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Shivpal Yadav | RLD के संपर्क में शिवपाल यादव? दावे पर बवाल! UP की सियासत में बड़ा खेल? RLD

Shivpal Yadav | RLD के संपर्क में शिवपाल यादव? दावे पर बवाल! UP की सियासत में बड़ा खेल? RLD #ShivpalYadav #RLD #AkhileshYadav #SamajwadiParty #UPPolitics #UPElection2027 #JayantChaudhary #UttarPradesh #UPNews #PoliticalNews #LatestNews #HindiNews #News18 #News18UP उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। RLD की ओर से शिवपाल यादव को लेकर बड़ा दावा किया गया है कि वह RLD के संपर्क में हैं। इस दावे के बाद यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सवाल है कि क्या शिवपाल यादव और RLD के बीच वाकई कोई सियासी बातचीत चल रही है? क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में नया गठबंधन देखने को मिल सकता है? इस दावे का समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की रणनीति पर क्या असर पड़ेगा? news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh Follow Every Breaking Story LIVE ???? Watch News18 LIVE 24x7: https://youtube.com/live/pVXYxHNwJo8 SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP                https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/                       https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|

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750+ फिल्में कीं, स्टार बने, गरीबी का डर नहीं गया:रवि किशन बोले- सेवन स्टार होटल में अच्छा खाना ऑर्डर करने से डरता हूं

एक मिट्टी के घर से निकला लड़का, परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ, खेत गिरवी और पेट भरने के लिए 12 लोगों के बीच एक खिचड़ी। फिर मुंबई का सफर, जहां वड़ा पाव और चाय के सहारे दिन गुजरे और 15 साल तक काम के बदले सम्मानजनक पैसे नहीं मिले। यही रवि किशन की उस जिंदगी की तस्वीर है, जिसे वे आज भी भूल नहीं पाए हैं। कभी काम पाने के लिए संघर्ष करने वाले रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा में स्टारडम हासिल किया, हिंदी फिल्मों और OTT में पहचान बनाई और अब राजनीति में भी सक्रिय हैं। 750 से ज्यादा फिल्मों का सफर तय कर चुके रवि किशन आज गोरखपुर से दूसरी बार लोकसभा सांसद हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में रवि किशन के जीवन और करियर से जुड़ी कुछ और खास बातें। मिट्टी के घर से शुरू हुई कहानी रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई (तब बॉम्बे) में हुआ, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनका बचपन उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बीता। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। खेत गिरवी था और घर की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही थीं। बाद में अभिनय को अपना सपना बनाकर उन्होंने मुंबई का रुख किया। रवि किशन ने अपने संघर्ष को याद करते हुए बताया है कि उनका परिवार बेहद गरीबी में रहा। एक समय ऐसा था जब 12 लोगों के लिए एक ही खिचड़ी बनती थी और उसमें पेट भरने के लिए पानी मिला दिया जाता था। शुभांकर मिश्रा से बातचीत में रवि किशन ने कहा था- घनघोर गरीबी देखी। हम लोग घनघोर गरीबी वाले। एक ही खिचड़ी बन रही है, उसमें 12 लोग खा रहे हैं, पानी भर के।” उनके मुताबिक गरीबी सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं थी, बल्कि वह अनुभव उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया। 17 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे रवि किशन को बचपन से एक्टिंग का शौक था। गांव में रामलीला में वो मां सीता का रोल निभाते थे और इसके लिए मां की साड़ी पहनते थे। जब उनके पुजारी पिता ने उन्हें सीता के रोल में देखा तो बेल्ट से बहुत मारा, जिससे उनकी चमड़ी छिल गई। इसके बाद मां ने डरकर 500 रुपए दिए और कहा कि बेटा भाग जा, नहीं तो आज मारा जाएगा। अपनी जान बचाने के लिए वो घर से भागे और ट्रेन पकड़कर मुंबई पहुंच गए। उस समय रवि 17 साल के थे। ‘लोग चलकर आते हैं, मैं रेंग कर आया हूं’ मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री की चमक के पीछे का संघर्ष उन्होंने करीब से देखा। यहां न कोई बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड था, न मजबूत आर्थिक सहारा और न ही इंडस्ट्री में पहचान। रवि किशन कहते हैं- लोग चलकर आते हैं, मैं रेंगकर आया हूं। जब मैं मुंबई आया था, तब ये बंबई हुआ करता था। पापा मेरे ऐक्टिंग करियर के खिलाफ थे। वे कहते थे- 'नचनिया बनबे का रे'। वे चाहते थे कि मैं खेती करूं, सरकारी नौकरी करूं या दूध बेचूं। लेकिन मुझे इन चीजों में दिल नहीं लगता था। मुझे बस डांस में मजा आता था। ये मेरा गॉड गिफ्ट था। मैं इसी राह पर चलता गया। इसमें बहुत वक्त लगा। हिंदी सिनेमा में काम मिला, लेकिन पहचान नहीं रवि किशन ने 1990 के दशक में हिंदी फिल्मों से अभिनय करियर की शुरुआत की। ‘पीतांबर’ आग का तूफान', 'रानी और महारानी', 'जख्मी दिल', 'उधार की जिंदगी,' आतंक, कोई किसी से कम नहीं, अग्नि मोर्चा जैसी फिल्में कीं। लेकिन इन फिल्मों से न तो खास पहचान मिली, न सम्मानजनक मेहनताना। रवि किशन के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में करीब 15 साल तक उन्हें काम के बदले वह पैसा नहीं मिला, जिसे वे सम्मानजनक मेहनताना मानते थे। फिल्म 'तेरे नाम' से रवि किशन को मिली पहचान हिंदी फिल्मों में रवि किशन ने दर्शकों का ध्यान तब खींचा, जब वो फिल्म ‘तेरे नाम’ में पंडित रमेश्वर के रोल में नजर आए थे। रवि किशन ने बताया था कि यह फिल्म उन्हें कैसे मिली। एक बार वे नितिन मनमोहन के ऑफिस में डायरेक्टर सतीश कौशिक से मिले। सतीश कौशिक ने कहा था कि उन्हें ऐसा लड़का चाहिए जो पंडित का किरदार निभाए और भूमिका चावला का मंगेतर बने। रवि किशन ने बिना देर किए हामी भर दी। उन्होंने बताया था कि सतीश कौशिक ने बाल कटवाने को कहा तो भी वे तुरंत तैयार हो गए। ‘तेरे नाम’ के लिए रवि किशन को नेशनल अवॉर्ड का नॉमिनेशन मिला था। बार-बार अपमानित होना पड़ता था लेकिन लगातार काम मिलने के बावजूद रवि किशन को वह पहचान नहीं मिल रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी। यही वह दौर था जब एक अभिनेता के तौर पर खुद को साबित करने के साथ-साथ उन्हें समझना पड़ा कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं होती। भाषा, बैकग्राउंड, पहचान और मौके भी मायने रखते हैं। रवि किशन ने अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हजारों बार अपमान झेला है। रवि किशन कहते हैं- “लोग एक-दो बार ह्यूमिलिएट होते हैं, मैं हजारों बार हुआ हूं। ये सब अद्भुत है जीवन का रंग। भोजपुरी सिनेमा ने बदल दी जिंदगी हिंदी फिल्मों में लंबे संघर्ष के बाद रवि किशन को भोजपुरी सिनेमा में बड़ा मौका मिला। 2003 में उन्होंने मोहनजी प्रसाद की फिल्म 'सैयां हमार’ से भोजपुरी सिनेमा में कदम रखा। हालांकि, शुरुआत में वे इस इंडस्ट्री को लेकर आश्वस्त नहीं थे, लेकिन परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें भोजपुरी फिल्मों की ओर जाने के लिए तैयार किया। यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। भोजपुरी सिनेमा में उन्हें ऐसा दर्शक मिला, जिसने उन्हें स्टार बना दिया। वे लगातार फिल्मों में नजर आने लगे और उनकी लोकप्रियता उत्तर भारत के बड़े हिस्से तक पहुंच गई। खुद रवि किशन के मुताबिक, एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगातार फिल्मों के ऑफर मिलने लगे और वे एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग तक करते थे। जिस अभिनेता को हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक पहचान के लिए इंतजार करना पड़ा था, वही भोजपुरी सिनेमा में बड़ा नाम बन गया। यहीं से उनके करियर का दूसरा अध्याय शुरू हुआ। भोजपुरी स्टार से मल्टी-लैंग्वेज अभिनेता भोजपुरी में स्टार बनने के बाद रवि किशन ने खुद को सिर्फ एक भाषा की फिल्मों तक सीमित नहीं रखा। हिंदी के साथ उन्होंने तेलुगु, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। ‘फिर हेरा फेरी’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘रावण’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘बुलेट राजा’, ‘मुक्केबाज’, ‘बटला हाउस’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदार नजर आए। हिंदी फिल्मों के अलावा रवि ने ‘रेस गुर्रम’, ‘ओक्का अम्मई तप्पा’, ‘साक्ष्यम’, ‘हेब्बुली’, ‘स्केच’ जैसी कई साउथ की फिल्मों में काम किया। रवि के करियर की खासियत यही रही कि उन्होंने सिर्फ हीरो बनने पर जोर नहीं दिया। उन्होंने सपोर्टिंग रोल, विलेन और कैरेक्टर रोल भी स्वीकार किए। यही वजह है कि समय के साथ उनकी पहचान सिर्फ भोजपुरी स्टार की नहीं रही, बल्कि ऐसे अभिनेता की बनी जो किसी भी किरदार में अपनी छाप छोड़ सकता है। टीवी और OTT ने दिखाई अभिनय की नई रेंज फिल्मों के साथ रवि किशन ने टीवी और ओटीटी पर भी काम किया। रंगबाज़, हसमुख, मत्स्य कांड, द व्हिसलब्लोअर, खाकी: द बिहार चैप्टर और मामला लीगल है जैसे प्रोजेक्ट्स ने उनके अभिनय के अलग-अलग रंग दिखाए। खासकर मामला लीगल है में वीडी त्यागी के किरदार ने उन्हें डिजिटल दर्शकों के बीच मजबूत पहचान दी। इसके बाद लापता लेडीज में पुलिस अधिकारी श्याम मनोहर के किरदार ने उनके अभिनय की नई रेंज सामने रखी। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली और रवि किशन के प्रदर्शन की खूब चर्चा हुई। जिस अभिनेता का करियर कभी सिर्फ भोजपुरी स्टार के तौर पर देखा जाता था, उसने धीरे-धीरे खुद को हिंदी सिनेमा और ओटीटी के मजबूत कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर स्थापित किया। 750 से ज्यादा फिल्मों का सफर रवि किशन के करियर का सबसे बड़ा आंकड़ा उनकी फिल्मों की संख्या है। वे कई भाषाओं में 750 से ज्यादा फिल्मों में काम करने का दावा करते हैं और उनकी फिल्मोग्राफी में हिंदी, भोजपुरी के अलावा तेलुगु, तमिल और कन्नड़ सिनेमा भी शामिल है। लेकिन उनके लिए सफलता सिर्फ फिल्मों की संख्या नहीं है। उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा यह है कि उन्होंने असफलता, रिजेक्शन और आर्थिक संघर्ष के बावजूद काम करना नहीं छोड़ा। जिस दौर में काम के बावजूद उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं था और जिस दौर में एक फिल्म के किरदार के लिए उनकी तारीफ हुई, इन दोनों के बीच उन्होंने खुद को लगातार बदला। गरीबी आज भी रवि किशन के साथ है रवि किशन की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि करोड़ों की संपत्ति, स्टारडम और सांसद बनने के बाद भी उनके अंदर का संघर्षरत लड़का पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। वे बताते हैं कि आज भी सेवन स्टार होटल में जाने पर महंगा खाना ऑर्डर करने में उन्हें संकोच होता है। वे खिचड़ी खाना पसंद करते हैं। यहां तक कि कपड़े लॉन्ड्री में देने में भी उन्हें हिचक होती है। रवि किशन कहते हैं- “अभी भी सेवन स्टार होटल में जाता हूं, तो मैं अच्छा भोजन ऑर्डर नहीं करता, अभी भी खिचड़ी ऑर्डर करता हूं।” वे बताते हैं कि खुद पर खर्च करने की तुलना में परिवार पर खर्च करने में उन्हें ज्यादा खुशी मिलती है। पत्नी और बच्चे उनके लिए फोन, कपड़े और जूते जैसी चीजें खरीदते हैं, जबकि वे परिवार की जरूरतों और इच्छाओं पर खुलकर खर्च करते हैं। उनके शब्दों में, गरीबी से वे बाहर निकल गए, लेकिन गरीबी की मानसिकता आज भी उनके भीतर कहीं मौजूद है। अपमान को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया रवि किशन की सफलता में एक और चीज अहम रही- उन्होंने अपने संघर्ष को लेकर कड़वाहट नहीं रखी। वे मानते हैं कि जिंदगी में मिले अपमान और रिजेक्शन ने उन्हें मजबूत बनाया। उनके मुताबिक, छोटी उम्र में संघर्ष इंसान को जल्दी परिपक्व करता है। वे कहते हैं- “कच्ची उम्र में बेइज्जती भी सही होती है। बड़ा मजबूत बना देती है, परिपक्व कर देती है। जो संघर्ष नहीं देखता, वो बाद में कहीं न कहीं पैनिक कर जाता है।” यही सोच उनके करियर में दिखाई देती है। उन्होंने अपने खिलाफ जाने वाली परिस्थितियों को अपनी पहचान बनने नहीं दिया। हिंदी में सीमित मौके मिले तो भोजपुरी में गए, वहां स्टार बने तो वापस हिंदी और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में अपनी जगह बनाई। OTT आया तो वहां भी नए किरदार स्वीकार किए। राजनीति में एंट्री, पहली हार और फिर वापसी फिल्मों में सफलता के बाद रवि किशन ने राजनीति में कदम रखा। 2014 में कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सिर्फ करीब 4.25% वोट मिले और हार का सामना करना पड़ा। फरवरी 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद 2019 में गोरखपुर से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत के साथ पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2024 में उन्होंने सपा की काजल निषाद को हराकर लगातार दूसरी बार गोरखपुर सीट जीती। आज भी किरदारों की तलाश जारी रवि किशन की कहानी गरीबी, रिजेक्शन और संघर्ष से निकलकर भोजपुरी सिनेमा, बॉलीवुड, OTT और संसद तक पहुंचने की है। आज वे ‘लापता लेडीज’ के श्याम मनोहर, ‘मामला लीगल है’ के वीडी त्यागी और ‘मिर्जापुर- द मूवी’ के बाब्बन बाबुआ जैसे अलग-अलग किरदारों से दर्शकों के बीच मौजूद हैं। जिस अभिनेता ने कभी वड़ा पाव और चाय पर दिन गुजारे, उसने अपने संघर्ष और अपमान को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। _____________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. पैसे बचाने के लिए पैदल चलती थीं हुमा कुरैशी:पीजी में रहीं; 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में ₹65,000 मिले, हिट के बाद भी स्ट्रगल करना पड़ा दिल्ली की हुमा कुरैशी ने एक्टिंग को करियर बनाने के लिए परिवार को मनाने में महीनों लगाए। मुंबई पहुंचीं तो न गॉडफादर था, न फिल्मी लॉन्च। छोटे से पीजी में चार लड़कियों के साथ रहकर ऑडिशन देने वाली हुमा ने विज्ञापनों से शुरुआत की। शाहरुख खान और आमिर खान जैसे सितारों के साथ विज्ञापन किए। पूरी खबर पढ़ें..

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लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैच, जीत को वर्षों तरसती रहीं

5 team Most consecutive defeats in Test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच हारने का शर्मनाक रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम दर्ज है, जिसने 2001 से 2004 के दौरान लगातार पराजय का सामना किया. इसके अलावा जिम्बाब्वे दो अलग-अलग दौरों में लगातार 11 और 10 मुकाबले हारा. शुरुआती दौर (1889-1899) में दक्षिण अफ्रीका भी लगातार 8 टेस्ट हार चुका है. सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें इस प्रकार हैं. Fri, 11 Sep 2026 07:01:02 +0530

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