भास्कर अपडेट्स:ठाणे में BJP विधायक का स्कूल बोला- पर्यूषण पर्व के दौरान टिफिन में प्याज-लहसुन, आलू न रखें लाएं, विरोध पर निर्देश वापस
में BJP MLA द्वारा चलाए जा रहे एक स्कूल को गुरुवार को एक सर्कुलर वापस लेना पड़ा। इस सर्कुलर में छात्रों को सलाह दी गई थी कि वे जैन समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले 'पर्यूषण' पर्व के दौरान अपने लंचबॉक्स में प्याज, लहसुन, आलू और चुकंदर जैसी जड़ वाली सब्जियां न लाएं। इस सर्कुलर से विवाद खड़ा हो गया और MNS समेत स्थानीय राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया। वहीं शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस पाबंदी को "लव जिहाद से भी बुरा" बताया और सरकार से स्कूल बंद करने की मांग की। MNS प्रवक्ता योगेश खैरे ने इस सर्कुलर को "फूड जिहाद" का एक रूप बताया। हालांकि इस आदेश को वापस ले लिया गया है। मीरा-भायंदर के MLA नरेंद्र मेहता, 'सेवन स्क्वायर एकेडमी' चलाते हैं। मेहता ने कहा कि स्कूल ने छात्रों से केवल इन खाद्य पदार्थों से बचने का अनुरोध किया था, न कि कोई आदेश जारी किया था। आज की बाकी बड़ी खबरें… सभी पायलटों का एक बार ड्रग टेस्ट कराएं एयरलाइंस एअर इंडिया के एक पायलट का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद डीजीसीए ने सभी एयरलाइंस को अगले साल जुलाई तक सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं। एयरलाइंस ने जांच शुरू कर दी है। 4 अगस्त को फुकेट से भारत आई एअर इंडिया की एयरबस ए320 उड़ान 300 फीट नीचे आ गई थी। लैंडिंग के बाद कैप्टन का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव मिला। मंत्री के. राममोहन नायडू बोले- संशोधित नियम इसी माह के अंत तक तैयार होंगे।
मेंटल हेल्थ- रात होते ही एक्टिव होता दिमाग:नींद नहीं आती, ऑफिस से लेकर भविष्य और मौत तक की चिंता सताती है, क्या करूं
सवाल– मैं 34 साल की हूं और एक आईटी कंपनी में काम करती हूं। दिन भर तो मैं ऑफिस के कामों में व्यस्त रहती हूं, लेकिन जैसे ही रात में बिस्तर पर जाती हूं, मेरा दिमाग सुपर एक्टिव हो जाता है। दिमाग में दिन भर की बातें घूमने लगती हैं। कौन-सा काम अधूरा रह गया, बॉस ने क्या कहा, कल क्या करना है। यहां तक कि नई-पुरानी जाने कहां-कहां की बातें आने लगती हैं। किसी इनविजिबल फ्यूचर और मौत तक का डर सताने लगता है। मैं चाहकर भी अपने दिमाग को रोक नहीं पाती और इन्हीं सबके बारे में सोचती रहती हूं। कई बार दो-तीन घंटे तक नींद नहीं आती। क्या ये स्ट्रेस है या किसी मेंटल हेल्थ इशु के कारण है? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रात में सोने के समय दिमाग में तरह–तरह के विचार आना काफी कॉमन है। दिनभर हमारा दिमाग काम में बिजी होता है। ईमेल, मीटिंग, फोन, डेडलाइन और छोटे-बड़े फैसले ब्रेन को लगातार सक्रिय रखते हैं। यानी शरीर भले ही थक रहा हो, दिमाग को रुकने का मौका नहीं मिलता। फिर रात में काम खत्म होता है और हम बिस्तर पर पहुंचते हैं। तब बाहर की हलचल तो थम जाती है, लेकिन दिमाग इतनी जल्दी शांत नहीं होता। दिन भर जिन बातों पर ध्यान देने का समय नहीं मिला, वे एक-एक करके याद आने लगती हैं। रात में ब्रेन ओवरएक्टिव होने के पीछे ये संभावित कारण हो सकते हैं– रात में कौन से विचार आते हैं? रात के समय ब्रेन में दो तरह की चीजें एक्टिव हो सकती हैं– 1. बार-बार पुरानी बातों को दोहराना बार–बार पुरानी या एक ही तरह की बातों को दोहराते रहने को रुमिनेशन कहते हैं। मसलन— 2. भविष्य की चिंता करना यह चिंता है। इसमें दिमाग बार-बार भविष्य की संभावित परेशानियों के बारे में सोच–सोचकर परेशान होता है, जैसेकि– रुमिनेशन और चिंता, दोनों मिलकर दिमाग को लगातार सक्रिय रख सकते हैं। इसका संबंध एंग्जाइटी, डिप्रेशन या इंसोम्निया के साथ भी देखा गया है। लेकिन सिर्फ ज्यादा सोचने का मतलब कोई मानसिक बीमारी होना नहीं है। जितना रोकेंगे, विचार उतने ही ज्यादा आएंगे मान लीजिए कोई आपसे कहे कि अगले एक मिनट तक गुलाबी हाथी के बारे में बिल्कुल मत सोचिए। संभव है कि सबसे पहले आपके दिमाग में गुलाबी हाथी ही आए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विचार को रोकने के लिए दिमाग बार-बार जांचता है कि कहीं वही विचार तो नहीं आ रहा। इससे वह विचार और ज्यादा सक्रिय हो सकता है। यही बात रात में भी हो सकती है। आप खुद से कहें– “मुझे बिल्कुल नहीं सोचना है। मुझे अभी सोना है।” लेकिन दिमाग उसी विचार की निगरानी करने लगता है। इसलिए विचारों से लड़ने की बजाय उन्हें पहचानना बेहतर है। खुद से कहें— “मेरे दिमाग में यह विचार आया है। मुझे इसे अभी हल करने की जरूरत नहीं है।” क्या यह OCD (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) है? सिर्फ बार-बार सोचने का मतलब OCD नहीं है। OCD में विचार अक्सर व्यक्ति की इच्छा के खिलाफ आते हैं। वे परेशान करने वाले होते हैं और व्यक्ति को उनसे छुटकारा पाने या पूरी तरह आश्वस्त होने की जरूरत महसूस हो सकती है। इसके बाद व्यक्ति कुछ काम बार-बार कर सकता है, जिसे कंपल्शन कहते हैं। ये दो तरह के हो सकते हैं— फिजिकल कंपल्शन जैसेकि बार-बार हाथ धोना, ताला चेक करना, चीजों को खास तरीके से लगाना या बार-बार वापस जाकर देखना। मेंटल कंपल्शन जैसेकि मन–ही–मन गिनती करना, किसी शब्द या प्रार्थना को दोहराना, पुरानी घटना को बार-बार याद करके जांचना या अपनी भावनाओं को बार-बार परखना। मेंटल कंपल्शन बाहर से दिखाई नहीं देते। लेकिन इनमें भी काफी समय जा सकता है। OCD में इन कामों से थोड़ी देर के लिए राहत मिलती है। फिर वही संदेह या बेचैनी वापस आ सकती है। ये ओवरथिंकिंग है या OCD करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले दो हफ्तों को ध्यान में रखकर नीचे दिए सवालों का जवाब दें। नीचे ग्राफिक्स में दो सेक्शन में कुल 10 सवाल हैं। पहले सेक्शन में ‘ओवरस्टिमुलेशन और रूमिनेशन’ से जुड़े सवाल हैं और दूसरे सेक्शन में OCD से जुड़े सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग हर दिन' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपना स्कोर टोटल करें। नीचे ग्राफिक के बाद स्कोर की एनालिसिस देखें। स्कोर इंटरप्रिटेशन सेक्शन A में अगर स्कोर 9 या उससे ज्यादा है तो इसका मतलब है कि ओवरस्टिमुलेशन और रूमिनेशन मुख्य समस्या हो सकती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। सेक्शन B में अगर सवाल 8 और 10 का अंक 2 या 3 है तो OCD (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) मुख्य समस्या हो सकती है। नींद पर असर कितना गंभीर? अगर रात में ये चीजें हो रही हैं तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है– ऐसे में आप 14 दिन की स्लीप डायरी बनाएं और उसमें रोज लिखें— साथ ही ये बातें समझना भी जरूरी है– रात में ब्रेन को शांत करने के 6 स्टेप्स 1. सोने से 2 घंटा पहले काम बंद करें काम खत्म करते समय एक छोटी-सी सूची बनाएं— इससे दिमाग को यह भरोसा मिलता है कि कोई जरूरी बात भूली नहीं है। उन्हें लिख लिया गया है। 2. सोने से पहले 45-60 मिनट का शांत समय रखें इस दौरान ऑफिस का काम, ईमेल और बहुत ज्यादा उत्तेजित करने वाली स्क्रीन गतिविधियों से दूर रहें। दिमाग को काम से आराम की स्थिति में आने का समय दें। 3. सोचने, चिंता करने का टाइम फिक्स करें शाम को करीब 20 मिनट का समय “सोचने के लिए” फिक्स करें। अपनी हर चिंता के बारे में खुद से पूछें— क्या यह ऐसी समस्या है, जिसे मैं अभी हल कर सकती हूं? अगर हां, तो एक छोटा कदम तय करें। अगर यह सिर्फ “अगर ऐसा हो गया तो?” वाली चिंता है तो उसे लिख लें और उस समय आगे न बढ़ाएं। रात में खुद से कहें— “यह बात मैंने लिख ली है। इसे अभी हल करने की जरूरत नहीं है।” 4. विचार आए तो उसे पहचानें दिमाग में विचार आते ही खुद से कहें— “मेरा दिमाग मीटिंग को दोबारा चला रहा है।” या “यह भविष्य की चिंता है।” अपने विचार को रोकने की कोशिश न करें। उसे पहचानें और अपना ध्यान धीरे से वर्तमान में वापस लाएं। 5. बिस्तर को चिंता की जगह न बनाएं बिस्तर पर तभी जाएं, जब नींद आने लगे। अगर काफी देर तक नींद नहीं आ रही, तो बिस्तर से उठकर हल्की रोशनी वाली जगह पर शांत काम करें। नींद आने लगे तो वापस बिस्तर पर जाएं। बार-बार घड़ी न देखें। इससे नींद को लेकर चिंता बढ़ सकती है। 6. नींद की बुनियादी आदतें सुधारें डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? अगर नींद की समस्या कई महीनों से बनी हुई है और काम या रिश्तों पर असर पड़ रहा है तो मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की सलाह लें। अंतिम बात हमारा लक्ष्य दिमाग को पूरी तरह खाली करना नहीं है। विचार आना सामान्य है। हमें यह सीखना है कि हर विचार को खींचना या पकड़कर उसका विश्लेषण करने लगना जरूरी नहीं है। विचारों को आने दें, उन्हें पहचानें और फिर उन्हें जाने दें। *************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………… मेंटल हेल्थ की ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ- बॉयफ्रेंड ने बिना कारण बताए ब्रेकअप कर लिया: तब से डिप्रेशन में हूं, उसे भूल नहीं पा रही, जिंदगी में आगे कैसे बढूं तीन साल का रिश्ता खत्म होने पर दुख होना स्वाभाविक है। यह किसी बेहद अपने को खोने जैसा अनुभव हो सकता है। इसके बाद मन में खालीपन, उदासी और बहुत सारे सवाल भी आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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