Mundhwa land deal: Rohit Pawar बोले, Parth Pawar को अब पता चलेगी BJP की राजनीति
बंबई उच्च न्यायालय के मुंधवा जमीन सौदे से जुड़े मामले में राकांपा सांसद पार्थ पवार को आरोपी न बनाए जाने का जिक्र करने वाली जमानत अर्जी पर महाराष्ट्र पुलिस से जवाब तलब करने के कुछ दिनों बाद राकांपा (शप) नेता रोहित पवार ने बृहस्पतिवार को कहा कि पार्थ अब “करीब से” जान पाएंगे कि भाजपा की राजनीति क्या है। रोहित रिश्ते में पार्थ के भाई लगते हैं। अजित पवार के नेतृत्व में पार्टी में बगावत के बाद हुए विभाजन के दौरान रोहित शरद पवार नीत खेमे में बने रहने का फैसला किया था।
रोहित ने पार्थ से मामले को लेकर एक संवददाता सम्मेलन आयोजित करने और तथ्य स्पष्ट करने का सुझाव दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने मुंधवा जमीन सौदे के मामले में सोमवार को दो आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए राज्य पुलिस से जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया है कि राज्यसभा सदस्य एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ को आरोपी नहीं बनाया गया है, जबकि उनके व्यापार साझेदार दिग्विजय पाटिल को मामले में नामजद किया गया है।
नागपुर में संवाददाताओं ने जब रोहित से इस घटनाक्रम के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह उच्च न्यायालय में लंबित मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन पार्थ पवार को प्रेस वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “पार्थ को लोगों को बताना चाहिए कि असलियत क्या है और हालात क्या हैं... पहले, जब (पार्थ के दिवंगत पिता) अजीत पवार जीवित थे, तब वह मीडिया के सामने जाकर सारी बातें साफ-साफ बताते थे। इसलिए मुझे लगता है कि अब पार्थ को भी प्रेस वार्ता करनी होगी।” रोहित ने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित मामले में राज्य पुलिस को जवाब दाखिल करना है।
उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी किस विभाग के होते हैं? वे गृह विभाग के होते हैं। गृह विभाग की कमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथ में है।
अब पार्थ पवार को पता चल जाएगा कि भाजपा की राजनीति क्या है।” पार्थ के सह-स्वामित्व वाली कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी पर आरोप है कि उसने पुणे के मुंधवा इलाके में एक प्रमुख भूखंड बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर और बिना स्टाम्प ड्यूटी चुकाए गैर-कानूनी तरीके से खरीदा। हालांकि, बाद में यह सौदा रद्द कर दिया गया।
CEC Gyanesh Kumar का वादा, अगले Lok Sabha चुनाव से पहले सुलझेंगी नाम कटने की सभी शिकायतें
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद नाम हटाए जाने से संबंधित प्राप्त शिकायतों का अगले लोकसभा चुनाव से पहले ‘‘110 प्रतिशत’’ समाधान कर दिया जाएगा। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन में आयोजित एक कार्यक्रम में कुमार ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को आलोचना करने का अधिकार है। गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर आए कुमार ने कहा, ‘‘हमें हर दिन इन गोलियों (आलोचनाओं) को झेलने के लिए और मजबूत कंधे रखने चाहिए।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मिली हजारों शिकायतों का समाधान अगले लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है, कुमार ने विश्वास के साथ कहा, ‘‘110 प्रतिशत।’’ उन्होंने कहा कि एसआईआर इससे पहले 2003-04 में भी हुआ था।
कुमार ने कहा, ‘‘हमारा ध्यान उन लोगों के नाम हटाकर मतदाता सूची को साफ करना है जो अनुपस्थित हैं, स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम दोहराए गए हैं और जो विदेशी हैं। एक संवैधानिक संस्था के रूप में हम दस्तावेजों पर निर्भर करते हैं। आपको यह साबित करने के लिए अपने या अपने माता-पिता के दस्तावेज देने होंगे कि आप भारतीय हैं।’’ कुमार ने कहा कि दो तरह की स्थिति हो सकती है - या तो किसी व्यक्ति के पास दस्तावेज नहीं हैं या वह विदेशी है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है तो आप एसडीएम के पास शिकायत कर सकते हैं। अगर वहां शिकायत खारिज हो जाती है तो आप जिलाधिकारी के पास अपील कर सकते हैं और दूसरी अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के पास की जा सकती है। इसके बाद आप अदालत जा सकते हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi






