Responsive Scrollable Menu

घर के मंदिर में टूटी हुई भगवान की मूर्ति रखनी चाहिए या नहीं? जानें धार्मिक मान्यता और पूजा के नियम

Khndit murti puja niyam: कई हिंदू घरों में पूजा स्थल पर देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें रखी जाती हैं। समय के साथ कभी-कभी मूर्ति टूट या खंडित हो सकती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या उस मूर्ति की पूजा जारी रखनी चाहिए या उसे बदल देना चाहिए।

धार्मिक परंपराओं में इस विषय को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कई लोग खंडित प्रतिमा की नियमित पूजा न करने और उसके स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा का पालन करते हैं।

खंडित मूर्ति की पूजा क्यों नहीं की जाती?
लोकप्रिय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के लिए रखी गई प्रतिमा को पूर्ण और साफ-सुथरा होना चाहिए। यदि मूर्ति का कोई हिस्सा टूट जाए, तो कई परंपराओं में उसकी नियमित पूजा बंद करने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, यह मान्यता अलग-अलग संप्रदायों, परिवारों और धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकती है। इसलिए किसी विशेष पूजा पद्धति का पालन करने वाले लोग अपने पारंपरिक नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं।

टूटी हुई मूर्ति का क्या करना चाहिए?
धार्मिक परंपराओं में खंडित मूर्ति को सम्मानपूर्वक हटाने की बात कही जाती है। कई लोग पुरानी या टूटी हुई प्रतिमा को किसी पवित्र स्थान पर रख देते हैं या अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन करते हैं।

इस दौरान मूर्ति को सामान्य वस्तु की तरह फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा पर जोर दिया जाता है।

नई मूर्ति स्थापित करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
यदि पुरानी प्रतिमा के स्थान पर नई मूर्ति स्थापित की जा रही है, तो घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई परिवार अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद नई प्रतिमा स्थापित करते हैं।

प्रतिष्ठा या स्थापना की विस्तृत विधि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकती है। ऐसे में परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पूजा कर सकता है।

क्या तस्वीर फट जाने पर भी बदलनी चाहिए?
देवी-देवताओं की तस्वीर फटने या खराब होने को लेकर भी कई परिवारों में ऐसी ही धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लोग क्षतिग्रस्त तस्वीर को बदलकर नई तस्वीर लगाने की परंपरा निभाते हैं।

पुरानी तस्वीर को सम्मान के साथ हटाने और सुरक्षित तरीके से रखने या स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार उसका निस्तारण करने की सलाह दी जाती है।

आज भी निभाई जाती हैं ये धार्मिक परंपराएं
भारत के अलग-अलग हिस्सों में खंडित मूर्तियों और पुरानी धार्मिक तस्वीरों को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। आधुनिक समय में भी कई परिवार इन मान्यताओं का पालन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करते हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोकविश्वासों और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित है। अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में पूजा से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसे केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

Continue reading on the app

Bhaum Pradosh Vrat 2026: सितंबर में इस दिन रखा जाएगा भौम प्रदोष व्रत, जानें पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Bhaum Pradosh Vrat 2026: सितंबर 2026 में भाद्रपद मास का पहला भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार और त्रयोदशी तिथि के संयोग के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत मंगल ग्रह से जुड़े दोष, कर्ज और जीवन की परेशानियों से राहत के लिए किया जाता है।

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

सितंबर 2026 में भाद्रपद मास का पहला भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करने और व्रत रखने से विशेष पुण्य फल मिलने की मान्यता है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार सितंबर में पड़ने वाले भौम प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल इस प्रकार रहेगा-
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 8 सितंबर 2026, दोपहर 2:42 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 9 सितंबर 2026, दोपहर 12:30 बजे
प्रदोष काल पूजा: 8 सितंबर, शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक

प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूजा के लिए बताए गए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है।

मंगल दोष से जोड़कर क्यों देखा जाता है भौम प्रदोष?
ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसी वजह से मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से कुंडली में मंगल से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह ज्योतिषीय और धार्मिक विश्वास हैं, इनका वैज्ञानिक आधार प्रमाणित नहीं है।

कर्ज और आर्थिक परेशानी से जुड़ी है ये मान्यता
भौम प्रदोष व्रत को कर्ज और आर्थिक परेशानियों से राहत पाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को आर्थिक संकट से उबरने की शक्ति और सकारात्मकता मिलती है। इसके अलावा स्वास्थ्य, मानसिक शांति और दीर्घायु के लिए भी इस व्रत को शुभ माना जाता है।

भौम प्रदोष पर ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
भौम प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा करें।

पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। भगवान शिव को अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित की जा सकती है। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करना भी शुभ माना जाता है।

शिव के साथ हनुमान जी की पूजा
चूंकि भौम प्रदोष मंगलवार को पड़ता है, इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन कर सकते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार शिव आराधना के साथ हनुमान जी की भक्ति करने से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि, पूजा-पद्धति और मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं।

ध्यान रखें
भौम प्रदोष व्रत से मंगल दोष, कर्ज या किसी विशेष परेशानी के निश्चित रूप से दूर होने की बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। पूजा-पाठ आस्था का विषय है। आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए व्यावहारिक और विशेषज्ञ सलाह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Continue reading on the app

  Sports

Success Story: सड़क हादसे में खोया दायां हाथ, फिर भी नहीं हारी हिम्मत, 13 साल की केसर ने 6 मेडल जीत रचा इतिहास

Shooter Kesar Parikh Success Story: राजस्थान की 13 वर्षीय निशानेबाज केसर पारिक ने अपनी मेहनत और जज्बे से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बचपन में सड़क हादसे में दायां हाथ गंवाने के बावजूद केसर ने हौसला नहीं खोया और शूटिंग को अपना जुनून बना लिया. महज 6 से 8 महीने पहले शूटिंग शुरू करने वाली केसर ने देहरादून में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 गोल्ड और 1 सिल्वर समेत 6 मेडल जीते. जयपुर की एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में वह रोजाना 6 से 8 घंटे ट्रेनिंग करती हैं. उनके कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में केसर तकनीक, शरीर का संतुलन और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हैं. योगेश शेखावत पैरा शूटिंग से जुड़े हैं और उनके मार्गदर्शन में मोना अग्रवाल ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. केसर की सफलता साबित करती है कि शारीरिक चुनौती सपनों की राह रोक नहीं सकती. Sun, 13 Sep 2026 06:08:08 +0530

  Videos
See all

BRICS Viral Moment: मलेशिया के PM ने गाए भारतीय फिल्मों के गाने! #viralvideo #bharatmandapam #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-13T02:04:50+00:00

BRICS Gala Dinner 2026: भारत मंडपम में PM Modi का शाही डिनर! पहुंचे Putin, देखिए तस्वीरें #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-13T02:05:39+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers