MP Weather: 3 दिन के ब्रेक के बाद फिर बदले मौसम के मिजाज, आज 12 जिलों में बारिश का अलर्ट, शनिवार से भीगेंगे इंदौर-उज्जैन संभाग
मानसून के करवट बदलते ही मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव आ गया है। अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव के चलते शुक्रवार से पूर्वी हिस्से और शनिवार से पश्चिमी हिस्से में बादलों की आवाजाही के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने आज, 11 सितंबर को जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान आकाशीय बिजली के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के मुताबिक, वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र, मानसून ट्रफ और पश्चिमी हिस्से मेंचक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके असर से आज जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसम बदला रहेगा वहीं शनिवार, 12 सितंबर से इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश की गतिविधियां में इजाफा देखने को मिलेगा। बारिश के इस दौर से बारिश के आंकड़ों में सुधार होने की उम्मीद है। खास करके पश्चिमी हिस्से में स्थिति बेहतर हो सकती है चुंकी पश्चिमी मध्य प्रदेश में अब भी औसत से 13% कम बारिश हुई है।
मध्य प्रदेश में अब भी कोटे से 8 % कम बारिश
1 जून से 10 सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 31.3 इंच बारिश (795.3 मिमी) हुई है, जबकी अबतक 33.9 इंच (862.5 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से 2.4 इंच यानि 8% बारिश कम हुई है। जून से अबतक पूर्वी मध्य प्रदेश में 2% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 13% कम पानी गिरा है। इस सीजन में सबसे अधिक मऊगंज में 53 इंच और सबसे कम आलीराजपुर में सिर्फ 13.6 इंच बारिश हुई है।
- अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश बारिश। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से भी कम पानी गिरा है।
सीहोर में क्लोरीन गैस रिसाव: तीनों सिलेंडर हटाए गए, 4 ग्रामीण अस्पताल में भर्ती, कई को सांस लेने में दिक्कत
सीहोर के लसूड़िया खास गांव में काहिरी बांध के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हुए क्लोरीन गैस रिसाव की घटना के दो दिन बाद अब स्थिति को लेकर नया अपडेट सामने आया है। गैस रिसाव के बाद आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के चलते कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया था।
यह घटना मंगलवार रात हुई थी, जब प्लांट में रखे क्लोरीन सिलेंडरों को हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान आसपास गैस फैलने की बात सामने आई और लसूड़िया खास सहित आसपास के लोगों को परेशानी होने लगी। अब जबकि सिलेंडरों को प्लांट से हटा दिया गया है, लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गैस का रिसाव किस वजह से हुआ और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं।
क्लोरीन गैस लीक के बाद 8 से 10 लोग अस्पताल पहुंचे
घटना के बाद लसूड़िया खास गांव और आसपास के इलाके से करीब 8 से 10 लोग सीहोर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे थे। लोगों ने आंखों में तेज जलन, घुटन और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें बताई थीं। इनमें से 4 लोगों को डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा। कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हरिओम गुप्ता के अनुसार, गैस के संपर्क में आए लोगों का इलाज किया गया और भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर रखी गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी मरीज को गंभीर चोट नहीं आई। घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले लोगों में गैस के असर को लेकर डर भी देखा गया।
हटाए तीनों क्लोरीन सिलेंडर
क्लोरीन गैस लीक की घटना के बाद सबसे अहम कार्रवाई प्लांट में रखे सिलेंडरों को हटाने को लेकर हुई। सीहोर नगर पालिका के सीएमओ सुधीर सिंह के अनुसार, ग्रासिम कंपनी नागदा की टेक्निकल टीम ने तीनों सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक ट्रक में रखकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर भेज दिया है।
सिलेंडरों को हटाने का काम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि गैस रिसाव के बाद आसपास रहने वाले ग्रामीणों में दोबारा ऐसी घटना को लेकर चिंता बनी हुई थी। अब सिलेंडर हटाए जाने के बाद तत्काल खतरे की स्थिति कम होने की बात कही जा रही है। हालांकि, रिसाव की असली वजह और जिस प्रक्रिया के दौरान गैस बाहर आई, उसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना अभी जरूरी है।
ग्रामीणों और अधिकारियों के दावों में अंतर
घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अधिकारियों की बातों में अंतर भी सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि प्लांट के आसपास गैस का असर महसूस हुआ और कुछ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सिलेंडर से गैस निकालने की प्रक्रिया के दौरान ही आसपास के इलाके में क्लोरीन का असर पहुंचा।
वहीं नगर पालिका की ओर से बताया गया कि टेक्निकल टीम ने सिलेंडरों को सुरक्षित तरीके से हटाने की कार्रवाई की है। ऐसे में क्लोरीन गैस लीक की घटना की पूरी वजह को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। खासकर यह जानना जरूरी है कि गैस किस जगह से लीक हुई, कितनी मात्रा में बाहर निकली और आसपास के लोगों तक उसका असर कैसे पहुंचा।
क्लोरीन गैस रिसाव का असर और बचाव
क्लोरीन गैस का रिसाव होने पर सबसे पहले आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में जलन और घुटन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों को तुरंत गैस वाले इलाके से दूर खुले और सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
आंखों में जलन हो तो साफ पानी से आंखें धोना चाहिए और सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। गैस के संपर्क में आए कपड़ों को बदलकर प्रभावित हिस्से को पानी से साफ करना भी जरूरी है।
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