाया जा सकता है।
किन बातों का रखें ध्यान?
आर्थराइटिस में हर व्यक्ति के लिए एक जैसा उपाय काम नहीं करता। अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, ज्यादा अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
खासकर आयुर्वेदिक दवाएं या हर्बल सप्लीमेंट खुद से शुरू न करें। कुछ आयुर्वेदिक उत्पादों में ऐसे पदार्थ हो सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हों या दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
(Disclaimer): यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है। बताए गए घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय आर्थराइटिस का इलाज नहीं हैं और इन्हें डॉक्टर की सलाह या चल रहे इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी हर्बल दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, खासकर अगर आप पहले से कोई दवा लेते हैं।
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Basil Plantation: तुलसी के पौधे में डाल दें ये 3 चीजें, कुछ ही दिनों में हो जाएगा हरा-भरा
Basil Plantation: घर की बालकनी या आंगन में लगा तुलसी का पौधा अगर लगातार कमजोर हो रहा है, पत्तियां पीली पड़ रही हैं या पौधे की बढ़त रुक गई है, तो उसकी मिट्टी और देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। कई बार पानी देने के बावजूद पौधा इसलिए नहीं पनपता क्योंकि मिट्टी में पर्याप्त जैविक पोषण नहीं होता। ऐसे में घर पर आसानी से मिलने वाली कुछ प्राकृतिक चीजों का सीमित मात्रा में इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।
तुलसी को हरा-भरा और घना बनाए रखने के लिए सिर्फ खाद डालना ही काफी नहीं है। सही धूप, पानी की मात्रा, गमले में जल निकासी और समय-समय पर छंटाई भी उतनी ही जरूरी है। कुछ घरेलू जैविक चीजों को मिट्टी में मिलाने से पौधे को पोषक तत्व मिल सकते हैं और मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनी रह सकती है।
पहली चीज- गोबर की पुरानी खाद
तुलसी की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाई जा सकती है। यह मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी संरचना बेहतर करने में मदद करती है। ध्यान रखें कि ताजी गोबर की खाद सीधे गमले में न डालें। हमेशा पूरी तरह सड़ी और कम्पोस्ट की हुई खाद का इस्तेमाल करें।
गमले की ऊपरी मिट्टी को हल्का-सा ढीला करके थोड़ी मात्रा में खाद मिलाई जा सकती है। इसके बाद पौधे को जरूरत के अनुसार पानी दें।
दूसरी चीज- वर्मीकम्पोस्ट
वर्मीकम्पोस्ट गमले में लगे पौधों के लिए एक उपयोगी जैविक खाद मानी जाती है। इसमें पौधों के लिए जरूरी कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। तुलसी के गमले में थोड़ी मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इसे गमले की ऊपरी मिट्टी में हल्के हाथ से मिला दें। बहुत ज्यादा खाद डालने के बजाय कम मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है, क्योंकि जरूरत से ज्यादा खाद भी पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।
तीसरी चीज- नीम खली
नीम खली का इस्तेमाल कई बागवानी प्रेमी मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की देखभाल के लिए करते हैं। इसे थोड़ी मात्रा में मिट्टी में मिलाया जा सकता है। नीम खली को हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाली और जैविक स्रोत से लेना बेहतर रहता है।
गमले के आकार के अनुसार थोड़ी मात्रा में नीम खली को मिट्टी की ऊपरी परत में मिलाएं। इसके बाद हल्का पानी दें। बहुत अधिक मात्रा में इसका इस्तेमाल करने से बचें।
सिर्फ खाद से नहीं बनेगा पौधा घना
तुलसी के पौधे को घना बनाने के लिए नियमित छंटाई भी जरूरी है। जब पौधे की ऊपरी शाखाएं बढ़ने लगें, तो उनकी हल्की पिंचिंग करने से साइड शूट निकलने में मदद मिल सकती है। सूखी और पीली पत्तियों को भी समय-समय पर हटा दें।
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लेखक: (कीर्ति)
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